होम / बिजनेस / वित्त मंत्री ने पेश किया Economic Survey, जानिए आर्थिक सर्वेक्षण में आखिर क्या है खास?
वित्त मंत्री ने पेश किया Economic Survey, जानिए आर्थिक सर्वेक्षण में आखिर क्या है खास?
आर्थिक सर्वेक्षण वित्त मंत्रालय आर्थिक प्रभाग द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार की देखरेख में तैयार किया जाता है. वित्त मंत्री 1 फरवरी को आम बजट भी पेश करने वाली हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में आर्थिक सर्वे 2024-25 पेश कर दिया है. आर्थिक सर्वे 2024-25 में कहा गया है कि विकास के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए, वित्त वर्ष 2026 में रियल जीडीपी ग्रोथ 6.3 और 6.8 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है. सर्वे में कहा गया कि रेलवे, रोड, एयरपोर्ट और पोर्ट जैसे अहम क्षेत्रों में ग्रोथ बरकरार है. बजट से पहले पेश होने वाले इकोनॉमिक सर्वे से पता चलता है कि देश के आर्थिक हालात कैसे हैं. इसके साथ ही आने वाली चुनौतियों के बारे में भी बताया गया है. आइए जानते हैं क्या है आर्थिक सर्वे की खास बातें...
1. GDP ग्रोथ 6.3-6.8% के बीच रहने की उम्मीद- आर्थिक सर्वे 2024-25 में कहा गया है कि विकास के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए, वित्त वर्ष 2026 में रियल जीडीपी ग्रोथ 6.3 और 6.8 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है.
2. फिस्कल डेफिसिट को कम रखने की कोशिश- मौजूदा चुनौतियों के बावजूद, ऐसी उम्मीद है कि सरकार वित्तीय वर्ष 2026 में राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.5% से कम करने की कोशिश करेगी.
3. इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का जोर- इकोनॉमिक सर्वे में सरकार ने बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपना फोकस बढ़ाया है. सर्वे में कहा गया कि रेलवे, रोड, एयरपोर्ट और पोर्ट जैसे अहम क्षेत्रों में ग्रोथ बरकरार है. पहले की योजना के मुताबिक इनकी क्षमता का विस्तार भी हो रहा है जिससे लॉन्ग टर्म में देश की अर्थव्यवस्था को सपोर्ट मिलेगा.
4. बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर फोकस- इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, सरकार ने पिछले 5 साल में बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर फोकस किया है. फिस्कल ईयर 2020 से लेकर 2024 तक सरकारी खर्च (capital Expenditure) 38.8% की दर से बढ़ा है. फिस्कल ईयर 2025 में आम लोकसभा चुनाव होने की वजह से जो खर्चे रुके थे. वो चुनाव होने के बाद जुलाई से नवंबर 2024 के बीच बढ़े हैं, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट मिला है.
5. सरकार और RBI के लिए महंगाई एक बहुत बड़ी चुनौती- सरकार और RBI के लिए महंगाई एक बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है. फिस्कल ईयर 2024 में खुदरा महंगाई दर 5.4 फीसदी से घटकर अप्रैल-दिसंबर 2024 के दौरान 4.9 फीसदी पर आ गई है. महंगाई की दर घटने की वजह कोर इनफ्लेशन में 0.9% कमी रही. कोर इनफ्लेशन में फ्यूल और फूड शामिल नहीं होता. इसके अलावा सभी तरह की चीजों और सर्विस की कीमत शामिल होती है.
6. सर्वे में वंदे भारत ट्रेन और रेल नेटवर्क विस्तार पर जोर- रेलवे कनेक्टिविटी के तहत, अप्रैल और नवंबर, 2024 के बीच 2031 किलोमीटर रेलवे नेटवर्क चालू किया गया और अप्रैल और अक्टूबर 2024 के बीच वंदे भारत ट्रेनों के 17 नए पेयर शुरू किए गए.
7. PMAY के तहत 89 लाख से ज्यादा घरों का निर्माण- इको सर्वे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत 89 लाख से ज्यादा घरों का निर्माण पूरा किया जा चुका है. रियल एस्टेट में ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने और होमबायर्स के हितों की सुरक्षा के लिए सरकार ने Real Estate (Regulation & Development) Act, 2016 बनाया है. इस साल जनवरी 2025 तक 1.38 लाख से ज्यादा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन हुआ है. इसके साथ ही करीब 1.38 शिकायतों का निपटारा किया गया जिससे आम लोगों का भरोसा बढ़ा है.
