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वित्त-वर्ष 24 के पहले क्वार्टर में FDI में आई कमी, जानिए क्या है वजह?
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यूरोप और अमेरिका में जारी स्लोडाउन की वजह से कंपनियां नई फंडिंग नहीं कर रही हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
वित्त वर्ष 24 के पहले क्वार्टर यानी अप्रैल 2023 से जून 2023 के बीच FDI (फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट) इक्विटी में 34% की कमी आई है. सरकार द्वारा जारी किए गए डेटा से पता चलता है कि पिछले साल के पहले क्वार्टर यानी जून 2022 में खत्म हुए क्वार्टर के मुकाबले इस साल FDI में 10.9 बिलियन डॉलर्स की कमी आई है.
प्रमुख क्षेत्रों में हो रही है गिरावट
भारत द्वारा फॉरेन इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए इस वक्त विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं. इस बीच भारत सरकार के अधिकारियों का कहना है कि यूरोप और अमेरिका में जारी स्लोडाउन की वजह से कंपनियां नई फंडिंग नहीं कर रही हैं और इस स्लोडाउन के पीछे भू-राजनैतिक टेंशन प्रमुख रूप से मौजूद हैं. DPIIT (डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड) द्वारा रिलीज की गए डेटा की मानें तो कंस्ट्रक्शन, खासकर बिल्डिंग, हाउसिंग एवं टाउनशिप पर रोक लगने की वजह से सभी प्रमुख क्षेत्रों में गिरावट देखने को मिल रही है.
किसे प्राप्त हुई सबसे ज्यादा इन्वेस्टमेंट?
इस दौरान जारी गिरावट के बीच सिर्फ दो ऐसे देश हैं जिनमें हो रही FDI में वृद्धि देखने को मिली है और ये दो देश नीदरलैंड एवं जापान हैं. DPIIT द्वारा जारी किए गए डेटा को देखें को पता चलता है कि सबसे ज्यादा FDI, महाराष्ट्र द्वारा आकर्षित की गई है. DPIIT द्वारा जारी डेटा के अनुसार महाराष्ट्र को 4.5 बिलियन डॉलर्स के इक्विटी FDI प्राप्त हुई है. सालाना आधार पर इस आंकड़े में 13.5% की कमी देखने को मिली है. आपको बता दें कि पिछले साल महाराष्ट्र को 5.2 बिलियन डॉलर्स की FDI प्राप्त हुई थी.
डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट में भी आई गिरावट
इस साल की शुरुआत में भारत के केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI द्वारा जारी किए गए डेटा द्वारा अनुमान लगाया गया था कि कुल FDI में 28% की कमी देखने को मिलेगी और वित्त वर्ष 24 के दौरान FDI कम होकर 17.6 बिलियन डॉलर्स पर पहुंच सकती है. बहुराष्ट्रीय कंपनियों के द्वारा अपने देशों में इक्विटी या विनिवेश किए जाने के आंकड़ों में भी वृद्धि हुई है. जहां साल भर पहले यह 6.2 बिलियन डॉलर्स हुआ करता था वहीं अब यह आंकड़ा 10.4 बिलियन डॉलर्स पर पहुंच गया है. इसी वजह से अप्रैल-जून 2023 के बीच भारत में डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट में 56% की कमी देखने को मिली है.
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