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दिल्ली में इंडियन सिल्क हाउस एजेंसीज : परंपरा, कारीगरी और बदलते उपभोक्ता स्वाद की एक कहानी

नए वेडिंग कलेक्शनों के साथ ब्रांड ने आधुनिक उपभोक्ताओं की पसंद और परंपरा दोनों को जोड़ने का प्रयास किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago

दिल्ली के प्रसिद्ध बाजार चांदनी चौक में भारत के प्रमुख साड़ी ब्रांड, इंडियन सिल्क हाउस एजेंसीज ने अपना नया और एनसीआर का पहला स्टोर खोला है. इस स्टोर ने राजधानी के पुराने वैडिंग मार्केट में चर्चा पैदा कर दी है. लगभग पाँच दशकों से पूर्वी भारत में अपनी मौजूदगी के लिए पहचाने जाने वाला इंडियन सिल्क हाउस एजेंसी अब दिल्ली-एनसीआर में कदम रख चुका है. देशभर में यह उनका 59वां स्टोर है, लेकिन चांदनी चौक जैसा इलाका किसी भी ब्रांड के लिए सिर्फ एक नया बाज़ार नहीं होता, यह भारत की शादी और बनारसी-सिल्क परंपरा का धड़कता हुआ केंद्र है.

यह स्टोर देश के 60 से अधिक क्राफ्ट क्लस्टर्स से आने वाली ‘भारत की साड़ियों’ को सीधे दिल्ली के ग्राहकों तक लाने की कोशिश है. इन क्लस्टर्स से जुड़े 15,000 से अधिक कारीगर वर्षों से बुनाई की पारंपरिक तकनीकों को जीवित रखे हुए हैं. ऐसे में दिल्ली में इस तरह का स्टोर खुलना सिर्फ एक व्यावसायिक कदम नहीं, बल्कि बदलते समय में पारंपरिक कारीगरी को नई जगह देने का संकेत भी है.

दिल्ली की दुल्हनों के लिए दो नए कलेक्शन

उद्घाटन के साथ दो नए कलेक्शन भी पेश किए गए ‘वीव्ज ऑफ इंडिया’ और ‘वैडिंग्स ऑफ इंडिया’, इन संग्रहों में बनारसी से लेकर कांजीवरम, उपाड़ा से लेकर जामदानी और गढ़वाल से लेकर तान्चोई तक की बुनाइयों को आधुनिक और पारंपरिक दोनों रूपों में शामिल किया गया है. दिल्ली की शादी-ब्याह की संस्कृति में बनारसी और सिल्क साड़ियों की अहमियत पहले से ही गहरी है. इसीलिए स्टोर में रखी गई रेंज सिर्फ ब्राइडल सिल्क तक सीमित नहीं, बल्कि एवरीडे सिल्क, कॉटन, टसर और हैंडलूम जैसी विविधताओं को भी शामिल करती है. आधुनिक ग्राहकों की पसंद के अनुरूप हल्के, चमकदार और फ्यूज़न स्टाइल्स भी इस कलेक्शन में दिखाई देते हैं.

क्यों चुना गया चांदनी चौक?

ब्रांड के सीईओ दर्शन दुधोरिया बताते हैं कि दिल्ली में कदम रखने का फैसला लंबे समय से विचाराधीन था. उनके मुताबिक, चांदनी चौक देश के वैडिंग वियर बाजार की सांस्कृतिक धुरी है. यहाँ हर मौसम में ग्राहक आते हैं, कभी अपने लिए, कभी किसी रिश्तेदार के लिए, तो कभी सिर्फ अलग-अलग बुनाइयों को देखने-सुनने के लिए. दिल्ली में पहले स्टोर की स्थापना उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ने का अवसर देती है. हालांकि, ब्रांड की तेज़ी से बढ़ती रफ्तार हर 14 दिन में एक नया स्टोर भी इस निर्णय की पृष्ठभूमि का हिस्सा है.

दर्शन दुधोरिया ने कहा साड़ी सिर्फ परिधान नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक कथा है, कभी किसी कारीगर के घर से शुरू होने वाली और किसी दुल्हन की अलमारी पर जाकर खत्म होने वाली. चांदनी चौक में यह नया स्टोर इस बात की याद दिलाता है कि आज भी भारत की बुनाई परंपराएँ गहरे अर्थों को समेटे हुए हैं और भले ही स्टोर्स बदल रहे हों, डिजाइन्स आधुनिक हो रहे हों और ग्राहक अधिक प्रयोगशील हो रहे हों, लेकिन साड़ी की मूल आत्मा उसकी कारीगरी अब भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी सदियों पहले थी.

कारीगरों की दुनिया से राजधानी का रिश्ता

भारत की साड़ियों की सबसे दिलचस्प बात यह है कि उनका सफर अक्सर किसी छोटे शहर, गाँव या हैंडलूम क्लस्टर से शुरू होता है और बड़ी शहरी दुकान तक पहुँचते-पहुँचते अनेक हाथों से गुजरता है. स्टोर के जरिए कारीगरों को दिल्ली जैसे बड़े बाज़ार से सीधा जुड़ाव मिलता है, जो उनके काम को व्यापक पहचान देता है. तेज़ी से बदलते फैशन उद्योग में भी ये पारंपरिक तकनीकें अपनी जगह बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं. ऐसे में हैंडलूम और कारीगरी को लेकर बढ़ती जागरूकता इन कारीगरों के लिए नई उम्मीद पैदा करती है.

साड़ी बाजार का बदलता चेहरा

पिछले कुछ वर्षों में साड़ी बाजार में दिलचस्प बदलाव देखने को मिले हैं. जहाँ एक तरफ दुल्हनों और युवा उपभोक्ताओं के बीच फ्यूजन वियर और हल्के सिल्क की मांग बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर लोग प्रमाणित और प्रामाणिक बुनाइयों को लेकर अधिक जागरूक हुए हैं. सोशल मीडिया, इन्फ्लुएंसर्स और रियल-वेडिंग कल्चर ने भी पारंपरिक कपड़ों को नई दृश्यता दी है. इस संदर्भ में दिल्ली में नए स्टोर का आगमन इस बदलते बाजार को समझने और उसके साथ तालमेल बैठाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है.


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