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इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को रफ्तार, ECMS के तहत ₹41,863 करोड़ के 22 नए प्रस्ताव मंजूर
सरकार का मानना है कि ECMS के तहत हो रहा यह निवेश भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा और आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन के साथ तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 22 नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है, जिनके जरिए 41,863 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को और मजबूत करने में मदद मिलेगी.
ECMS के तहत कुल निवेश ₹54,567 करोड़ पहुंचा
सरकार के ताजा फैसले के साथ ही ECMS के तहत मंजूरी पाने वाली कंपनियों की कुल संख्या 46 हो गई है. इन सभी प्रस्तावों के जरिए कुल ₹54,567 करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि इस योजना से घरेलू स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी.
दिग्गज कंपनियों को मिली मंजूरी
इस चरण में जिन कंपनियों को मंजूरी दी गई है, उनमें TDK इंडिया, BPL, विप्रो हाइड्रोलिक्स, मदरसन इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, फॉक्सकॉन, सैमसंग डिस्प्ले, डिक्सन और हिंडाल्को जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं. ये कंपनियां कैपेसिटर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए लिथियम-आयन सेल, कॉपर-क्लैड लैमिनेट, एन्क्लोजर, एनोड मटीरियल, कनेक्टर, डिस्प्ले और कैमरा मॉड्यूल जैसे अहम इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जों का निर्माण करेंगी.
हर कंपनी के पास अपनी डिजाइन टीम होनी चाहिए: वैष्णव
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ECMS के तहत मंजूरी पाने वाली सभी कंपनियों को अपनी खुद की डिजाइन टीम बनानी चाहिए. उन्होंने कहा कि डिजाइन टीम में भले ही कम लोग हों, लेकिन टीम का होना जरूरी है. अगर बड़ी टीम होती है तो यह और बेहतर होगा, भले ही इसमें कितना भी खर्च या मेहनत क्यों न लगे.
शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर डिजाइन सुविधाएं विकसित करने की सलाह
वैष्णव ने सुझाव दिया कि कंपनियों को उद्योग निकायों के साथ मिलकर शैक्षणिक संस्थानों में मानक डिजाइन सुविधाएं विकसित करनी चाहिए. इससे खास तौर पर सूक्ष्म, लघु और मझोले उपक्रमों को इसका लाभ मिल सकेगा. उन्होंने कहा कि इस तरह की साझा सुविधाएं देश में देसी डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी.
छह हफ्ते में ठोस रोडमैप तैयार करने के निर्देश
केंद्रीय मंत्री ने कंपनियों और उनके संबंधित उद्योग संगठनों से कहा कि वे छह हफ्तों के भीतर एक ठोस योजना तैयार करें. इस योजना में देसी इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल डिजाइन सेंटर बनाने के लिए जरूरी टूल्स, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर से जुड़े इनपुट का पूरा ब्योरा शामिल होना चाहिए.
गुणवत्ता के लिए सिक्स सिग्मा मानकों पर जोर
अश्विनी वैष्णव ने यह भी कहा कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़ी कंपनियों को सिक्स सिग्मा स्टैंडर्ड्स का सख्ती से पालन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि भारतीय संयंत्रों से निकलने वाले उत्पाद उच्च गुणवत्ता के हों और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनें.
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