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असंगठित क्षेत्र में घटी रोजगार की दर, कोविड से पहले की स्थितियों से भी हुई कम

असंगठित क्षेत्र को जहां पहले नोटबंदी, जीएसटी और दूसरे कारणों की वजह से नुकसान हुआ तो वहीं कोरोना काल के चलते इसमें से 10 मिलियन रोजगार बंद हो गए. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

देश का असंगठित क्षेत्र हमेशा ही देश के छोटे तबके के लोगों बड़े पैमाने पर रोजगार देने का बड़ा साधन रहा है. लेकिन कोरोना काल ने इस सेक्‍टर को ऐसी चोट दी कि ये अभी तक उस कोरोना काल से पहले के स्‍तर पर नहीं पहुंच पाया है. सांख्यिकी विभाग की ओर से जारी किए गए आंकड़े बता रहे हैं कि 2021-22 के निम्‍नतम स्‍तर के बावजूद 2022-23 की अवधि में 11.7 मिलियन श्रमिकों को जोड़ने के बावजूद भारत में अनौपचारिक सेक्‍टर में काम करने वाले रोजगार लोगों की संख्‍या प्री कोविड लेवल से कम है. 

क्‍या थी प्री कोविड लेवल में रोजगार की स्थिति 
सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2015 से लेकर जून 2016 के बीच कराए गए सर्वे के अनुसार, लगभग 111.3 मिलियन श्रमिक असंगठित उद्योग में काम कर रहे थे. वहीं अगर 2015-16 के मुकाबले 2022-23 में असंगठित उद्योगों की संख्‍या में 2 मिलियन का इजाफा देखने को मिला और ये 65.04 मिलियन तक जा पहुंची. असंगठित क्षेत्र का मतलब ये होता है जो कानूनी रूप से एक इकाई के रूप में रजिस्‍टर्ड नहीं हैं. इस तरह के उद्योगों में खास तौर पर छोटे व्‍यवसाय, ऐसे व्‍यवसाय जिनका मालिक एक आदमी होता है, पार्टनरशिप में काम करने वाले कारोबार शामिल हैं. 

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जानिए क्‍या है इसकी वजह?
जानकारों का मानना है कि इस क्षेत्र में रोजगार के न उबर पाने की वजह में कई कारण शामिल हैं. पिछले कुछ सालों में जो कारण प्रमुख तौर पर सामने आए हैं उनमें नोटबंदी, जीएसटी, और कोविड जैसी समस्‍याएं शामिल हैं. इन प्रमुख कारणों के चलते इस सेक्‍टर में रोजगार अभी तक संभल नहीं पाया है. जानकार मानते हैं कि सामान्‍य तौर पर हर साल में 2 मिलियन कारोबार का इजाफा हो जाता है. ऐसे में उद्यमों की संख्‍या 75 मिलियन होती है. लेकिन  कोरोना महामारी के दौरान 10 मिलियन तक कंपनियां बंद हो गई तो ऐसे में इनकी संख्‍या में बड़ी कमी आ गई. लेकिन वहीं अगर कंपनियों के उत्‍पादन योगदान पर नजर डालें तो 2021-22 में जहां ये 13.4 ट्रिलियन था वहीं 2022-23 ये बढ़कर 15.42 ट्रिलियन तक हो गया. जबकि 2015-16 में इनका जीवीए 11.52 ट्रिलियन था. 

इन क्षेत्रों का रहा इतना योगदान
वहीं अगर रोजगार में वार्षिक बढ़ोतरी पर नजर डालें तो अन्‍य सेवा क्षेत्र का इसमें प्रतिशत 13.42 प्रतिशत रहा, जबकि मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर 6.34 प्रतिशत रहा है. अनौपचारिक श्रमिकों की औसत आय 2021-22 में 1.06 लाख से बढ़कर 2022-23 में 1.11 लाख रुपये हो गई. देश के असंगठित क्षेत्र के योगदान को देखते हुए कुछ वर्ष पूर्व एनएसओ ने एएसयूएसई का विचार विकसित किया था. अब तक ये सर्वे दो बार किया जा चुका है. इनमें 2019-20 की अवधि के लिए पहला और अप्रैल 20 से मार्च 21 के लिए दूसरा सर्वे किया गया है. 


 


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