QED इन्वेस्टर्स की अगुवाई में Flam ने सीरीज B फंडिंग राउंड में जुटाए 40 मिलियन डॉलर

AI इंटरैक्टिव कंटेंट कंपनी फ्लैम इस पूंजी का इस्तेमाल रिसर्च एंड डेवलपमेंट, अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के विस्तार और वैश्विक स्तर पर एंटरप्राइज बिक्री बढ़ाने के लिए करेगी.

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Published - Wednesday, 16 September, 2026
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Wednesday, 16 September, 2026
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आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) इंटरैक्टिव कंटेंट कंपनी फ्लैम (Flam) ने QED इन्वेस्टर्स की अगुवाई में सीरीज B फंडिंग राउंड में 40 मिलियन डॉलर जुटाए हैं. इस फंडिंग राउंड में क्ले पोंड कैपिटल, मार्टिन शावेज,  ओलिवियर पोमेल, वेंकी हरिनारायण और शाहरुख खान ने भी हिस्सा लिया. कंपनी के मौजूदा निवेशक RTP Global और Dovetail भी इस राउंड में शामिल हुए.

फ्लैम ने बताया कि वह नई पूंजी का इस्तेमाल अपने AI मॉडल्स में रिसर्च एंड डेवलपमेंट को आगे बढ़ाने, अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार करने और वैश्विक बाजारों में एंटरप्राइज बिक्री को मजबूत करने के लिए करेगी.

2021 में स्थापित और सैन फ्रांसिस्को मुख्यालय वाली फ्लैम ऐसा इंटरैक्टिव कंटेंट विकसित करती है, जो यूजर के इनपुट के आधार पर प्रतिक्रिया देता है और लगभग वीडियो जैसी गति से स्ट्रीम होता है. कंपनी की भारत और जापान में भी टीमें हैं.

कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में Flicks, Airboards और Visual Agents शामिल हैं. Flicks ऐसे इंटरैक्टिव वीडियो हैं, जो दर्शकों के इनपुट के आधार पर बदलते हैं. वहीं, Airboards फोन के कैमरा इंटरफेस के जरिए बिना किसी ऐप को डाउनलोड किए इंटरैक्टिव 3D कंटेंट उपलब्ध कराते हैं. Visual Agents AI आधारित इंटरैक्टिव कैरेक्टर्स हैं, जिन्हें यूजर्स के साथ प्रतिक्रिया करने और विभिन्न काम करने के लिए डिजाइन किया गया है.

कंपनी के अनुसार, फ्लैम के पास 15 से अधिक पेटेंट हैं और उसने अमेरिका, यूरोप और एशिया में 100 से ज्यादा एंटरप्राइज ग्राहकों के साथ समझौते किए हैं. इसके ग्राहकों में Google, Reliance और Hyundai शामिल हैं.

फ्लैम के मुताबिक, उसके इंटरैक्टिव कंटेंट का इस्तेमाल प्रोडक्ट विजुअलाइजेशन, लर्निंग एंड डेवलपमेंट, एंटरटेनमेंट, फैन एंगेजमेंट, कस्टमर सपोर्ट, सेल्स और मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है.
 


UP में निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने की तैयारी, ₹200 करोड़ के एथेनॉल प्लांट समेत 23 प्रस्ताव मंजूर

कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश खिलौना निर्माण प्रोत्साहन नीति, 2025 को भी मंजूरी दी है. सरकार के मुताबिक, इस नीति का उद्देश्य राज्य में खिलौना निर्माण को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है.

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Published - Wednesday, 16 September, 2026
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Wednesday, 16 September, 2026
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उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को 23 प्रस्तावों को मंजूरी दी. इनमें मथुरा की बंद पड़ी चीनी मिल को दोबारा शुरू कर एथेनॉल उत्पादन, खिलौना निर्माण को बढ़ावा देने के लिए नई नीति और चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे समेत कई अहम फैसले शामिल हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मथुरा जिले की छाता तहसील में 19 साल से बंद चीनी मिल को फिर से शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. फिलहाल यहां गन्ने और धान से एथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा. प्रस्तावित प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता 3.96 करोड़ लीटर होगी और इसे स्थापित करने पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

11 महीने चलेगा एथेनॉल प्लांट

गन्ना मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण के मुताबिक, प्लांट साल में करीब 11 महीने संचालित होगा. चीनी मिल को पूरी क्षमता से चलाने के लिए सालाना करीब 50 लाख टन गन्ने की जरूरत होगी, जबकि फिलहाल क्षेत्र में इतनी मात्रा में गन्ना उपलब्ध नहीं है. ऐसे में पहले चरण में एथेनॉल उत्पादन शुरू किया जाएगा. गन्ने की उपलब्धता बढ़ने के बाद यहां चीनी का उत्पादन भी शुरू करने की योजना है. चीनी मिल के पास उपलब्ध 96 एकड़ जमीन पर गोदाम और अन्य सुविधाओं से जुड़ा परिसर भी विकसित किया जाएगा.

खिलौना उद्योग के लिए नई नीति

कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश खिलौना निर्माण प्रोत्साहन नीति, 2025 को भी मंजूरी दी है. सरकार के मुताबिक, इस नीति का उद्देश्य राज्य में खिलौना निर्माण को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है.

