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डायरेक्ट टैक्स से सरकार को बड़ी मजबूती, 8% बढ़ा नेट कलेक्शन, रिफंड में गिरावट
कॉर्पोरेट टैक्स में मजबूती, बेहतर अनुपालन और रिफंड में कमी ने सरकारी राजस्व को मजबूत किया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
वित्तीय वर्ष 2025-26 में टैक्स मोर्चे पर सरकार की स्थिति लगातार मजबूत होती दिख रही है. दरअसल, कॉर्पोरेट टैक्स में बढ़ोतरी और रिफंड में कमी के चलते 17 दिसंबर तक देश का नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 8% बढ़कर 17.05 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. इनकम टैक्स विभाग के ताजा आंकड़े अर्थव्यवस्था में स्थिरता और बेहतर अनुपालन की ओर इशारा कर रहे हैं.
8% बढ़कर 17.05 लाख करोड़ रुपये पहुंचा नेट कलेक्शन
इनकम टैक्स विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 17 दिसंबर 2025 के बीच नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 17,04,725 करोड़ रुपये रहा. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 15,78,433 करोड़ रुपये था. यानी सालाना आधार पर इसमें करीब 8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स में भी 4.16% की बढ़ोतरी
इस अवधि में ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 4.16% बढ़कर 20,01,794 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. यह संकेत देता है कि टैक्स बेस का विस्तार हुआ है और टैक्स अनुपालन में भी सुधार देखने को मिला है.
कॉर्पोरेट टैक्स बना सबसे बड़ा सहारा
डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में सबसे बड़ा योगदान कॉर्पोरेट टैक्स का रहा. नेट कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन बढ़कर 8,17,310 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल यह 7,39,353 करोड़ रुपये था. कंपनियों के बेहतर मुनाफे और मजबूत आर्थिक गतिविधियों ने सरकार की झोली भरने में अहम भूमिका निभाई.
नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स में भी इजाफा
व्यक्तियों और अन्य संस्थाओं द्वारा दिया गया नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स भी बढ़ा है. यह कलेक्शन 7,96,181 करोड़ रुपये से बढ़कर 8,46,905 करोड़ रुपये हो गया. इससे साफ है कि व्यक्तिगत आयकर के मोर्चे पर भी सरकार को बेहतर रिटर्न मिल रहा है.
रिफंड में 13.52% की बड़ी गिरावट
इस दौरान जारी किए गए टैक्स रिफंड में 13.52% की कमी आई है. चालू वित्त वर्ष में अब तक 2,97,069 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया, जबकि पिछले साल यह 3,43,499 करोड़ रुपये था. कम रिफंड का सीधा असर नेट टैक्स कलेक्शन को मजबूत करने में दिखा है.
एडवांस टैक्स से भी मिले मजबूत संकेत
वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक एडवांस टैक्स कलेक्शन 4.27% बढ़कर 7,88,388 करोड़ रुपये हो गया है. इसमें कॉर्पोरेट एडवांस टैक्स लगभग 8% बढ़कर 6,07,300 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. हालांकि, नॉन-कॉर्पोरेट टैक्सपेयर्स द्वारा दिए गए एडवांस टैक्स में 6.49% की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,81,088 करोड़ रुपये रहा.
टैक्स सिस्टम में बदलाव का असर
यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब टैक्स सिस्टम में बड़े सुधार किए गए हैं. 2025 के केंद्रीय बजट में नई पर्सनल इनकम टैक्स व्यवस्था को बढ़ावा देते हुए स्लैब में कटौती की गई, ताकि लोगों के हाथ में ज्यादा डिस्पोजेबल इनकम आए और खपत को गति मिले.
जीएसटी में रेट रैशनलाइजेशन पर जोर
अप्रत्यक्ष करों के मोर्चे पर भी सरकार ने कदम तेज किए हैं. सितंबर में GST काउंसिल ने रेट रैशनलाइजेशन के तहत टैक्स स्लैब को सरल किया. अब जीएसटी की दरें मुख्य रूप से 0%, 5% और 18% रखी गई हैं, जबकि लग्जरी और सिन गुड्स पर 40% की विशेष दर लागू की गई है. इससे सिस्टम को सरल बनाने और टैक्स चोरी पर लगाम लगाने की कोशिश की गई है.
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