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विदेशी खर्च घटा, इक्विटी और एफडीआई में भारतीयों की दिलचस्पी बढ़ी

RBI के आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय उपभोक्ता विदेश खर्च में सतर्कता बरत रहे हैं, जबकि निवेश के मोर्चे पर उनका रुझान मजबूत बना हुआ है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago

भारतीयों के विदेश खर्च के रुझान में बदलाव देखने को मिल रहा है. जहां एक ओर विदेश यात्रा और शिक्षा पर भेजे जाने वाले धन में कमी आई है, वहीं दूसरी ओर विदेशी इक्विटी, डेट और प्रत्यक्ष निवेश में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. भारतीय रिजर्व बैंक  (RBI) के ताजा आंकड़े इस बदलते निवेश व्यवहार की तस्वीर पेश करते हैं.

एलआरएस के तहत विदेश भेजा गया धन घटा
आरबीआई की उदारीकृत धनप्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत अक्टूबर 2025 में विदेश भेजे गए धन में सालाना आधार पर 1.81 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. यह राशि एक साल पहले के 2.40 अरब डॉलर से घटकर 2.35 अरब डॉलर रह गई. यात्रा और शिक्षा मद में खर्च कम होने के कारण कुल धनप्रेषण पर दबाव पड़ा, हालांकि विदेशी निवेश ने गिरावट को कुछ हद तक संतुलित किया.

अप्रैल–अक्टूबर में कुल रेमिटेंस में कमी
वित्त वर्ष 2026 में अप्रैल से अक्टूबर के बीच कुल 17.2 अरब डॉलर विदेश भेजे गए, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 18 अरब डॉलर था. एलआरएस योजना के तहत कोई भी भारतीय, जिसमें नाबालिग भी शामिल हैं, एक वित्त वर्ष में 2.5 लाख डॉलर तक विदेश भेज सकता है. 2004 में शुरू हुई इस योजना की सीमा समय-समय पर आर्थिक हालात को देखते हुए बढ़ाई गई है.

यात्रा और शिक्षा खर्च में तेज गिरावट
कुल धनप्रेषण में अंतरराष्ट्रीय यात्रा की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत रहती है. मासिक आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में विदेश यात्रा पर खर्च सालाना आधार पर 7.02 प्रतिशत घटकर 1.35 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1.45 अरब डॉलर था.

विदेश में शिक्षा पर खर्च में और ज्यादा गिरावट देखी गई. यह सालाना आधार पर 26.19 प्रतिशत घटकर 16.33 करोड़ डॉलर रह गया, जो एक साल पहले 22.12 करोड़ डॉलर था.

इक्विटी, डेट और रियल एस्टेट निवेश में उछाल
इसके उलट, विदेशी इक्विटी और डेट में निवेश में जबरदस्त तेजी आई है. इस श्रेणी में निवेश सालाना आधार पर 83 प्रतिशत बढ़कर 273.09 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल यह 149.34 करोड़ डॉलर था. अचल संपत्ति की खरीद के लिए भेजा गया धन भी 78.8 प्रतिशत बढ़कर 44.64 करोड़ डॉलर हो गया. वहीं विदेशी जमा के लिए भेजी गई राशि में 20.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 47.16 करोड़ डॉलर तक पहुंच गई.

रिश्तेदारों, उपहार और इलाज पर खर्च घटा
निकट संबंधियों के खर्च के लिए भेजी गई राशि सालाना आधार पर 3.5 प्रतिशत घटकर 273.86 करोड़ डॉलर रह गई. उपहार के रूप में भेजा गया धन भी घटकर 197.53 करोड़ डॉलर रह गया, जो एक साल पहले 216.30 करोड़ डॉलर था. इलाज के लिए विदेश भेजा गया धन भी घटकर 50.4 लाख डॉलर रह गया, जो खर्च में सतर्कता को दर्शाता है.

एनआरआई जमा में आई कमी
विदेश में रह रहे भारतीयों द्वारा भारत में जमा किया गया धन भी घटा है. वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल–अक्टूबर के दौरान एनआरआई जमा घटकर 8.3 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 11.8 अरब डॉलर था. इसका प्रमुख कारण एफसीएनआर-बी जमा में कमी बताया गया है.

अक्टूबर 2025 के अंत तक कुल एनआरआई जमा 168.78 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले 162.69 अरब डॉलर था.

शुद्ध एफडीआई में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल से अक्टूबर के बीच शुद्ध विदेशी प्रत्यक्ष निवेश बढ़कर 6.2 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 3.3 अरब डॉलर था. इस दौरान सकल एफडीआई भी बढ़कर 58.3 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 50.5 अरब डॉलर था. कुल एफडीआई प्रवाह में सिंगापुर, मॉरीशस और अमेरिका की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक रही.

आरबीआई ने अक्टूबर में बेचे 11.8 अरब डॉलर
रुपये को सहारा देने के लिए आरबीआई ने अक्टूबर 2025 में 11.8 अरब डॉलर की बिक्री की, जो दिसंबर 2024 के बाद 10 महीनों में सबसे अधिक है. सितंबर में केंद्रीय बैंक ने 7.9 अरब डॉलर बेचे थे. इस हस्तक्षेप का उद्देश्य रुपये को डॉलर के मुकाबले 88.80 के स्तर से नीचे जाने से रोकना था. नवंबर 2025 में रुपये का रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट 97.51 पर स्थिर रहा.

 


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