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₹16,895 करोड़ का डिजिटल बदलाव: मार्केटर्स को हर रुपए को पूंजी की तरह खर्च करना होगा
डिजिटल माध्यम ने ₹16,800 करोड़ से अधिक जोड़े, जबकि पारंपरिक मीडिया में गिरावट आई, जिससे स्पष्ट हुआ कि बाजार अब बेतरतीब बढ़ नहीं रहा बल्कि उद्देश्यपूर्ण रूप से पुनःवितरित हो रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत के ₹1.55 लाख करोड़ के विज्ञापन बाजार में सबसे बड़ा बदलाव अब सिर्फ बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि यह है कि यह बढ़ोतरी कैसे हो रही है और इससे अब मार्केटर्स से क्या अपेक्षा की जाती है. पिच मेडिसन एडवर्टाइजिंग रिपोर्ट 2026 (PMAR 2026) के अनुसार, 2025 में विज्ञापन खर्च बढ़ा, लेकिन इसका कारण यह नहीं था कि ब्रांड्स ने अचानक अधिक खर्च करने का निर्णय लिया. असल में, वृद्धि बजट के मौलिक पुनःवितरण (reallocation) से आई. डिजिटल माध्यम ने ₹16,800 करोड़ से अधिक जोड़े, जबकि पारंपरिक मीडिया में गिरावट आई, जिससे स्पष्ट हुआ कि बाजार अब बेतरतीब बढ़ नहीं रहा बल्कि उद्देश्यपूर्ण रूप से पुनःवितरित हो रहा है.
खर्च से योजना की ओर
कई वर्षों तक मार्केटिंग इस धारणा पर आधारित रही कि अतिरिक्त खर्च से अतिरिक्त लाभ मिलेगा. अब यह धारणा दबाव में है. डेटा यह संकेत देता है कि भारत की विज्ञापन अर्थव्यवस्था उस चरण में प्रवेश कर रही है जहाँ परिणामों का निर्धारण पैमाने (scale) से नहीं बल्कि दक्षता (efficiency) से होगा.
इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं, संकुचित वित्तीय संसाधन, सतर्क कॉर्पोरेट खर्च, बढ़ती मीडिया लागत और मापनीय परिणामों की बढ़ती मांग. ऐसे माहौल में, मार्केटिंग बजट अब विवेकाधीन खर्च नहीं रह सकता; इसे पूंजी की तरह व्यवहार करना होगा.
पुनःवितरण से बढ़ोतरी
PMAR डेटा से स्पष्ट है कि वृद्धि अब बजट विस्तार से नहीं बल्कि आवंटन दक्षता (allocation efficiency) से आ रही है. इसका मार्केटर्स पर चार प्रमुख प्रभाव हैं:
1. स्मार्ट आवंटन से बाजार हिस्सेदारी : मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए अब उच्च खर्च नहीं, बल्कि समझदारी से संसाधनों का आवंटन महत्वपूर्ण होगा.
2. पुरानी रणनीतियाँ अब काम नहीं करेंगी : कमजोर या पुराने प्लान पर आधारित मीडिया रणनीतियाँ निवेश के बावजूद कम प्रदर्शन करेंगी.
3. चैनल की भूमिका बदल रही है : अब चैनल को अलग इकाई की तरह नहीं देखा जाएगा; उसकी भूमिका पूरे सिस्टम में महत्वपूर्ण होगी, ध्यान आकर्षित करना, स्मृति बनाना या प्रतिक्रिया उत्पन्न करना.
4. रणनीतिक योजना बनेगी प्रतिस्पर्धात्मक लाभ : एकीकृत मीडिया सिस्टम डिजाइन करने की क्षमता नेताओं और पिछड़े वालों में अंतर तय करेगी.
मापनीय प्रदर्शन का उदय
इस बदलाव की वजह से प्रदर्शन-आधारित प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं. सर्च, सोशल, ईकॉमर्स और रिटेल मीडिया न केवल बढ़ रहे हैं बल्कि अब ये डिफ़ॉल्ट आवंटन इंजन बनते जा रहे हैं. ये प्रदर्शन इकोसिस्टम डिजिटल खर्च का एक बड़ा हिस्सा नियंत्रित कर रहे हैं, क्योंकि ये दृश्यता, परिणाम और नियंत्रण प्रदान करते हैं.
ROI के नजरिए से
इस बदलाव से मार्केटिंग और फाइनेंस के बीच तालमेल बढ़ रहा है. अब मार्केटिंग की भाषा पूंजी आवंटन की भाषा लाभ, दक्षता, अनुकूलन और उपज से मेल खाने लगी है. जैसे-जैसे मार्केटिंग अधिक मापनीय होती जा रही है, यह अधिक जवाबदेह भी बनती जा रही है. CMOs (मुख्य विपणन अधिकारी) से अपेक्षा की जाती है कि वे खर्च को केवल दृश्यता के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि व्यवसाय पर प्रभाव के आधार पर भी न्यायसंगत ठहराएं. Essentially, अब CMO को CFO की तरह सोचना होगा.
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