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बैंक ऑफ बड़ौदा की QIP इश्यू के जरिए ये 5 सरकारी बैंक जुटाएंगे 10,000 करोड़ रुपये की पूंजी
बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के बोर्ड की बैठक 13 फरवरी को होगी. इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) इश्यू सहित कई तरीकों से फंड जुटाने के प्रस्ताव पर फैसला लिया जाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सरकार ने पांच सरकारी बैंकों के लिए क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए 10,000 करोड़ रुपये की राशि जुटाने की योजना को मंजूरी दे दी है. इसमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र सहित चार अन्य सरकारी बैंक शामिल हैं. दरअसल, बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के बोर्ड की बैठक 13 फरवरी को होगी, जिसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) इश्यू सहित कई तरीकों से फंड जुटाने के प्रस्ताव पर फैसला लिया जाएगा.
बैठक में बनाई जाएगी पूंजी जुटाने की योजना
बैंक ऑफ बड़ौदा ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा, "बोर्ड की बैठक 13 फरवरी 2025 को होनी तय है, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ 31 मार्च 2026 तक और उसके बाद भी उपयुक्त किस्तों में क्यूआईपी सहित कई तरीकों से आम इक्विटी पूंजी के माध्यम से पूंजी जुटाने की योजना पर विचार किया जाएगा. बैंक ने कहा कि इन योजनाओं को वैधानिक और रेगुलेटरी अनुमोदन के बाद ही लागू किया जाएगा.
इन पांच बैंकों को मिली फंड जुटाने की मंजूरी
सरकार ने क्यूआईपी रूट के माध्यम से पांच सरकारी बैंकों के लिए 10000 करोड़ रुपये की राशि जुटाने की योजना को मंजूरी दी है. बैंक ऑफ महाराष्ट्र के अलावा चार अन्य लेंडर, पंजाब एंड सिंध बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को धन जुटाने की मंजूरी मिल गई है. सूत्रों के अनुसार ये लेंडर वित्तीय वर्ष 2025 की चौथी तिमाही से छोटे-छोटे किस्तों में धन जुटा सकते हैं. सूत्रों ने कहा डिपार्टमेंट ऑफ डिसइनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) को भी ऑफर फॉर सेल (OFS) रूट के जरिए इन लेंडर्स में हिस्सेदारी बेचने का आदेश मिला है.
बैंकों में सरकारी की इतनी हिस्सेदारी
सरकार अगस्त 2026 तक इन पीएसयू बैंकों में 25 प्रतिशत मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग को पूरा करने का प्रयास कर रही है. BSE पर लेटेस्ट शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार, दिसंबर तिमाही के अंत में बैंक ऑफ महाराष्ट्र में सरकार की 79.6 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि पंजाब एंड सिंध बैंक में 98.25 प्रतिशत हिस्सेदारी, इंडियन ओवरसीज बैंक में 96.38 प्रतिशत हिस्सेदारी, यूको बैंक में 95.39 प्रतिशत हिस्सेदारी और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 93.08 प्रतिशत हिस्सेदारी है. इन बैंकों की मौजूदा बाजार कीमतों के आधार पर सरकार की अतिरिक्त हिस्सेदारी लगभग 50,000 करोड़ रुपये के आसपास आंकी जा रही है. यह कदम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वित्तीय स्थिति को सुधारने और सरकार के डिसइन्वेस्टमेंट लक्ष्य को हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है.
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