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ई-कॉमर्स कंपनियों को बड़ी राहत, निर्यात के लिए इन्वेंटरी मॉडल में FDI को सरकार की मंजूरी
इस फैसले से Amazon और Flipkart जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा. हालांकि, घरेलू बाजार में इन्वेंटरी आधारित ई-कॉमर्स मॉडल पर विदेशी निवेश की पाबंदी पहले की तरह जारी रहेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश (FDI) से जुड़ी ई-कॉमर्स नीति में बड़ा बदलाव करते हुए विदेशी स्वामित्व वाली कंपनियों को भारत में बने उत्पादों के निर्यात के लिए इन्वेंटरी (स्टॉक) रखने की अनुमति दे दी है. इस फैसले से Amazon और Walmart के स्वामित्व वाली Flipkart जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा मिलेगा. हालांकि, घरेलू बाजार में इन्वेंटरी आधारित ई-कॉमर्स मॉडल पर विदेशी निवेश की पाबंदी पहले की तरह जारी रहेगी.
निर्यात के लिए इन्वेंटरी मॉडल को मिली मंजूरी
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने प्रेस नोट-3 (2026 सीरीज) जारी कर भारत में निर्मित और उत्पादित वस्तुओं के निर्यात के लिए इन्वेंटरी आधारित ई-कॉमर्स कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दे दी है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत अधिसूचना जारी होने की तारीख से प्रभावी होगा.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए Amazon के प्रवक्ता ने कहा कि नई नीति भारतीय कारोबारियों, खासकर छोटे शहरों के निर्माताओं और MSME को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में मदद करेगी. कंपनी ने कहा कि वह 2030 तक भारत से 80 अरब डॉलर के संचयी निर्यात के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है और यह फैसला 'ब्रांड इंडिया' को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा.
पहले क्या था नियम?
अब तक सरकार मार्केटप्लेस आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में 100% FDI की अनुमति देती थी, लेकिन इन्वेंटरी आधारित मॉडल में विदेशी निवेश पर रोक थी. नए फैसले के बाद केवल भारत में बने सामान के निर्यात के लिए इन्वेंटरी आधारित मॉडल में FDI की मंजूरी दी गई है. हालांकि, घरेलू बाजार के लिए विदेशी कंपनियां अब भी इन्वेंटरी मॉडल के तहत कारोबार नहीं कर सकेंगी.
क्या होता है इन्वेंटरी और मार्केटप्लेस मॉडल?
इन्वेंटरी आधारित मॉडल में ई-कॉमर्स कंपनी खुद सामान का स्टॉक रखती है और सीधे ग्राहकों को बेचती है. वहीं, मार्केटप्लेस मॉडल में कंपनी केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है, जहां विक्रेता और खरीदार आपस में लेनदेन करते हैं. इस मॉडल में कंपनी खुद स्टॉक नहीं रखती.
विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार की यह अधिसूचना लंबे समय से चली आ रही नीतिगत अस्पष्टताओं को दूर करती है. इससे ई-कॉमर्स कंपनियों को निर्यात कारोबार में अधिक स्पष्टता मिलेगी और भारत के विनिर्माण तथा निर्यात क्षेत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.
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