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वेस्ट एशिया तनाव के चलते भारत की आर्थिक ग्रोथ पर मंडरा रहा खतरा, CareEdge की चेतावनी
CareEdge ने FY27 के लिए 7.2 प्रतिशत GDP ग्रोथ का अनुमान बरकरार रखा है. हालांकि, रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि वेस्ट एशिया संघर्ष की अवधि और तीव्रता ही आगे भारत की आर्थिक दिशा तय करेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की आर्थिक स्थिति भले ही मजबूत बनी हुई हो, लेकिन बाहरी जोखिम तेजी से बढ़ रहे हैं. रेटिंग एजेंसी CareEdge की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यह संकट भारत की आर्थिक वृद्धि, महंगाई और व्यापार संतुलन पर दबाव डाल सकता है.
मजबूत घरेलू आधार, लेकिन बाहरी चुनौतियां
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रही, जिसे मजबूत खपत और निवेश का समर्थन मिला. हालांकि, वेस्ट एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक अनिश्चितताएं बढ़ी हैं, जिससे आर्थिक जोखिम कई स्तरों पर बढ़ गए हैं.
तेल की कीमतों में उछाल बना सबसे बड़ा खतरा
CareEdge के अनुसार, इस संकट का सबसे सीधा असर तेल बाजार पर पड़ा है. हाल के हफ्तों में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 30 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस में 10.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत तेल और 51 प्रतिशत गैस आयात करता है. इसमें भी करीब 51 प्रतिशत पेट्रोलियम आयात वेस्ट एशिया से आता है, जिससे भारत इस क्षेत्र पर काफी निर्भर है.
शिपिंग लागत और सप्लाई चेन पर दबाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि तनाव बढ़ने से टैंकर फ्रेट रेट और इंश्योरेंस प्रीमियम में इजाफा हुआ है. इससे लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ रही है और वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है.
शेयर बाजार और निवेश पर असर
इस संकट का असर वित्तीय बाजारों में भी दिख रहा है. पिछले 10 दिनों में भारतीय शेयर बाजार करीब 6.5 प्रतिशत गिरा है, जबकि निवेशकों की चिंता बढ़ने से बाजार में उतार-चढ़ाव तेज हुआ है. मार्च में अब तक विदेशी निवेशकों ने 4.8 अरब डॉलर की निकासी की है, जबकि फरवरी में निवेश प्रवाह सकारात्मक था. वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड बढ़ी हैं और अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है. इसके मुकाबले भारतीय रुपया समेत कई प्रमुख मुद्राएं कमजोर हुई हैं.
निर्यात और व्यापार पर खतरा
वेस्ट एशिया भारत के कुल निर्यात का करीब 14.7 प्रतिशत हिस्सा है. वित्त वर्ष 2025 में इस क्षेत्र को भारत का निर्यात 64.4 अरब डॉलर रहा. इंजीनियरिंग सामान, कृषि उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स पर असर पड़ सकता है. खासतौर पर यूएई और सऊदी अरब भारत के लिए अहम बाजार हैं.
आयात और उर्वरक सप्लाई पर जोखिम
भारत उर्वरकों के आयात के लिए भी वेस्ट एशिया पर निर्भर है. सप्लाई में बाधा आने से खासकर खरीफ सीजन से पहले उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा LNG की कीमतें बढ़ने से उर्वरक लागत और सब्सिडी का बोझ भी बढ़ सकता है.
प्रवासी आय (Remittances) पर भी असर संभव
गल्प देशों से आने वाली रेमिटेंस भारत के लिए अहम स्रोत है. FY24 में कुल रेमिटेंस का 37.9 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आया था. क्षेत्रीय अस्थिरता से इस पर भी असर पड़ सकता है.
अगर तेल 120 डॉलर तक पहुंचा तो क्या होगा
CareEdge के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमत 100-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती है, तो GDP ग्रोथ 6.5 प्रतिशत से नीचे जा सकती है, महंगाई 5.8-6 प्रतिशत तक बढ़ सकती है और चालू खाता घाटा GDP का 2.6-2.8 प्रतिशत हो सकता है.
घरेलू अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत
इन जोखिमों के बावजूद घरेलू संकेतक सकारात्मक बने हुए हैं. निजी खपत 8.7 प्रतिशत बढ़ी, निवेश 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा और सूचीबद्ध कंपनियों की बिक्री 11.4 प्रतिशत बढ़ी है. हालांकि, फरवरी में महंगाई 3.2 प्रतिशत तक बढ़ी है, जिसमें खाद्य और कीमती धातुओं की कीमतों का योगदान रहा.
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