होम / बिजनेस / बजट 2026 से पहले EEPC India की मांगें: टैक्स में समानता और तेज GST रिफंड की जरूरत
बजट 2026 से पहले EEPC India की मांगें: टैक्स में समानता और तेज GST रिफंड की जरूरत
EEPC India का मानना है कि बजट 2026 में इन सुझावों को शामिल करने से MSMEs की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, निर्यात को गति मिलेगी और ‘मेक इन इंडिया’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
इंजीनियरिंग निर्यात क्षेत्र की शीर्ष संस्था इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (EEPC India) ने केंद्रीय बजट 2026 से पहले सरकार से गैर-कॉरपोरेट मैन्युफैक्चरिंग MSMEs के लिए आयकर में कटौती और जीएसटी रिफंड की त्वरित मंजूरी की मांग की है. परिषद का कहना है कि इन कदमों से MSMEs की लिक्विडिटी बेहतर होगी, कैश फ्लो का दबाव घटेगा और वैश्विक बाजार में भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी.
गैर-कॉरपोरेट MSMEs के लिए 25% आयकर की मांग
EEPC India ने बजट सुझावों में कहा है कि पार्टनरशिप फर्म, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) और सोल प्रोप्राइटरशिप के रूप में काम करने वाले मैन्युफैक्चरिंग MSMEs के लिए आयकर दर घटाकर 25 प्रतिशत की जानी चाहिए. इससे ये इकाइयां प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के बराबर आ जाएंगी. फिलहाल, गैर-कॉरपोरेट मैन्युफैक्चरिंग MSMEs को सरचार्ज और सेस सहित करीब 33 प्रतिशत आयकर देना पड़ता है, जिससे उन्हें कॉरपोरेट संस्थाओं की तुलना में 8–9 प्रतिशत अंकों का नुकसान उठाना पड़ता है.
GST रिफंड में देरी से बढ़ता है वर्किंग कैपिटल का दबाव
परिषद ने जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया को तेज करने पर भी जोर दिया है. EEPC India का सुझाव है कि 90 प्रतिशत GST रिफंड तुरंत जारी किया जाए, जबकि शेष 10 प्रतिशत राशि सत्यापन के बाद दी जाए. परिषद का कहना है कि रिफंड में देरी से छोटे मैन्युफैक्चरर्स का वर्किंग कैपिटल फंस जाता है, खासकर वे इकाइयां जो निर्यात पर अधिक निर्भर हैं. समय पर रिफंड मिलने से निर्यात गतिविधियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी.
रूफटॉप सोलर पर 100% डेप्रिसिएशन की मांग
सस्टेनेबिलिटी के मोर्चे पर EEPC India ने मैन्युफैक्चरिंग MSMEs के लिए रूफटॉप सोलर निवेश पर 100 प्रतिशत डेप्रिसिएशन की अनुमति देने की मांग की है. फिलहाल इस पर केवल 20 प्रतिशत डेप्रिसिएशन मिलता है. परिषद का कहना है कि पूर्ण डेप्रिसिएशन से छोटे उद्योगों को सस्ती बिजली मिलेगी, ऊर्जा लागत घटेगी और कार्बन फुटप्रिंट कम करने में मदद मिलेगी.
इंजीनियरिंग सेक्टर रोजगार और विदेशी मुद्रा का अहम स्रोत
EEPC India के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि लक्षित टैक्स सुधार और नीतिगत कदम इंजीनियरिंग गुड्स सेक्टर को मजबूत करेंगे, जो देश के सबसे बड़े श्रम-प्रधान उद्योगों में से एक है और विदेशी मुद्रा कमाने का अहम स्रोत भी है. उन्होंने कहा कि आयकर दर घटाकर 25 प्रतिशत करने और GST रिफंड का 90 प्रतिशत तुरंत जारी करने से निर्यातकों को त्वरित राहत मिलेगी.
हरित ऊर्जा अपनाने से लागत भी घटेगी
पंकज चड्ढा ने यह भी कहा कि रूफटॉप सोलर छोटे मैन्युफैक्चरर्स के लिए सबसे व्यावहारिक जलवायु समाधान है. यदि इस पर पूर्ण डेप्रिसिएशन की अनुमति दी जाती है, तो MSMEs को हरित ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, बिजली की लागत कम होगी और पर्यावरणीय लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी.
टैग्स