इसके अलावा चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के संशोधित परियोजना प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई. करीब 15.172 किलोमीटर लंबा यह छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (EPC) मॉडल पर बनाया जाएगा. परियोजना की अनुमानित लागत 1,008.67 करोड़ रुपये है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी. निर्माण एजेंसी के चयन के लिए वैश्विक टेंडर जारी किया जाएगा.

ऑटोमैटिक टेस्टिंग सेंटर के नियम बदले

परिवहन विभाग के ऑटोमैटिक टेस्टिंग सेंटर को लेकर भी कैबिनेट ने नियमों में बदलाव को मंजूरी दी है. अब एक लाइन वाले सेंटर के लिए 1,500 वर्ग मीटर और दो लाइन वाले सेंटर के लिए 3,000 वर्ग मीटर जमीन पर्याप्त होगी. पहले सेंटर के लिए कम से कम 2.5 एकड़ जमीन की आवश्यकता थी.

राज्य सरकार ने 82 ऑटोमैटिक टेस्टिंग सेंटर के लिए मंजूरी पत्र जारी किए थे, लेकिन इनमें से 42 पर ही काम शुरू हो पाया था. नए नियमों के तहत पूरे साल आवेदन किए जा सकेंगे और एक जिले में अधिकतम तीन सेंटर स्थापित किए जा सकेंगे.

तीन जगह बनेंगे नए बस स्टैंड

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के अनुसार, सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ और बढ़नी तथा हरदोई जिले के सवायजपुर में नए बस स्टैंड बनाए जाएंगे. इनके लिए जमीन राजस्व विभाग उपलब्ध कराएगा.

किसानों और पूर्व अग्निवीरों के लिए फैसले

कैबिनेट ने मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को कम ब्याज दर पर लंबी अवधि का कर्ज उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी. उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के माध्यम से किसानों को सालाना 6 फीसदी ब्याज दर पर अधिकतम 6 लाख रुपये तक का कर्ज दिया जाएगा.

इसके अलावा जेल वार्डर की सीधी भर्ती में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 फीसदी पद आरक्षित करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है. परिवहन विभाग में प्रवर्तन सिपाही की सीधी भर्ती में भी पूर्व अग्निवीरों को 20 फीसदी क्षैतिज आरक्षण और उम्र सीमा में छूट देने का फैसला किया गया है.

स्मार्ट स्कूल और नई यूनिवर्सिटी को मंजूरी

कैबिनेट ने बेसिक शिक्षा परिषद के तहत आने वाले प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी. इसके अलावा अलीगढ़ में नई यूनिवर्सिटी स्थापित करने और अयोध्या के मिल्कीपुर में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) का क्षेत्रीय केंद्र बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई.


कल 1,400 अंक फिसला सेंसेक्स, आज बाजार की कैसी रहेगी चाल? गिफ्ट निफ्टी कमजोर

मंगलवार को सेंसेक्स 1,430 अंक टूटकर 777.94 अंक यानी 1.04 फीसदी की गिरावट के साथ 74,003.82 पर बंद हुआ. निफ्टी भी 279.50 अंक यानी 1.19 फीसदी गिरकर 23,118.60 पर रहा.

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Published - Wednesday, 16 September, 2026
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Wednesday, 16 September, 2026
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मंगलवार को तेज गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. मंगलवार को सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1,430 अंक फिसलकर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी में भी करीब 280 अंकों की गिरावट दर्ज की गई. बुधवार सुबह गिफ्ट निफ्टी में कमजोरी, अमेरिकी बाजारों में गिरावट और 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के 5 फीसदी के पार पहुंचने से घरेलू बाजार में शुरुआती दबाव के संकेत मिल रहे हैं. निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर रहेगी.

मंगलवार को सेंसेक्स 778 अंक टूटा

मंगलवार को सेंसेक्स करीब 600 अंकों की बढ़त के साथ खुला था और कारोबार के दौरान 75,436.44 के स्तर तक पहुंच गया. हालांकि, बाद में बिकवाली बढ़ने से सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1,430 अंक टूटकर 777.94 अंक यानी 1.04 फीसदी की गिरावट के साथ 74,003.82 पर बंद हुआ. निफ्टी भी 279.50 अंक यानी 1.19 फीसदी गिरकर 23,118.60 पर रहा. बाजार में गिरावट के चलते बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 9 लाख करोड़ रुपये घटकर लगभग 472 लाख करोड़ रुपये रह गया. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 23 गिरावट के साथ बंद हुए.

इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल

मंगलवार के कारोबार में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का शेयर 6.04 फीसदी गिरकर सेंसेक्स का सबसे बड़ा नुकसान वाला शेयर रहा. श्रीराम फाइनेंस, अडानी एंटरप्राइजेज, इंडिगो और ग्रासिम इंडस्ट्रीज में भी तेज गिरावट दर्ज की गई.

इसके उलट आईटी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली. इंफोसिस 3.79 फीसदी, HCL टेक्नोलॉजीज 3.64 फीसदी, TCS 2.28 फीसदी, टेक महिंद्रा 2.26 फीसदी और विप्रो 1.55 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए.

गिफ्ट निफ्टी दे रहा कमजोरी के संकेत

बुधवार सुबह गिफ्ट निफ्टी 16 अंक की गिरावट के साथ 23,211.50 के स्तर पर कारोबार करता दिखा. यह संकेत देता है कि मंगलवार की तेज गिरावट के बाद घरेलू बाजार की शुरुआत में भी दबाव रह सकता है. हालांकि, शुरुआती संकेत पूरे कारोबारी सत्र की दिशा तय नहीं करते और दिन के दौरान बाजार की चाल वैश्विक संकेतों तथा घरेलू ट्रिगर्स पर निर्भर करेगी.

