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FDI में 16% उछाल, इस वित्त वर्ष 135 अरब डॉलर पार करने की उम्मीद

टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में तेजी से आ रहे निवेश न केवल भारत की आर्थिक मजबूती को बढ़ाएंगे, बल्कि रोजगार, विनिर्माण और तकनीकी नवाचार को भी नई दिशा देंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago

भारत को लेकर वैश्विक कंपनियों का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है. टेक, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, फाइनेंशियल सर्विसेज और ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां अगले कुछ वर्षों में भारत में 135 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करने की योजना बना रही हैं. कई निवेश तो देश में आना भी शुरू हो गए हैं.

देश में FDI के बढ़ते संकेत

2025 में विदेशी कंपनियों के निवेश वादों में बड़ा उछाल देखा गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल 135 अरब डॉलर का निवेश विभिन्न सेक्टरों से आने की उम्मीद है. इसमें से ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स जैसे तेजी से काम करने वाले क्षेत्रों में शुरुआती निवेश की शुरुआत भी हो चुकी है. अगर निवेश अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से आता है, तो हर साल करीब 27 अरब डॉलर का अतिरिक्त FDI भारत पहुंचेगा. यह पिछले साल के कुल 81 अरब डॉलर के FDI का लगभग एक-तिहाई है.

गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न कर रहे भारी निवेश

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच भारत में आए FDI में 16% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 50.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इसमें इक्विटी निवेश और पुनर्निवेश दोनों शामिल हैं. टेक दिग्गज Google, Microsoft और Amazon ने भारत में भारी निवेश की घोषणा की है. तीनों का संयुक्त निवेश अब 70 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है. इससे इस वित्त वर्ष में कुल FDI के 100 अरब डॉलर छूने की उम्मीद बढ़ गई है.

65 अरब डॉलर के नए प्रस्ताव कतार में

टेक कंपनियों के अलावा कई बड़े निवेश प्रस्ताव लाइन में हैं. Foxconn, VinFast और Shell Energy जैसी कंपनियों के निवेश प्रस्ताव मिलाकर 65 अरब डॉलर से अधिक के हैं. ये निवेश ऐसे समय में आ रहे हैं जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. कई विदेशी कंपनियों ने भारतीय कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम की है, जबकि कई भारतीय कंपनियां विदेशों में अपने ऑपरेशन बढ़ा रही हैं.

नेट FDI में सुधार, चुनौतियां बरकरार

अप्रैल–सितंबर 2025 के दौरान नेट FDI 7.6 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 3.4 अरब डॉलर था. हालांकि, 2024–25 में नेट FDI 1 अरब डॉलर से भी कम रहा था, क्योंकि लगभग 50 अरब डॉलर विदेशी निवेशकों ने वापस ले लिया था. जब पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हों और रुपये पर दबाव बना रहे हों, ऐसे समय में FDI भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाता है. यह दीर्घकालिक और अधिक भरोसेमंद निवेश माना जाता है.

टेक और सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी, ऑटो सेक्टर में सुस्तीनिवेश के रुझान बताते हैं कि टेक सेक्टर FDI आकर्षित करने में सबसे आगे है. सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में भी तेज़ी देखी जा रही है. हालांकि ऑटोमोबाइल सेक्टर में चुनौतियां बनी हुई हैं. Ford और General Motors जैसे बड़े ब्रांड भारत से बाहर निकल चुके हैं, जिससे इस क्षेत्र में विदेशी निवेश की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है. भारत में तेजी से बढ़ता डिजिटल बाजार, स्थिर आर्थिक माहौल और उद्योग-अनुकूल नीतियां विदेशी कंपनियों को नई उम्मीद दे रही हैं. आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक निवेश का बड़ा केंद्र बनने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है.
 


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