होम / बिजनेस / 2023 के जल्द गुजरने की कामना कर रहे होंगे Adani, फिर सामने आई ये बुरी खबर
2023 के जल्द गुजरने की कामना कर रहे होंगे Adani, फिर सामने आई ये बुरी खबर
अडानी समूह को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स में खबर सामने आई है कि विदेशी निवेशक समूह का साथ छोड़कर जा रहे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
अरबपति कारोबारी गौतम अडानी (Gautam Adani) के लिए 2023 बहुत खराब गया है. साल की शुरुआत में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आ गई और उसके बाद से अब तक अडानी समूह (Adani Group) किसी न किसी परेशानी का सामना करता आ रहा है. अब खबर आई है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FPI) बड़े पैमाने पर अडानी समूह का साथ छोड़ रहे हैं. ऐसा तब है जब समूह निवेशकों का भरोसा जीतने की लगातार कोशिश कर रहा है. गौतम अडानी के नेतृत्व वाले इस समूह में कई विदेशी निवेशकों ने पैसा लगाया है, लिहाजा उनका इस तरह हाथ छुड़ाकर जाना निश्चित तौर पर ग्रुप के लिए बुरी खबर है.
ये कंपनी सबसे ज्यादा प्रभावित
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) ने सितंबर 2023 तिमाही में अडानी ग्रुप की ज्यादातर कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम की है. इससे सबसे ज्यादा समूह की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज प्रभावित हुई है. अडानी एंटरप्राइजेज में विदेशी निवेशकों ने जुलाई-सितंबर तिमाही में 4.8 प्रतिशत हिस्सेदारी घटा दी है. इसके साथ ही कंपनी में FPIs की हिस्सेदारी 14.52% रह गई है, जबकि जून तिमाही में यह आंकड़ा 19.34 प्रतिशत था. अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर शुक्रवार को करीब 3 फीसदी की उछाल के साथ 2,259.80 रुपए पर बंद हुआ था.
इनमें भी कम हुई हिस्सेदारी
इसी तरह, अडानी पोर्ट्स में विदेशी निवेशकों ने 3% से ज्यादा की हिस्सेदारी घटाई है. अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक जोन में ओवरसीज होल्डिंग्स अब घटकर 13.8 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई है. जून 2023 तिमाही के आखिर में कंपनी में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 16.99% थी. यानी इस कंपनी में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 3.16% कम हुई है. वहीं, समूह की सीमेंट कंपनी ACC में भी FPI की हिस्सेदारी लगभग 3% घटी है. 30 सितंबर के आखिर में यह 7.1 प्रतिशत पहुंच गई है. ACC सीमेंट्स के शेयर कल करीब 1% की गिरावट के साथ 1,882.90 रुपए पर बंद हुए थे.
NDTV में जरूर बढ़ा निवेश
रिपोर्ट्स के अनुसार, अडानी समूह की 10 लिस्टेड कंपनियों में से अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स, ACC, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस, अडानी विल्मर और अडानी टोटल गैस में विदेशी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी कम की है. जबकि NDTV में विदेशी संस्थागत निवेशकों को हिस्सेदारी बढ़कर 0.05 प्रतिशत पहुंच गई है, जो कि जून तिमाही में 0.02% थी. विदेशी निवेशकों का इस तरह समूह का साथ छोड़ना कहीं न कहीं ग्रुप को लेकर उनका अविश्वास दर्शाता है. इससे समूह की छवि भी प्रभावित हो सकती है. हालांकि, अडानी समूह ने यह साबित जरूर किया है कि हिंडनबर्ग के प्रभावों से वह तेजी से बाहर निकल रहा है.
टैग्स