बुधवार को एशिया-प्रशांत बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला. जापान का निक्केई 225 करीब 0.19 फीसदी नीचे था, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 0.25 फीसदी की बढ़त में कारोबार कर रहा था.

10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5 फीसदी के पार

अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.04 फीसदी तक पहुंच गई. बॉन्ड यील्ड में यह तेजी वैश्विक बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने भी अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड के 5 फीसदी के स्तर की ओर बढ़ने को इक्विटी बाजारों पर दबाव बढ़ाने वाले कारकों में शामिल किया है.

108 डॉलर के पार ब्रेंट क्रूड

कच्चे तेल की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. बुधवार को ब्रेंट क्रूड करीब 108.52 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई को लेकर चिंताओं के बीच तेल की कीमतों पर बाजार की नजर बनी हुई है. भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक ऊंची कीमतें रहने से महंगाई और बाहरी खाते पर दबाव की चिंता बढ़ सकती है.

फेड के फैसले पर बाजार की नजर

बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले पर वैश्विक बाजारों की नजर रहेगी. ब्याज दरों के फैसले के साथ फेड की आगे की मौद्रिक नीति को लेकर टिप्पणी भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगी. निवेशक यह आकलन करेंगे कि महंगाई, बॉन्ड यील्ड और आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए फेड आगे ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत देता है.

इन शेयरों रक भी रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आज कई कंपनियों के शेयर फोकस में रहेंगे. दरअसल,  BHEL और Titagarh Rail Systems 50:50 हिस्सेदारी वाली जॉइंट वेंचर कंपनी बनाएंगे, जो Vande Bharat Sleeper Trainsets के लिए 35 साल तक मेंटेनेंस सेवाएं देगी. Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures में Peak XV Partners Investments और Sequoia Capital करीब 1.6 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकते हैं, जिसकी संभावित डील वैल्यू करीब ₹1,918 करोड़ है. वेलस्पन एंटरप्राइजेज में Authum Investment & Infrastructure ने 1.73 फीसदी हिस्सेदारी बेची, जबकि Fidelity Blue Chip Growth Fund ने करीब 1.38 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी. सोनाटा सॉफ्टवेयर ने Amazon Web Services के साथ पांच साल का Strategic Collaboration Agreement किया है. वेदांत फैशन्स के को-सीएफओ राहुल मुरारका ने 14 नवंबर 2026 से प्रभावी इस्तीफा दिया है, वहीं कंपनी को GST मामले में ₹2.73 लाख की पेनल्टी से राहत मिली है. सात्विक ग्रीन एनर्जी को SECI से ₹1,041.63 करोड़ का सोलर PV मॉड्यूल सप्लाई ऑर्डर मिला है. NBCC को विभिन्न सरकारी संस्थाओं से कुल ₹144.98 करोड़ के वर्क ऑर्डर मिले हैं. VIP इंडस्ट्रीज का बोर्ड 18 सितंबर को फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार करेगा. वहीं, ब्लू स्टार से जुड़े ओमान के एक पुराने आर्बिट्रेशन मामले में W.J. Towell & Co LLC ने Dubai Court of Appeal का रुख किया है.

आज किन संकेतकों पर रहेगी नजर?

मंगलवार की तेज गिरावट के बाद बुधवार को बाजार की दिशा के लिए GIFT Nifty, एशियाई बाजारों की चाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतें और फेड के फैसले प्रमुख संकेतक रहेंगे. इन वैश्विक संकेतों के बीच शुरुआती कारोबार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)

 


भारत का अगस्त निर्यात 26.12 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर, व्यापार घाटा घटा

इंजीनियरिंग, पेट्रोलियम, रसायन और कपड़ा क्षेत्र ने निर्यात को गति दी, जबकि अगस्त में सोने का आयात सालाना आधार पर 57.7 प्रतिशत घटा.

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Published - Tuesday, 15 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 15 September, 2026
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भारत का निर्यात अगस्त में सालाना आधार पर 26.12 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर हो गया. वहीं, व्यापार घाटा घटकर 26.86 अरब डॉलर रह गया. सरकार की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में आयात 14.1 प्रतिशत बढ़कर 70.76 अरब डॉलर रहा. यानी आयात की वृद्धि दर निर्यात की तुलना में काफी कम रही.

निर्यात में यह बढ़ोतरी कई प्रमुख क्षेत्रों की मांग के चलते हुई. वहीं, आयात में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि ने व्यापार घाटे को सीमित रखने में मदद की. अगस्त के आंकड़े चालू वित्त वर्ष में भारत के विदेशी व्यापार में जारी विस्तार के बीच आए हैं.

चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-अगस्त के दौरान भारत का निर्यात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 17.85 प्रतिशत बढ़कर 215.91 अरब डॉलर हो गया. इस दौरान आयात 18.21 प्रतिशत बढ़कर 363 अरब डॉलर रहा. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में वस्तुओं के व्यापार में विस्तार हुआ है. इस अवधि में आयात की वृद्धि दर निर्यात से थोड़ी अधिक रही. यह आंकड़े निर्यात और घरेलू मांग के लिए आयातित वस्तुओं, दोनों में जारी गतिविधियों को दर्शाते हैं.

