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720 अरब डॉलर के पार निर्यात, वैश्विक सुस्ती के बीच भारत की ऐतिहासिक उड़ान
सेवा और विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ती मांग से नए निवेश आकर्षित हो रहे हैं, स्टार्टअप्स को अवसर मिल रहे हैं और लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुल रहे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
दुनिया में आर्थिक सुस्ती के बावजूद भारत ने निर्यात के मोर्चे पर नया कीर्तिमान स्थापित किया है. चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से जनवरी के बीच देश का कुल निर्यात 720.76 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. मोबाइल, दवाइयों, इंजीनियरिंग उत्पादों और स्वदेशी हथियारों की बढ़ती वैश्विक मांग ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ताकत दी है.
सेवा क्षेत्र में 10.57% की तेज बढ़त
भारत की असली मजबूती केवल माल निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा क्षेत्र में भी देश ने शानदार प्रदर्शन किया है. आईटी, व्यापार और पेशेवर सेवाओं की बदौलत अप्रैल से जनवरी के बीच सेवा निर्यात 10.57 प्रतिशत बढ़कर 354.13 अरब डॉलर तक पहुंच गया. पिछले वर्ष 2024-25 में सेवा निर्यात 387.5 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा था, जिससे देश को 188.8 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष मिला था. इस वृद्धि का सीधा लाभ देश के युवाओं को बेहतर रोजगार अवसरों और वैश्विक पहचान के रूप में मिल रहा है.
इलेक्ट्रॉनिक्स से फार्मा तक मांग
व्यापारिक वस्तुओं के निर्यात में भी भारत ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है. भारत में बने स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण तेजी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी जगह बना रहे हैं. इसके अलावा दवाइयां, इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, वस्त्र उद्योग और ऑटोमोबाइल सेक्टर ने भी निर्यात वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है. इससे विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ है और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आई है.
रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड
रक्षा क्षेत्र में भारत ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. वर्ष 2024-25 में देश का रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. यह बदलाव दर्शाता है कि भारत अब केवल हथियारों का आयात करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि ‘हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग’ के जरिए रक्षा उपकरणों का बड़ा निर्यातक बनता जा रहा है. इससे न केवल विदेशी मुद्रा आय बढ़ी है, बल्कि घरेलू उद्योगों और रोजगार सृजन को भी मजबूती मिली है.
70% वैश्विक जीडीपी तक पहुंच
भारत की निर्यात सफलता के पीछे रणनीतिक व्यापार समझौतों की भी बड़ी भूमिका है. संयुक्त राष्ट्र की व्यापार संस्था UNCTAD के व्यापार विविधता सूचकांक के अनुसार, उत्पाद विविधता के मामले में भारत ग्लोबल साउथ की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. पिछले तीन वर्षों में भारत ने 38 देशों के साथ नौ अहम मुक्त व्यापार समझौते किए हैं. इन समझौतों की बदौलत अब भारत की पहुंच दुनिया की लगभग 70 प्रतिशत जीडीपी तक हो गई है.
रोजगार, निवेश और विकास को नई रफ्तार
निर्यात में यह ऐतिहासिक वृद्धि केवल आंकड़ों की सफलता नहीं है, बल्कि यह देश की औद्योगिक क्षमता, कौशल और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का प्रमाण है. सेवा और विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ती मांग से नए निवेश आकर्षित हो रहे हैं, स्टार्टअप्स को अवसर मिल रहे हैं और लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुल रहे हैं. वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत का यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत नींव पर खड़ी है और आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार में उसकी हिस्सेदारी और बढ़ सकती है.
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