8. हाईवे और जल जीवन मिशन पर प्रकाश डाला गया- इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया कि FY25 (अप्रैल-दिसंबर) में, 5853 Km नेशनल हाईव बनाए गए हैं. इसके अलावा जल जीवन मिशन के तहत, इसके लॉन्च के बाद से 12 करोड़ से ज्यादा परिवारों को पाइप से पीने का पानी मिल चुका है.
9. EVs के लिए विदेश पर निर्भरता कम करना- इलेक्ट्रिक गाड़ियों का प्रोडक्शन फिलहाल काफी हद तक इंपोर्ट पर टिका हुआ है. इससे देश का ट्रेड डेफेसिट लगातार बढ़ता जा रहा है. सरकार इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देना चाहती है और इसके लिए कुछ नीतियां भी बनाई गई हैं. इन नीतियों का मकसद Make In India को बढ़ावा देना. इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए विदेश पर निर्भरता कम करना ताकि ट्रेड डेफेसिट कम हो सके. घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करना ताकि लॉन्ग टर्म स्टेबिलिटी को बढ़ावा दिया जा सके.
10. इनोवेशन को बढ़ावा देने पर ध्यान- आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि सरकार को इनोवेशन के बढ़ावा देने पर ध्यान देना चाहिए. सरकारों को ये करना होगा कि वे 'रास्ते से हटें' और व्यवसायों को अपने कोर मिशन पर ध्यान देने देना चाहिए. इससे सरकार इनोवेशन और कंपटीशन की भावना को बढ़ा सकती है.
11. सर्विस सेक्टर में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी- वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में बताया कि फिस्कल ईयर 2025 में अप्रैल से सितंबर तक 29.8 अरब डॉलर FDI आया था. अगर हम अलग-अलग सेक्टर के हिसाब से देखें, तो सर्विस सेक्टर में 5.7 अरब डॉलर का FDI आया था. इससे पता चलता है कि सर्विस सेक्टर में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है.
12. नौकरियों पर खास फोकस- आर्थिक सर्वे में नौकरियों पर खास फोकस रखा गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वे में बताया कि 2030 तक नॉन फार्म सेक्टर (गैर कृषि क्षेत्र) में हर साल औसतन 78.5 लाख नौकरियों के मौके बनेंगे, ताकि वर्कफोर्स की कमी दूर की जा सके. भारतीय अर्थव्यवस्था का फोकस खासतौर पर सर्विस सेक्टर पर निर्भर करता है. लेकिन IT और BPO जैसे वर्कफोर्स में लो वैल्यू एडेड सर्विसेज भी शामिल हैं.
13. एविएशन सेक्टर की बड़ी प्लानिंग- एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया सहित एयरपोर्ट ऑपरेटर और डेवलपर्स वित्त वर्ष 2020 से वित्त विर्ष 25 तक 91,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के कैपिटल एक्सपेंडिचर की योजना पर काम कर रहे हैं. इसका लगभग 91 प्रतिशत नवंबर 2024 तक हासिल कर लिया गया है.
14. जॉब सेक्टर में ऑटोमेशन का खतरा मंडरा रहा- निर्मला सीतारमण ने आगे ये बताया कि जॉब सेक्टर में ऑटोमेशन का खतरा मंडरा रहा है. ज्यादातर कंपनियां अब लेबरफोर्स की जगह तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं. भारत की टेक कंपनियों और फिलीपींस के BPO सेक्टर में यह अभी से नजर आ रहा है.
बता दें कि इससे पहले संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन के साथ संसद का बजट सत्र शुरू हुआ. इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में किसान, जवान, विज्ञान के साथ ही अनुसंधान का बहुत बड़ा रोल है. उससे पहले PM नरेंद्र मोदी ने समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी को प्रणाम करते हुए सत्र का आगाज किया. मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन की अगुवाई वाली टीम ने आर्थिक सर्वे को तैयार किया है. यह अगले वित्त वर्ष के विकास की नई लकीर खींचने का काम करेगा.
टैग्स