इंजीनियरिंग और रसायन क्षेत्र ने संभाली निर्यात वृद्धि

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि निर्यात में सकारात्मक रुझान बना हुआ है. इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, रसायन और कपड़ा प्रमुख क्षेत्र रहे, जिन्होंने अगस्त में निर्यात वृद्धि को समर्थन दिया. अग्रवाल ने कहा कि भारतीय निर्यात को अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिक्स देशों और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से भी अच्छी मांग मिली है. इन बाजारों से मांग ने प्रमुख उत्पाद श्रेणियों में भारत के निर्यात को बढ़ाने में मदद की है.

सोने के आयात में 57.7 प्रतिशत की भारी गिरावट

अगस्त में भारत का सोने का आयात सालाना आधार पर 57.7 प्रतिशत घटकर 2.3 अरब डॉलर रह गया. पिछले साल अगस्त में सोने का आयात 5.4 अरब डॉलर रहा था. कुल वस्तु आयात में बढ़ोतरी के बावजूद सोने के आयात में यह बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

सोने के आयात में तेज गिरावट से अगस्त में भारत के आयात की संरचना में बदलाव आया. हालांकि, कुल आयात फिर भी बढ़कर 70.76 अरब डॉलर रहा. निर्यात की वृद्धि दर आयात से अधिक रहने के कारण अगस्त में वस्तु व्यापार घाटा 26.86 अरब डॉलर रहा.


भारत-चीन के बीच व्यापार वार्ता शुरू, द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन दूर करने पर जोर

भारत यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म के लागू होने को लेकर भी अपने निर्यातकों को तैयार कर रहा है. यह तैयारी भारत-EU व्यापार समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर से पहले की जा रही है.

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Published - Tuesday, 15 September, 2026
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Tuesday, 15 September, 2026
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भारत और चीन ने द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए व्यापार स्तर पर बातचीत शुरू कर दी है. दोनों देशों के व्यापार मंत्रियों के बीच हुई बैठक को शुरुआती स्तर की बातचीत बताया गया है. भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पक्ष सकारात्मक रुख के साथ आगे बढ़ रहे हैं और द्विपक्षीय व्यापार में मौजूद संरचनात्मक असंतुलन को दूर करने के संभावित उपायों पर चर्चा की जा रही है.

अधिकारियों ने कहा कि भारत-चीन संबंधों में हाल के समय में सुधार हुआ है और दोनों देशों के बीच धीरे-धीरे विश्वास बहाली की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. व्यापार के मुद्दे पर भी दोनों पक्ष सकारात्मक सोच के साथ बातचीत शुरू कर चुके हैं. भारत चीन के साथ मिलकर व्यापार असंतुलन से जुड़े मुद्दों का समाधान तलाशने के लिए तैयार है.

अक्टूबर में लागू हो सकता है भारत-न्यूजीलैंड FTA

अन्य व्यापार समझौतों पर अधिकारियों ने बताया कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में लागू होने की उम्मीद है. वहीं, भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ रही है. अधिकारियों के अनुसार, इसे साल के अंत तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है.

भारत यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के लागू होने को लेकर भी अपने निर्यातकों को तैयार कर रहा है. यह तैयारी भारत-EU व्यापार समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर से पहले की जा रही है.

G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे पीयूष गोयल

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल अमेरिका की यात्रा करेंगे, जहां वह G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे. इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े कुछ लंबित मुद्दों पर बातचीत जारी है. G20 बैठक के दौरान इन विषयों पर दोनों देशों के बीच आगे चर्चा हो सकती है.

BRICS देशों को भारत का निर्यात 13% बढ़ा

भारतीय व्यापार अधिकारियों के अनुसार, अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान BRICS सदस्य देशों को भारत का निर्यात बढ़कर 34.53 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 30.49 अरब डॉलर था. इस तरह निर्यात में करीब 13% की वृद्धि दर्ज की गई.

आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के लिए BRICS बाजारों का महत्व बढ़ रहा है. भारत अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाने और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है.

रूस से आयात 57% बढ़ा

इस अवधि में रूस से भारत का आयात सालाना आधार पर 57% बढ़कर 41.44 अरब डॉलर हो गया. रूस से भारत के प्रमुख आयात में पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक और वनस्पति तेल शामिल रहे. भारत एक ओर प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन को कम करने और वैश्विक व्यापार नियमों में बदलाव के लिए घरेलू निर्यातकों को तैयार करने पर भी ध्यान दे रहा है.


अगस्त में बेरोजगारी दर घटकर 5%, ग्रामीण रोजगार में सुधार का असर

मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई. बेरोजगारी दर में यह कमी मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी घटने के कारण आई, जबकि महीने के दौरान शहरी बेरोजगारी दर लगभग स्थिर रही.

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Published - Tuesday, 15 September, 2026
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Tuesday, 15 September, 2026
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भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोजगारी दर अगस्त में घटकर 5% रह गई, जो जुलाई में 5.1% थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बेरोजगारी में यह कमी मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति सुधरने से आई है. हालांकि, शहरी बेरोजगारी दर मामूली बढ़कर 6.8% हो गई.

