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तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ोतरी से किसानों की आजीविका को खतरा, FAIFA ने जताई आपत्ति

FAIFA का कहना है कि इस कदम से किसानों की आय, कृषि मजदूरों और कानूनी तंबाकू व्यापार से जुड़े छोटे व्यवसायों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस (FAIFA), जो आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात समेत कई राज्यों के वाणिज्यिक फसल उगाने वाले किसानों और मजदूरों का प्रतिनिधित्व करता है, ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी “च्यूइंग टोबैको, जर्दा सेंटेड टोबैको और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और ड्यूटी संग्रह) नियम, 2026” पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. इस नियम के तहत 1 फरवरी से सिगरेट की लंबाई के आधार पर 1,000 स्टिक्स पर ₹2,050 से ₹8,500 तक का उत्पाद शुल्क लगाया गया है.

किसानों पर बढ़ते करों का गंभीर प्रभाव

FAIFA ने कहा कि ऐसी बड़ी कर वृद्धि, जबकि सरकार ने प्रतिपूर्ति छूट (Compensation Cess) से वैकल्पिक कर व्यवस्था में “राजस्व तटस्थता” बनाए रखने का आश्वासन दिया था, घरेलू निर्माताओं को तैयार उत्पादों की कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर करेगी. इसका नतीजा बिक्री में गिरावट और किसानों की सप्लाई पर प्रतिकूल असर होगा, जिससे निकट भविष्य में तंबाकू बाजार में सुप्लाई का अधिशेष पैदा हो सकता है.

FAIFA ने यह भी चेतावनी दी कि वर्तमान में भारत की तंबाकू कर प्रणाली FCV तंबाकू किसानों के खिलाफ भेदभावपूर्ण है, खासकर आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में. सिगरेट में इस्तेमाल होने वाले FCV तंबाकू पर प्रति किग्रा दर से लगभग 50 गुना अधिक कर लगता है, जबकि बीड़ी और चबाने वाली तंबाकू पर यह बहुत कम है. इससे सबसे अधिक नियम-कानून पालन करने वाले किसानों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है.

FAIFA का बयान

FAIFA के अध्यक्ष मुरली बाबू ने कहा:“GST 2.0 की घोषणा के समय सरकार ने आश्वासन दिया था कि तंबाकू उत्पादों पर कुल कर का भार नहीं बढ़ेगा और GST रिटेल मूल्य का 40% ही लिया जाएगा. किसानों ने इस राजस्व तटस्थता के भरोसे पर भरोसा जताया, लेकिन अब कर दरों में अचानक बढ़ोतरी ने इस भरोसे को तोड़ दिया है और किसानों की आजीविका पर संकट ला दिया है.”

FAIFA ने सरकार से अपील की है कि उच्च उत्पाद शुल्क को वापस लिया जाए और राजस्व तटस्थ दरों को पुनः लागू किया जाए, ताकि तस्करी को रोकते हुए घरेलू कृषि का समर्थन किया जा सके.

तस्करी और अवैध बाजार का खतरा

FAIFA ने चेतावनी दी कि भारत पहले से ही तंबाकू तस्करी के गंभीर संकट का सामना कर रहा है. उद्योग और बाजार आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया में चौथा सबसे बड़ा अवैध सिगरेट बाजार है, जहां कुल सिगरेट खपत का लगभग 26% अवैध उत्पादों से होता है. कर में भारी और असमान वृद्धि तस्करी को और बढ़ावा देगी, जिससे राजस्व हानि होगी और कानूनी उत्पादों की बिक्री घटेगी.

किसान और कृषि लागत पर असर

FCV तंबाकू खेती पिछले दशक में लगातार अस्थिर रही है. 2013–14 में 315.95 मिलियन किग्रा के मुकाबले 2023–24 में 304.21 मिलियन किग्रा की नीलामी हुई, और खेती की जमीन 2,21,385 हेक्टेयर से घटकर 1,22,257 हेक्टेयर हो गई. इससे खेती, नीलामी और सहायक गतिविधियों में लगभग 3.5 करोड़ मानव-दिनों की हानि हुई.

साथ ही, खेती की लागत बढ़ी है. 2025 में वैश्विक उर्वरक की कीमतें 15% बढ़ीं, DAP में 23% तक वृद्धि हुई, और मजदूरी दर में 7% की बढ़ोतरी हुई. डीजल और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत ने किसानों की मार्जिन को और कम कर दिया है.

FAIFA की अपील

FAIFA ने सरकार से तात्कालिक कार्रवाई की अपील की है और कहा कि अचानक कर वृद्धि से लाखों किसान, कृषि मजदूर, नीलामी कर्मचारी और छोटे विक्रेता संकट में पड़ सकते हैं. यह कदम कानूनी मांग को घटाएगा, अवैध व्यापार को बढ़ावा देगा और ईमानदार आजीविकाओं को प्रभावित करेगा. FAIFA ने सरकार से आग्रह किया कि स्थिरता, राजस्व तटस्थता और किसानों की भलाई सुनिश्चित करने वाले कर नीतियों का पालन किया जाए.

 


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