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Tata ग्रुप के 'सच्चे सिपाही' के निधन पर भावुक हुए रतन टाटा, इस तरह किया याद
आरके कृष्णकुमार ने टाटा समूह में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया था. उनका दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
टाटा समूह को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आरके कृष्णकुमार (RK Krishnakumar) का निधन हो गया है. उन्होंने 84 की उम्र में रविवार को अंतिम सांस ली. उन्हें मुंबई स्थित अपने घर में दिल का दौरा पड़ा था. पद्मश्री से सम्मानित कृष्णकुमार को रतन टाटा का करीबी माना जाता था. वह समूह में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे थे.
कई पदों पर किया काम
केरल में जन्मे कृष्णकुमार Tata Group में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे. वे टाटा संस के पूर्व डायरेक्टर थे. साथ ही उन्होंने टाटा ग्रुप की आतिथ्य शाखा 'इंडियन होटल्स' में भी सेवाएं दी थीं. जानकारी के मुताबिक, कृष्णकुमार का अंतिम संस्कार 3 जनवरी को शाम 4.30 बजे चंदनवाड़ी श्मशान घाट में किया जाएगा. रतन टाटा ने कृष्णकुमार के निधन पर शोक व्यक्त किया है.
टाटा ने कही ये बात
अपने सहयोगी को याद करते हुए Ratan Tata ने कहा, ‘मेरे दोस्त और सहयोगी आरके कृष्णकुमार के इस तरह चले जाने से, मुझे जो दुख हुआ है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. समूह के भीतर और व्यक्तिगत रूप से हमने जो सौहार्दपूर्ण रिश्ते साझा किए, वो हमेशा मुझे याद रहेंगे. वह टाटा समूह के सच्चे सिपाही थे, जो हमेशा सभी को याद आएंगे'.
इन्होंने भी जताया दुख
टाटा संस के वर्तमान अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन ने भी कृष्णकुमार के निधन पर शोक व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि टाटा समूह में कृष्णकुमार का विशाल योगदान था, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता. वह हमेशा कम विशेषाधिकार प्राप्त लोगों की मदद करना और उनके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालना चाहते थे. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी ट्वीट करके अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं. उन्होंने लिखा है, ' थलास्सेरी में जन्मे कृष्ण कुमार ने राज्य के साथ समूह के संबंधों को मजबूत करने में मदद की, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा'.
ग्रुप को दिए 50 साल
कृष्णकुमार को रतन टाटा के विश्वासपात्र माना जाता था. 'केके' के नाम से पहचाने जाने वाले कृष्णकुमार ने ग्रुप में 50 साल तक सेवाएं दीं. वे 75 साल की उम्र में 2013 में रिटायर हुए थे. कृष्णकुमार सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी भी थे, जिनकी टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है. उन्होंने ग्रुप की कई कंपनियों में काम किया. बाद में वह टाटा ट्रस्ट के माध्यम से परोपकारी गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे.
कैसे जीता रतन टाटा का विश्वास?
1997 में Tata Tea के कुछ कर्मचारियों को असम के अलगाववादी संगठन उल्फा ने बंधक बना लिया था. इस घटना से रतन टाटा बुरी तरह हिल गए थे. कृष्णकुमार उस समय संकट मोचक की भूमिका में सामने आए. उन्होंने जिस कुशलता से इस संकट का मुकाबला किया, उससे रतन टाटा काफी प्रभावित हुए. इस घटना के बाद से कृष्णकुमार टाटा के काफी करीब आ गए थे. टाटा उन पर काफी ज्यादा विश्वास करने लगे थे. साइरस मिस्त्री विवाद के समय जब टाटा परेशानी में घिरे, तब कृष्णकुमार उनके साथ थे. वह उस टीम का हिस्सा थे, जो टाटा को इस विवाद से निकलने में मदद का रही थी. उन्होंने Tata Global Beverages के एक्सपेंशन प्लान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. कृष्णकुमार ने 1963 में टाटा समूह जॉइन किया था. वह सबसे पहले Tata Global Beverages का हिस्सा बने, बाद में उन्होंने टाटा की दूसरी कंपनियों में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया.
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