अगस्त में ग्रामीण बेरोजगारी घटकर 4.1% रही, जबकि कुल श्रम बल भागीदारी दर मामूली बढ़कर 55.6% हो गई. 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए भारत की बेरोजगारी दर अगस्त में मामूली घटकर 5% हो गई, जबकि जुलाई में यह 5.1% थी. मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई. बेरोजगारी दर में यह कमी मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी घटने के कारण आई, जबकि महीने के दौरान शहरी बेरोजगारी दर लगभग स्थिर रही.

ग्रामीण बेरोजगारी जुलाई के 4.5% से घटकर अगस्त में 4.1% हो गई. वहीं, शहरी बेरोजगारी दर 6.7% से मामूली बढ़कर 6.8% हो गई. सालाना आधार पर अगस्त में कुल बेरोजगारी दर लगभग स्थिर रही. शहरी बेरोजगारी दर में भी खास बदलाव नहीं हुआ, जबकि ग्रामीण बेरोजगारी अगस्त 2025 के 4.3% से घटकर 4.1% रह गई.

श्रम बल भागीदारी दर

15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए कुल श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) जुलाई के 55.4% से मामूली बढ़कर अगस्त में 55.6% हो गई. ग्रामीण LFPR 58% से बढ़कर 58.2% हो गई, जबकि शहरी LFPR 50.4% पर स्थिर रही.

अगस्त 2025 की तुलना में कुल LFPR 0.6 प्रतिशत अंक बढ़कर 55.6% हो गई, जो एक साल पहले 55% थी. ग्रामीण LFPR 1.2 प्रतिशत अंक बढ़कर 58.2% हो गई, जबकि अगस्त 2025 में यह 57% थी. इसके विपरीत, शहरी LFPR 0.5 प्रतिशत अंक घटकर 50.4% रह गई, जो एक साल पहले 50.9% थी.

 


ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड से FY30 तक 10,000 करोड़ रुपये जुटा सकते हैं शहरी निकाय: ICRA

FY27-FY30 के दौरान शहरी बुनियादी ढांचे के लिए 56 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की जरूरत का अनुमान

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Published - Tuesday, 15 September, 2026
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Tuesday, 15 September, 2026
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देश के शहरी स्थानीय निकाय वित्त वर्ष 2026-27 से 2029-30 के बीच ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटा सकते हैं. रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, शहरों में बढ़ती बुनियादी ढांचा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूंजी बाजार से फंड जुटाने की भूमिका बढ़ सकती है.

ICRA के मुताबिक, FY27 से FY30 के दौरान शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश की जरूरत 56 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है. इसमें से करीब 3 लाख करोड़ रुपये तक की जरूरत कमर्शियल डेट के जरिए पूरी की जा सकती है. ऐसे में म्युनिसिपल और ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड के लिए संभावनाएं बढ़ सकती हैं.

पानी और कचरा प्रबंधन जैसी परियोजनाओं को मिल सकता है ग्रीन फाइनेंस

जल आपूर्ति, सीवरेज और वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट, ठोस कचरा प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं ग्रीन फाइनेंस के लिए पात्र हो सकती हैं. इससे नगर निकायों के पास ग्रीन बॉन्ड के जरिए फंड जुटाने के लिए परियोजनाओं की एक बड़ी संभावित सूची उपलब्ध हो सकती है.

निवेशकों की ग्रीन बॉन्ड में बढ़ रही दिलचस्पी

अब तक म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए जुटाए गए 6,540 करोड़ रुपये में करीब एक-चौथाई राशि ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए जुटाई गई है. इसके अलावा करीब एक-चौथाई हिस्से को ग्रीन बॉन्ड के रूप में वर्गीकृत किए जाने की संभावना है.

ICRA ने अनुमान लगाया है कि FY2027-FY2030 के दौरान ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड जारी करने की क्षमता करीब 10,000 करोड़ रुपये हो सकती है. हालांकि, नगर निकायों की तैयारी बेहतर होने पर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है.

हाल में जारी किए गए कुछ ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड को इश्यू साइज की तुलना में करीब पांच गुना सब्सक्रिप्शन मिला है. इससे इस तरह के बॉन्ड में निवेशकों की रुचि का संकेत मिलता है. इन बॉन्ड पर सॉवरेन बेंचमार्क की तुलना में 1.90 प्रतिशत अंक तक और राज्य सरकार के बॉन्ड की तुलना में 1.55 प्रतिशत अंक तक अधिक यील्ड भी मिली है.

नगर निकायों की तैयारी बड़ी चुनौती

ICRA के अनुसार, पूंजी बाजार तक नगर निकायों की पहुंच कई कारकों पर निर्भर करेगी. इनमें क्रेडिट क्वालिटी, वित्तीय खुलासे, कर्ज चुकाने की स्पष्टता, परियोजनाओं की तैयारी और बॉन्ड जारी करने से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए तैयारियां शामिल हैं.

रेटिंग एजेंसी का कहना है कि इन शर्तों के कारण उन नगर निकायों की संख्या सीमित हो सकती है जो वास्तव में पूंजी बाजार से बॉन्ड के जरिए फंड जुटाने में सक्षम हैं. यानी शहरी बुनियादी ढांचे के लिए वित्त की जरूरत व्यापक होने के बावजूद सभी नगर निकाय बाजार से पैसा जुटाने की स्थिति में नहीं होंगे.

