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अमेरिकी बाजार में ‘ड्यूटी-फ्री’ एंट्री पर जोर, भारत को भी बांग्लादेश जैसी रियायत दिलाने की तैयारी: पीयूष गोयल

पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा मार्च तक अंतरिम समझौते के संकेत, कपड़ा उद्योग और किसानों की चिंताएं दूर करने की कोशिश की जा रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर सरकार ने साफ संकेत दिया है कि भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में वही रियायतें दिलाने की कोशिश होगी, जो हाल में बांग्लादेश को मिली हैं. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका-बांग्लादेश समझौते में जो प्रावधान हैं, वे भारत के अंतिम समझौते में भी शामिल किए जाएंगे. दोनों देशों के बीच मार्च के अंत तक एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर संभव हैं.

कपड़ा उद्योग को राहत का भरोसा

हाल ही में अमेरिका और बांग्लादेश के बीच हुए समझौते के तहत यदि कपड़े अमेरिकी कपास या मानव निर्मित फाइबर से तैयार होते हैं, तो उन पर अमेरिकी बाजार में अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा. इससे पहले बांग्लादेश से निर्यात पर कुल 31 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था, जिसे घटाकर 19 प्रतिशत किया गया है, और अमेरिकी कच्चे माल के उपयोग पर पारस्परिक शुल्क समाप्त हो जाता है.

इसी पृष्ठभूमि में भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग को आशंका थी कि कहीं प्रतिस्पर्धा में उसे नुकसान न उठाना पड़े. हालांकि गोयल ने स्पष्ट कहा कि भारत को भी समान कर व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, जिससे उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनी रहे.

‘ड्यूटी-फ्री’ प्रवेश सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं

उद्योग सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन द्वारा जारी शुरुआती शुल्क दिशानिर्देशों में यह प्रावधान है कि यदि किसी उत्पाद में 20 प्रतिशत तक अमेरिकी कच्चा माल इस्तेमाल होता है, तो उसे अमेरिकी बाजार में बिना अतिरिक्त शुल्क प्रवेश मिल सकता है. इस आधार पर भारत भी ऐसे प्रावधानों पर बातचीत कर रहा है. बैठक में शामिल उद्योग प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया गया कि भारत की निर्यात क्षमता और बाजार हिस्सेदारी पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.

कपास निर्यात को लेकर क्या है गणित?

अटकलें थीं कि अमेरिका-बांग्लादेश समझौते से भारत के कपास निर्यात पर असर पड़ सकता है. बांग्लादेश हर साल लगभग 85 लाख गांठ कपास आयात करता है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी औसतन 12 लाख गांठ की है. भारत का कुल वार्षिक उत्पादन करीब 370 लाख गांठ है, जबकि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए उसे लगभग 50 लाख गांठ आयात भी करना पड़ता है.

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा उत्पादन और मांग को देखते हुए भारत की प्रतिस्पर्धी स्थिति पर बड़ा खतरा नहीं है. उलटे, अमेरिका के साथ संभावित समझौता और अन्य मुक्त व्यापार समझौतों से भारतीय कपड़ा निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है.

कृषि हित सुरक्षित, कई उत्पाद समझौते से बाहर

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के 90-95 प्रतिशत कृषि उत्पाद इस प्रस्तावित व्यापार समझौते के दायरे से बाहर रखे गए हैं. फलों, सब्जियों, एथनॉल, तंबाकू, दलहन और मिलेट जैसे उत्पादों को शामिल नहीं किया गया है, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रहें.

राजनीतिक बयानबाजी के बीच सरकार का बचाव

विपक्ष द्वारा इस समझौते को लेकर सरकार पर सवाल उठाए गए हैं. आरोप लगाया गया कि यह कदम भारत के हितों के खिलाफ हो सकता है. हालांकि सरकार का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा और कृषि हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है और वार्ता पूरी तरह संतुलित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है.

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम समझौते पर सबकी नजरें टिकी हैं. यदि भारत को भी अमेरिकी कच्चे माल आधारित उत्पादों पर शुल्क में छूट मिलती है, तो यह देश के कपड़ा और परिधान निर्यात क्षेत्र के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है. आने वाले हफ्तों में बातचीत की प्रगति से स्थिति और स्पष्ट होगी.
 


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