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आप भी चाहते हैं बॉन्ड पर 7.5% का ब्याज, इस हाउसिंग बैंक के बॉन्ड कर सकते हैं अप्लाई
नेशनल हाउसिंग बैंक के इस आईपीओ में आप गुरुवार को 11 बजे से लेकर 12.30 बजे तक बोली लगा सकते हैं. इस बॉन्ड में आपको 7.5 प्रतिशत का ब्याज मिलेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
क्या आप भी बॉन्ड में निवेश करना पसंद करते हैं. अगर हां तो गुरुवार को नेशनल हाउसिंग बैंक अपना बॉन्ड लेकर आ रहा है. नेशनल हाउसिंग बैंक अपने इस बॉन्ड के जरिए बाजार से 2000 करोड़ रुपये तक जुटाने की तैयारी कर रहा है. कंपनी इसमें 500 करोड़ रुपये का बेस इश्यू और 1500 करोड़ रुपये का ग्रीनशू ऑप्शन भी दे रही है. कंपनी अपने इस बॉन्ड पर 7.5 प्रतिशत तक का ब्याज भी ऑफर कर रही है.
कब से कब तक लगाई जा सकती है बोली?
कंपनी की ओर से बॉन्ड को लेकर जानकारी दी गई है कि गुरुवार को 11 बजे से 12.30 बजे के बीच नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया के इलेक्ट्रॉनिक बोली प्लेटफॉर्म पर आयोजित की जाएगी. नेशनल हाउसिंग बैंक का ये बॉन्ड 3 साल, एक महीने और 15 दिन के बाद यानी 26 अप्रैल 2027 को मैच्योर होंगे. बॉन्ड में 1 साल और 6 दिन बाद 17 मार्च 2025 को पुट या कॉल का भी विकल्प दिया गया है. बॉन्ड के लिए न्यूनतम आवेदन का साइज 1 लाख रुपये और उसके बाद 1 लाख रुपये के मल्टीपल में इसमें पैसा लगाया जा सकता है.
इससे पहले ये जुटा चुके हैं बाजार से पैसा?
इससे पहले 5 मार्च को महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड, Aye फाइनेंस, , SMFG इंडिया क्रेडिट कंपनी, ICICI होम फाइनेंस, विस्तार फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और पिरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस के बॉन्ड के जरिए 1345.99 करोड़ रुपये का फंड जुटा चुके हैं. महानगर टेलीफोन लिमिटेड ने 7.51 प्रतिशत कूपन की दर पर भारत सरकार के 10 साल के गारंटी वाले बॉन्ड के जरिए 555.99 करोड़ रुपये जुटाए हैं.
क्या होता है ग्रीन शू ऑप्शन?
ग्रीन-शू ऑप्शन, अंडरराइटिंग एग्रीमेंट में एक प्रावधान होता है, जो अंडरराइटर को यह अधिकार देता है कि जरूरत पड़ने पर वह निवेशकों को शुरुआती प्लान में तय शेयरों से ज्यादा शेयर बेच सकता है. इसी तरह अगर आईपीओ (IPO) में ग्रीन शू विकल्प की बात करें तो मुख्य रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए दिया जाता है कि कंपनी के शेयर अच्छी कीमत पर सूचीबद्ध हों और वे आईपीओ मूल्य से नीचे न गिरें. कोई भी कंपनी जो आईपीओ लाना चाहती है, वह इसके लिए निवेश बैंकरों की मदद लेती है. इन बैंकरों को अंडरराइटर कहा जाता है. ये अंडरराइटर्स कंपनी के शेयरों के लिए बड़े खरीदार जैसे क्यूआईबी, एंकर इन्वेस्टर्स आदि ढूंढते हैं. आईपोओ को सफल बनाने की जिम्मेदारी इन्हीं निवेश बैंकरों पर होती है.
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