ICRA के मुताबिक, ग्रीन फाइनेंस के योग्य परियोजनाओं की उपलब्धता बाजार के विस्तार में मुख्य बाधा नहीं है. इसके बजाय नगर निकायों की वित्तीय और संस्थागत तैयारी तथा पूंजी बाजार की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण होगी. रेटिंग एजेंसी ने कहा कि निवेशकों की ओर से म्युनिसिपल ग्रीन फाइनेंस में रुचि बढ़ रही है, जबकि बाजार के विस्तार में पूंजी की उपलब्धता की तुलना में आपूर्ति पक्ष से जुड़ी चुनौतियां बड़ी बाधा बनी हुई हैं.
 


वैश्विक व्यापार में BRICS की हिस्सेदारी करीब 25%, EEPC India ने समान व्यापार मानकों की मांग की

EEPC इंडिया के अनुसार, नियामकीय अड़चनों को कम करने से सदस्य देशों के बीच कारोबार और भारतीय निर्यातकों की बाजार पहुंच में सुधार हो सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 15 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 15 September, 2026
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इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) इंडिया ने BRICS देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने और भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने की मांग की है. संगठन के अनुसार, नियामकीय अड़चनों को कम करने से सदस्य देशों के बीच कारोबार और भारतीय निर्यातकों की बाजार पहुंच में सुधार हो सकता है. EEPC इंडिया के चेयरमैन पंकज छाड़ा ने कहा कि निर्यातकों के सामने आने वाली करीब 75 फीसदी समस्याओं को गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने और संबंधित देशों की स्थानीय मुद्राओं में सुगम व प्रभावी भुगतान व्यवस्था स्थापित करने से हल किया जा सकता है. उनके मुताबिक, इससे सीमा पार व्यापार से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों को कम करने में मदद मिलेगी.

गैर-टैरिफ बाधाओं पर समान मानक बनाने की मांग

छाड़ा ने कहा कि BRICS देशों को गैर-टैरिफ बाधाओं को लेकर एक साझा समझौते पर विचार करना चाहिए और समान मानकों की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. यह मुद्दा पिछले कुछ समय से चर्चा में है, लेकिन अब इसे लागू करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि BRICS देशों को केवल चर्चा तक सीमित रहने के बजाय व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.

नियामकीय लागत बनी बड़ी चिंता

EEPC इंडिया के अनुसार, ज्यादातर देशों में गैर-टैरिफ उपायों की वजह से निर्यातकों पर पड़ने वाली लागत कई मामलों में टैरिफ की तुलना में अधिक होती है. ऐसे में व्यापारिक साझेदार देशों के बीच नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने की जरूरत है, ताकि निर्यातकों का अनुपालन बोझ कम हो और वस्तुओं की आवाजाही आसान हो सके. संगठन के मुताबिक, BRICS देशों की वैश्विक व्यापार में करीब एक-चौथाई हिस्सेदारी है. ऐसे में गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने से सदस्य देशों के बीच व्यापार प्रवाह बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश है.

इंजीनियरिंग निर्यात के लिए अहम बाजार

इंजीनियरिंग उत्पाद भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में शामिल हैं. उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल वस्तु निर्यात में इंजीनियरिंग निर्यात की हिस्सेदारी करीब 27 फीसदी है. ऐसे में BRICS देशों के बीच व्यापार प्रक्रियाओं को आसान बनाने से इस क्षेत्र को फायदा मिल सकता है. BRICS के प्रमुख देशों में ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के महत्वपूर्ण बाजार हैं. EEPC इंडिया का कहना है कि इन बाजारों में व्यापार सुविधा से जुड़े उपाय मजबूत होने पर भारत के इंजीनियरिंग निर्यात को और बढ़ावा मिल सकता है.

 


17 सितंबर से खुलेगा NSE IPO, ₹4.42 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है वैल्यूएशन, जानें पूरी डिटेल

NSE ने आईपीओ के लिए प्रति शेयर ₹1,700 से ₹1,785 का प्राइस बैंड तय किया है. यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसके तहत 126.44 करोड़ शेयर बिक्री के लिए पेश किए जाएंगे.

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Published - Tuesday, 15 September, 2026
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Tuesday, 15 September, 2026
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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का आईपीओ 17 सितंबर को खुलने जा रहा है. 24 सितंबर को संभावित लिस्टिंग के बाद NSE का शेयर बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की टॉप 15 कंपनियों में शामिल हो सकता है. ₹1,700-1,785 के प्राइस बैंड के आधार पर NSE का अनुमानित मार्केट कैप करीब ₹4.21 लाख करोड़ से ₹4.42 लाख करोड़ के बीच बैठता है.

₹22,562 करोड़ का होगा IPO

NSE ने आईपीओ के लिए प्रति शेयर ₹1,700 से ₹1,785 का प्राइस बैंड तय किया है. यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसके तहत 126.44 करोड़ शेयर बिक्री के लिए पेश किए जाएंगे. अपर प्राइस बैंड पर इश्यू का आकार करीब ₹22,562 करोड़ होगा. ₹1,785 के अपर प्राइस बैंड पर NSE का अनुमानित मार्केट कैप करीब ₹4.42 लाख करोड़ होगा. इस स्तर पर कंपनी बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की करीब 12वीं सबसे बड़ी कंपनी बन सकती है.

टॉप कंपनियों की लिस्ट में कहां होगी NSE?

