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अब से चेक क्लियरेंस में नहीं लगेगा अधिक समय, कुछ घंटों में आएगा पैसा
RBI का यह निर्णय भारत के बैंकिंग सेक्टर को अधिक आधुनिक और ग्राहक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक अहम कदम है. इससे न केवल ग्राहकों को त्वरित सेवा मिलेगी, बल्कि चेक आधारित ट्रांजैक्शनों में विश्वास भी बढ़ेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago
त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है. अब चेक क्लियर होने में दो दिन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. नए नियमों के तहत चेक का निपटान लगभग रीयल टाइम में किया जाएगा, जिससे ग्राहकों को चंद घंटों में भुगतान मिल सकेगा. यह व्यवस्था 4 अक्टूबर 2025 से देशभर में लागू हो गई है.
अब सिर्फ एक सेशन में होगा चेक प्रेजेंटेशन
आरबीआई ने नए नियमों के तहत सिंगल प्रेजेंटेशन सेशन लागू किया है. अब सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चेक बैंक में प्रस्तुत किए जा सकेंगे. संबंधित बैंक को चेक की स्कैन कॉपी क्लियरिंग हाउस को भेजनी होगी. क्लियरिंग हाउस इन चेक की इमेज को रीयल टाइम में संबंधित बैंकों को भेजेगा. इसके बाद चेक का निपटान उसी दिन संभव हो सकेगा, पहले जहां यह प्रक्रिया T+1 यानी एक दिन बाद होती थी, अब यह कुछ ही घंटों में पूरी हो सकेगी.
ग्राहकों को कुछ घंटों में मिलेगी पेमेंट
वित्तीय सेवा विशेषज्ञ विवेक अय्यर (पार्टनर, ग्रांट थॉर्नटन भारत) के मुताबिक, इस बदलाव से ग्राहकों को भुगतान की त्वरित सुविधा मिलेगी और बैंकिंग सिस्टम की दक्षता बढ़ेगी.
चेक क्लीयरेंस की प्रक्रिया दो चरणों में लागू
इस नई व्यवस्था को दो फेज में लागू किया जा रहा है: पहला चरण: 4 अक्टूबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक
- बैंक को चेक प्राप्त होने पर पुष्टिकरण सत्र खत्म होने तक उसकी पुष्टि करनी होगी.
- यदि समय पर पुष्टि नहीं हुई, तो चेक को स्वीकृत माना जाएगा और सेटलमेंट में शामिल किया जाएगा.
- इस फेज में चेक का आइटम एक्सपायरी टाइम शाम 7 बजे होगा.
दूसरा चरण: 3 जनवरी 2026 से लागू
- चेक की एक्सपायरी टाइमिंग T+3 घंटे हो जाएगी.
- अगर कोई चेक 3 घंटे में कन्फर्म नहीं होता, तो वह भी स्वीकृत मान लिया जाएगा.
- दोपहर 2 बजे सेटलमेंट शुरू होंगे और सुबह 11 बजे से पुष्टिकरण सत्र समाप्त होने तक हर घंटे सेटलमेंट किए जाएंगे.
प्रस्तुतकर्ता बैंक इन्हें प्रोसेस कर सकेंगे और सभी सिक्योरिटी चेक्स के बाद, सेटलमेंट के एक घंटे के भीतर ग्राहक के खाते में भुगतान ट्रांसफर कर दिया जाएगा.
बढ़ती ट्रांजैक्शन वॉल्यूम को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला
RBI के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) के तहत कुल 609.54 मिलियन ट्रांजैक्शन हुए थे, जिनका कुल मूल्य ₹71.13 लाख करोड़ रुपये था. वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत से अब तक ट्रांजैक्शन वैल्यू **₹29.39 लाख करोड़** तक पहुंच चुकी है. इस बड़े वॉल्यूम को ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक ने चेक क्लीयरेंस प्रक्रिया को और तेज करने का फैसला किया है.
डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा सहारा
यह सिस्टम उन इलाकों के लिए खासतौर पर फायदेमंद होगा जहां डिजिटल बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ है. आरबीआई ने बैंकों की बैकएंड टेक्नोलॉजी को अपग्रेड कर नई प्रणाली के अनुकूल बनाया है.
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