होम / बिजनेस / भारत की ग्रोथ को लेकर फिर सामने आया अनुमान, इस बार यहां पहुंचने का है अनुमान
भारत की ग्रोथ को लेकर फिर सामने आया अनुमान, इस बार यहां पहुंचने का है अनुमान
भारत की ग्रोथ रेट को लेकर अब तक आई कई रिपोर्ट में अनुमान जताया जा चुका है. अब रॉयटर्स पोल की एक रिपोर्ट सामने आई है जो कहती है कि ये आने वाले समय में और तेज गति से आगे बढ़ने वाली है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
वर्ष 2022-23 में भारत की ग्रोथ रेट के अनुमान को लेकर कई एजेंसिया अपने अनुमान जाहिर कर चुकी हैं. कुछ एजेसियों के अनुमान जहां आरबीआई के अनुमान से ज्यादा हैं वहीं कुछ के उससे कम हैं. इसी कड़ी में अब रॉयटर्स पोल की रिपोर्ट सामने आई है. जो कहती है कि पहली तिमाही अप्रैल से लेकर जून तक भारत की ग्रोथ रेट 7.7 प्रतिशत से ज्यादा की गति से आगे बढ़ी है. वहीं अगर पिछली तिमाही के नतीजों पर नजर डालें तो ये 6.1 प्रतिशत थी. अप्रैल-जून के बीच सामने आई ग्रोथ के बढ़ने के प्रमुख कारणों के बीच में कमोडिटी की कीमतों में स्थिरता इसका प्रमुख कारण रही है. यही नहीं सर्विस सेक्टर ने भी इसमें अपना एक अहम योगदान दिया है.
रेपो रेट ने भी निभाई है इसमें अहम भूमिका
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर से लेकर फरवरी तक रेपो रेट में हुए इजाफे ने कई तरह की स्थितियों को पैदा करने में अपनी भूमिका निभाई. लेकिन उसके बाद इसमें आई स्थिरता ने ग्रोथ रेट को बढ़ने में काफी मदद की, साथ ही कमोडिटी की कम कीमतों के कारण भी ग्रोथ रेट को बढ़ने में मदद मिली. रॉयटर्स पोल के एक्सपर्ट कहते हैं कि इस मामले में सर्विस सेक्टर, आउटपुट साइड को और निवेश, खर्च की साइड को नियंत्रित करता है. सर्विस सेक्टर जो भारत की ग्रोथ में आधे से ज्यादा का योगदान देता है. उसने भारत को वैश्विक मंदी से उबरने में मदद की है. जबकि इसी मंदी के कारण चीन की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही है.
सरकार बढ़ा रही है बुनियादी सेक्टर में खर्च
वहीं एसएंडपी ग्लोबल इंडिया सर्विसेज के अनुसार परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स 2011 के बाद से अब सबसे बेहतर स्थिति में आ गया है. ये मौजूदा समय में 50 से ज्यादा बना हुआ है. विकास की रफ्तार को बढ़ाने के लिए सरकार लगातार बुनियादी ढ़ाचे में अपने खर्च को बढ़ा रही है. अप्रैल से शुरू हुए वित्तीय वर्ष में भारत ने 10 ट्रिलियन भारतीय रुपये के अपने पूंजीगत बजट में से अब तक 28 प्रतिशत खर्च कर दिया है. एक अन्य एक्सपर्ट कहते हैं कि थोक कीमतों में 3 प्रतिशत की गिरावट भी मूल्य परिवर्तन को हटाकर वास्तविक आर्थिक विकास की गणना करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जीडीपी डिफलेक्टर को कम करके ग्रोथ को बढ़ाने में योगदान देती है.
इससे पहले भी कई रिपोर्ट ने लगाया है यही अनुमान
भारत की ग्रोथ रेट को लेकर आए रॉयटर्स पोल के आंकड़ों से परे इक्रा की रिपोर्ट भी आ चुकी है. इक्रा के अनुसार ये ग्रोथ रेट 6 प्रतिशत रह सकती है. ये आरबीआई के अनुमान 6.5 प्रतिशत से कम है. सबसे दिलचस्प बात ये है कि आरबीआई ने पहली तिमाही के लिए ग्रोथ रेट 8 प्रतिशत से ज्यादा रहने का अनुमान जताया था. वहीं इससे पहले एसबीआाई भी ग्रोथ रेट को लेकर अनुमान जता चुका है. एसबीआई का अनुमान आरबीआई के अनुमान से ज्यादा है. एसबीआई का अनुमान है कि ग्रोथ रेट 6.7 प्रतिशत रहेगी.
टैग्स