अपर प्राइस बैंड पर NSE का मार्केट कैप करीब ₹4,41,788 करोड़ बैठता है. यह टाइटन कंपनी के करीब ₹4,44,736 करोड़ के मार्केट कैप से थोड़ा कम और सन फर्मास्यूटिकल इंडस्ट्रीज के करीब ₹4,41,478 करोड़ से थोड़ा ज्यादा है. वहीं, अगर NSE की लिस्टिंग ₹1,700 के लोअर प्राइस बैंड पर होती है तो इसका अनुमानित मार्केट कैप करीब ₹4,20,750 करोड़ होगा. इस स्थिति में एनएसई इंफोसिस के करीब ₹4,21,123 करोड़ के मार्केट कैप से थोड़ा नीचे और कोटक महिंद्रा बैंक के करीब ₹4,16,807 करोड़ के मार्केट कैप से ऊपर होगा.

17 सितंबर को खुलेगा NSE IPO

NSE का आईपीओ 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा. निवेशकों को कम से कम एक लॉट के लिए बोली लगानी होगी. एक लॉट में 8 शेयर हैं. NSE के आईपीओ का आकार पहले करीब ₹30,000 करोड़ रहने का अनुमान था, लेकिन कुछ मौजूदा निवेशकों की ओर से OFS में कम शेयर बेचने के फैसले के बाद इसका आकार घट गया. यदि इश्यू ₹30,000 करोड़ का होता तो यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता था. फिलहाल यह रिकॉर्ड Hyundai Motor India के पास है, जिसका आईपीओ 2024 में आया था.

NSE का मुकाबला BSE से

NSE भारत के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों में शामिल है और इसका सीधा मुकाबला BSE से है. BSE एशिया के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंजों में से एक है, लेकिन ट्रेडिंग वॉल्यूम के मामले में NSE उससे काफी आगे है. NSE की लिस्टिंग से निवेशकों को पहली बार एक्सचेंज के शेयर में सीधे निवेश करने का मौका मिलेगा. हालांकि, लिस्टिंग के बाद शेयर की वास्तविक बाजार पूंजी और कंपनी की रैंकिंग उसके बाजार भाव पर निर्भर करेगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)

 


मार्च 2027 तक बैरियर-फ्री होंगे सभी टोल प्लाजा, बिना रुके कटेगा टोल: गडकरी

बैरियर-फ्री व्यवस्था में मल्टी-लेन फ्री-फ्लो (MLFF) सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके तहत टोल प्लाजा पर लगे कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे.

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Published - Tuesday, 15 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 15 September, 2026
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केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, मार्च 2027 तक देश के सभी नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा को बैरियर-फ्री करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके तहत फास्टैग के साथ ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और मल्टी-लेन फ्री-फ्लो (MLFF) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और टोल भुगतान की प्रक्रिया भी तेज होगी.

दिसंबर तक 70 फीसदी टोल बूथ होंगे बैरियर-फ्री

नितिन गडकरी ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में बताया कि सरकार नेशनल हाईवे के टोल बूथ को बैरियर-फ्री बनाने पर काम कर रही है. दिसंबर 2026 के अंत तक 70 फीसदी से अधिक टोल बूथ को बैरियर-फ्री करने का लक्ष्य है, जबकि मार्च 2027 तक इसे 100 फीसदी तक पहुंचाने की योजना है. देश में अब तक 13 करोड़ से ज्यादा फास्टैग जारी किए जा चुके हैं और नेशनल हाईवे पर इनकी पहुंच 98 फीसदी से अधिक है.

बिना रुके कैसे कटेगा टोल?

बैरियर-फ्री व्यवस्था में मल्टी-लेन फ्री-फ्लो (MLFF) सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके तहत टोल प्लाजा पर लगे कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे. वाहन के टोल जोन से गुजरते ही सिस्टम उसकी पहचान करेगा और संबंधित खाते से टोल राशि काटने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इस व्यवस्था में पारंपरिक बैरियर की जरूरत नहीं होगी. इस तकनीक का परीक्षण 11 मई 2026 को मुंबई के एक टोल प्लाजा पर किया जा चुका है.

समय और ईंधन दोनों की होगी बचत

नए सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा टोल प्लाजा पर लगने वाले समय और जाम में कमी के रूप में देखने को मिलेगा. गडकरी के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में एक वाहन को टोल प्लाजा पर औसतन 12 मिनट तक रुकना पड़ता है. बैरियर-फ्री सिस्टम लागू होने के बाद यह समय काफी कम हो जाएगा. सरकार के मुताबिक, टोल प्लाजा पर वाहनों के रुकने में कमी आने से हर साल करीब 5,250 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत हो सकती है.

टोल कलेक्शन में भी बढ़ोतरी की उम्मीद

फास्टैग के इस्तेमाल से टोल कलेक्शन में पहले ही करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और इससे सरकार को करीब 7,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिला है. देश का कुल टोल राजस्व अब 82,000 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है.

गडकरी के अनुसार, बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम पूरी तरह लागू होने के बाद सरकार को हर साल करीब 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फायदा हो सकता है. वहीं, टोल बूथ के संचालन की लागत भी मौजूदा करीब 12 फीसदी से घटकर 2-3 फीसदी तक आने की उम्मीद है.
 


