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तेल की कीमतों में गिरावट भारत की अर्थव्यवस्था को नया आकार दे सकती है: SBI रिसर्च

एसबीआई रिसर्च का विश्लेषण यह संकेत देता है कि 2026 में तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए कई मायनों में लाभकारी हो सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

2026 में कच्चे तेल की कीमतों में संभावित गिरावट भारत की मुद्रास्फीति, मुद्रा और विकास के दृष्टिकोण में व्यापक सुधार ला सकती है. ऐसा एक अध्ययन नोट में एसबीआई रिसर्च ने कहा है, जिसमें अनुमान लगाया गया है कि जून 2026 तक भारतीय कच्चे तेल की टोकरी की कीमत लगभग 50 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की कीमतों में गिरावट पहले की अपेक्षाओं की तुलना में तेज हो सकती है और हालिया भू-राजनीतिक घटनाओं से इसका प्रभाव कम रहेगा. कम ऊर्जा कीमतों का असर ईंधन लागत, आयात और व्यापक आर्थिक संकेतकों के जरिए होगा, जो वित्तीय वर्ष 2027 में भारत की आर्थिक दिशा को तय करेंगे.

एसबीआई रिसर्च ने यह भी नोट किया कि कच्चे तेल की कीमतें भू-राजनीतिक जोखिमों के बावजूद लगातार कम बनी हुई हैं. ओपेक+ ने उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया था, और बाद में उत्पादन कटौती के प्रयासों के बावजूद कीमतों में स्थायी सुधार नहीं देखा गया. इसके बजाय, कच्चे तेल की कीमतें लगातार नीचे की ओर रहीं.

भारतीय कच्चे तेल की टोकरी वैश्विक रुझान के अनुरूप घटेगी

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कच्चे तेल की टोकरी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घट रही कीमतों के अनुरूप नरम होंगी. बेस केस अनुमान में जून 2026 तक कीमत लगभग 50 डॉलर प्रति बैरल या उससे भी कम रहने की संभावना जताई गई है.

एसबीआई रिसर्च का कहना है कि कम कच्चे तेल की कीमतों का सबसे तात्कालिक घरेलू असर मुद्रास्फीति पर पड़ेगा. अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रिटेल ईंधन कीमतों में भी प्रतिबिंबित होगी, जिससे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में मुद्रास्फीति पर दबाव कम होगा.

रुपया होगा मजबूत

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के आयात बिल को कम करके रुपये को भी मजबूती दे सकती है. एसबीआई रिसर्च के अनुसार, तेल भारत के आयात का सबसे बड़ा हिस्सा है और इसे तुरंत घरेलू उत्पादन से बदलना संभव नहीं है. 14% गिरावट के मामले में रुपये का मूल्य डॉलर के मुकाबले लगभग 87.5 तक मजबूत होने की संभावना है.

विकास पर सकारात्मक प्रभाव

कम ऊर्जा कीमतें उत्पादन लागत घटाकर विभिन्न सेक्टरों में कॉर्पोरेट मार्जिन सुधार सकती हैं और खपत को बढ़ावा दे सकती हैं. एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि इससे वार्षिक GDP वृद्धि में लगभग 10 से 15 आधार अंक का योगदान मिल सकता है. मुद्रास्फीति में कमी और मजबूत मुद्रा के साथ, भारत 7% से अधिक की वृद्धि बनाए रख सकता है, रिपोर्ट ने 7.2% के विकास अनुमान को रेखांकित किया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से होने वाले लाभ व्यापक होंगे, जो घरेलू उपभोक्ताओं, व्यवसायों और बाहरी क्षेत्र को एक साथ प्रभावित करेंगे.

हालांकि, यह अनुमान वैश्विक तेल बाजार के मौजूदा रुझानों और ऐतिहासिक संबंधों पर आधारित हैं. रिपोर्ट ने चेताया कि अचानक या लंबे समय तक जारी सप्लाई शॉक को छोड़कर, 2026 में कच्चे तेल की कीमतों के लिए जोखिम संतुलन नीचे की ओर है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को सकारात्मक असर पड़ सकता है.


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