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590 करोड़ के बैंक घोटाले पर ED का शिकंजा, हरियाणा और चंडीगढ़ में 19 जगहों पर रेड
ईडी की छापेमारी उन स्थानों पर की गई जो कथित तौर पर इस घोटाले से जुड़े लोगों से संबंधित बताए जा रहे हैं. इनमें पूर्व बैंक अधिकारियों, कथित लाभार्थियों और रियल एस्टेट एजेंटों के ठिकाने शामिल हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
590 करोड़ रुपये के IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा और चंडीगढ़ में 19 ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई हरियाणा सरकार के खातों से जुड़े उस मामले में की गई है, जिसमें सरकारी विभागों के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के लिए रखी गई रकम को कथित तौर पर गबन कर निजी इस्तेमाल में लगाए जाने का आरोप है.
सरकारी एफडी के पैसे के गबन का आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जांच एजेंसियों को संदेह है कि हरियाणा सरकार के कई विभागों द्वारा बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए जमा कराई जाने वाली रकम को कुछ व्यक्तियों ने कथित रूप से दूसरी जगहों पर डायवर्ट कर दिया. बताया जा रहा है कि यह खाते चंडीगढ़ स्थित IDFC फर्स्ट बैंक की शाखा में संचालित किए जा रहे थे. आरोप है कि सरकारी धन को तय एफडी में लगाने के बजाय निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया.
शेल कंपनियों के जरिए घुमाया गया पैसा
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि घोटाले की रकम को छिपाने के लिए शेल कंपनियों का सहारा लिया गया. बड़ी रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया ताकि मनी ट्रेल को छिपाया जा सके. जांच एजेंसियों के मुताबिक कुछ छोटे ज्वेलरी कारोबार से जुड़ी संस्थाओं का भी इस्तेमाल किया गया. इन लेनदेन को सोने की खरीद और रियल एस्टेट निवेश के नाम पर दिखाया गया.
पूर्व बैंक अधिकारियों और एजेंटों के ठिकानों पर कार्रवाई
ईडी की छापेमारी उन स्थानों पर की गई जो कथित तौर पर इस घोटाले से जुड़े लोगों से संबंधित बताए जा रहे हैं. इनमें पूर्व बैंक अधिकारियों, कथित लाभार्थियों और रियल एस्टेट एजेंटों के ठिकाने शामिल हैं. जांच में कुछ खातों से बड़ी मात्रा में नकद निकासी के संकेत भी मिले हैं, जिन्हें संदिग्ध माना जा रहा है.
होटल कारोबारी का नाम भी आया सामने
जांच के दौरान चंडीगढ़ के एक होटल कारोबारी विक्रम वाधवा का नाम भी सामने आया है. वह ट्राइसिटी क्षेत्र में रियल एस्टेट निर्माण परियोजनाओं से जुड़े बताए जाते हैं. सूत्रों के मुताबिक कथित घोटाले के सामने आने के बाद से वह फरार बताए जा रहे हैं और जांच एजेंसियां उनकी तलाश कर रही हैं.
घोटाले की पूरी परतें खोलने में जुटी ईडी
प्रवर्तन निदेशालय अब इस मामले में पैसे के पूरे प्रवाह का पता लगाने, अन्य संभावित लाभार्थियों की पहचान करने और घोटाले से जुड़ी संपत्तियों का पता लगाने में जुटा हुआ है. जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई का दायरा भी बढ़ाया जा सकता है.
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