अमेजन नाउ का सालाना कारोबार 1 अरब डॉलर के पार, दिवाली तक 100 शहरों में पहुंचाने की तैयारी

कंपनी अपने फुलफिलमेंट नेटवर्क का भी विस्तार कर रही है. अमेजन के मुताबिक, उसके प्लेटफॉर्म पर हजारों उत्पाद कुछ ही मिनटों या कुछ घंटों में, 10 लाख से अधिक उत्पाद उसी दिन और 40 लाख से अधिक उत्पाद अगले दिन डिलीवरी के विकल्प के साथ उपलब्ध हैं.

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Published - Tuesday, 15 September, 2026
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Tuesday, 15 September, 2026
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अमेजन की क्विक डिलीवरी सेवा अमेजन नाउ (Amazon Now) ने भारत में पिछले तीन महीनों के प्रदर्शन के आधार पर 1 अरब डॉलर का सालाना कारोबार पार कर लिया है. कंपनी के मुताबिक, लॉन्च के बाद से अमेजन नाउ के ऑर्डर हर तिमाही दोगुने हो रहे हैं. कंपनी अब दिवाली तक अपनी कुछ ही मिनटों में डिलीवरी वाली सेवा को 100 शहरों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है.

60 से ज्यादा शहरों में पहुंची अमेजन नाउ

अमेजन नाउ का नेटवर्क 10 सप्ताह से भी कम समय में चार गुना बढ़कर 60 से अधिक शहरों और कस्बों तक पहुंच गया है. इनमें महानगरों के अलावा पडुबिदरी, तिरुपति, गुंटूर, गुरदासपुर, जालंधर, वेल्लोर, धारवाड़, वारंगल और बेरहामपुर जैसे शहर शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक, ऑर्डर की डिलीवरी 750 से अधिक माइक्रो फुलफिलमेंट और अर्बन फुलफिलमेंट सेंटर के नेटवर्क से की जा रही है. अमेजन नाउ के जरिए किराना, फल-सब्जियां, फ्रोजन फूड, पर्सनल केयर, फैशन, ब्यूटी, छोटे उपकरण और घर-रसोई से जुड़े सामान कुछ ही मिनटों में पहुंचाए जा रहे हैं.

अमेजन इंडिया के कंट्री मैनेजर समीर कुमार ने कहा कि अमेजन नाउ ने कम समय में 1 अरब डॉलर का सालाना कारोबार पार किया है और यह अमेजन इंडिया के इतिहास में सबसे तेजी से बढ़ने वाला ई-कॉमर्स कारोबार बन गया है. उन्होंने कहा कि कंपनी दिवाली तक 100 शहरों में विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही है.

रोजाना करीब 7 लाख ऑर्डर

घटनाक्रम से परिचित लोगों के मुताबिक, अमेजन नाउ का औसत ऑर्डर मूल्य करीब 540 रुपये है और कंपनी रोजाना लगभग 7 लाख ऑर्डर संभाल रही है. ऑर्डर की संख्या के आधार पर इसकी बाजार हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी और कारोबार के मूल्य के आधार पर लगभग 14 फीसदी बताई गई है.

अमेजन ने जून 2026 में भारत में कुछ ही मिनटों में डिलीवरी करने वाला बड़ा नेटवर्क तैयार करने की योजना की घोषणा की थी. कंपनी ने उस समय अमेजन नाउ को देशभर के 300 से अधिक शहरों तक ले जाने का लक्ष्य बताया था.

कंपनी अपने फुलफिलमेंट नेटवर्क का भी विस्तार कर रही है. अमेजन के मुताबिक, उसके प्लेटफॉर्म पर हजारों उत्पाद कुछ ही मिनटों या कुछ घंटों में, 10 लाख से अधिक उत्पाद उसी दिन और 40 लाख से अधिक उत्पाद अगले दिन डिलीवरी के विकल्प के साथ उपलब्ध हैं.

क्विक कॉमर्स में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा

अमेजन नाउ का तेजी से विस्तार ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत के क्विक कॉमर्स बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है. ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और फ्लिपकार्ट मिनट्स जैसी कंपनियां भी डार्क स्टोर और माइक्रो फुलफिलमेंट सेंटर का नेटवर्क तेजी से बढ़ा रही हैं.

सीएलएसए की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश के शीर्ष 10 शहरों में ब्लिंकिट के पास करीब 30 फीसदी डार्क स्टोर हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इसकी हिस्सेदारी 34 फीसदी से अधिक है. रिपोर्ट के मुताबिक, 180 से अधिक शहरों में ब्लिंकिट की मौजूदगी है.

ब्रोकरेज की ट्रैकिंग के अनुसार, भारत में क्विक कॉमर्स का नेटवर्क अब 477 शहरों तक पहुंच चुका है. शीर्ष 10 शहरों में ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट, फ्लिपकार्ट मिनट्स और बिगबास्केट के कुल 3,536 डार्क स्टोर हैं.

इन शहरों में फ्लिपकार्ट मिनट्स के 627 डार्क स्टोर हैं, जबकि स्विगी इंस्टामार्ट के 615 और बिगबास्केट के 497 डार्क स्टोर हैं. इससे संकेत मिलता है कि इंस्टेंट डिलीवरी बाजार में कंपनियां ग्राहकों तक तेजी से पहुंच बनाने के लिए अपने स्थानीय फुलफिलमेंट नेटवर्क को लगातार मजबूत कर रही हैं.