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अग्निवीर योजना में बदलावों पर चर्चा गर्म, क्या बदल जाएगी ये केन्द्र की ये स्कीम
लोकसभा चुनावों में सरकार के खिलाफ प्रचार के दौरान अग्निवीर स्कीम का बड़े पैमाने पर जिक्र किया गया. विपक्ष ने सरकार पर बेरोजगारी के मामले को लेकर अग्निवीर स्कीम के जरिए निशाना साधा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
लोकसभा चुनाव के बाद सरकार की जिस योजना में सबसे बड़े बदलावों को लेकर बात हो रही है वो है अग्निवीर योजना. लोकसभा चुनावों में इस योजना को लेकर युवाओं में काफी नाराजगी भी देखने को मिली. अब खबर है कि इसे लेकर सेना के अंदर एक सर्वे में हुआ है जिसमें इस स्कीम को लेकर उससे जुड़े लोगों से उनकी राय ली गई है. इस सर्वे में कई बड़े बदलावों को करने की सिफारिश दी गई है. हालांकि अभी तक सेना की ओर से ऐसी कोई सिफारिश सरकार को नहीं दी गई है.
क्या हो सकता है सबसे बड़ा बदलाव?
इस पूरे मामले को लेकर जिस तरह से विपक्ष ने पूरे चुनावों में मुद्दा बनाया उसके बाद इसमें बदलावों को लेकर बातचीत हो रही है. खबर ये है कि इसे लेकर सेना के अंदर जो सर्वे हुआ है उसमें सबसे बड़ा बदलाव जवानों को रिटेन करने के परसेंटेज को लेकर है. मौजूदा समय में अग्निवीर योजना में अगर कोई जवान 4 साल की सेवा पूरी कर लेता है तो उसके बाद सिर्फ 25 प्रतिशत जवानों को ही स्थाई किया जाता है. लेकिन इस सर्वे में इस प्रतिशत को 60 से 70 प्रतिशत तक करने का सुझाव दिया गया है. इसी तरह से विशेष बलों और विशेषज्ञ सैनिकों के लिए यह कैप लगभग 75 प्रतिशत होना चाहिए.
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ट्रेनिंग पीरियड में हो सकता है बदलाव
मौजूदा समय में अगर कोई अग्निवीर अभी भर्ती होता है तो उसे 37 से 42 हफ्ते की ट्रेनिंग करनी होती है. सेना को इस सर्वे में फीडबैक मिला है कि अगर इस 24 हफ्ते किया जाता है तो इससे जवानों में अच्छा संदेश नहीं जाएगा. यही नहीं सबसे विशेष बात ये है कि सेना ये चाहती है कि इस सभी के बीच अच्छा भाईचारा बना रहे. सभी एक दूसरे के साथ भाईचारे के साथ रह सकें.
सर्विस टाइम में भी सुधार करने का मिला है
इस सर्वे में ये भी निकलकर सामने आई है कि जवानों को जो 4 साल में रिटायर किया जा रहा है उसमें भी इजाफा किया जाना चाहिए. इस समय को कम से कम 7 साल किया जाना चाहिए. साथ ही रिटायर होने पर जवानों को जो फायदा मिला है उसमें भी इजाफा किया जाना चाहिए. उन्हें जहां पूर्व सैनिक का दर्जा दिया जाना चाहिए और उन्हें ग्रेच्युटी भी दी जानी चाहिए. कहा ये भी जा रहा है कि उनकी वरिष्ठता का सम्मान करते हुए उन्हें अर्द्धसैनिकों बलों में नए सिरे से शामिल करने की बजाए केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में भर्ती किया जाए.सेना की तकनीकी सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में ज्यादा सीनियर लोगों की जरूरत होती है. क्योंकि अग्निपथ उन्हें भर्ती करने का एकमात्र जरिया है तो ऐसे में तकनीकी क्षेत्र में भर्ती किए जाने वाले लोगों की कमी हो सकती है.
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