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भारत में लॉन्च हुआ DeepFake Detection System, अब तुरंत होगी AI जेनरेटेड कंटेट की पहचान

इस एडवांस सिस्टम के आने से डिजिटल सुरक्षा को एक नई ताकत मिलेगी और लोग बेहतर तरीके से इंटरनेट पर सुरक्षित रह सकेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत में डीपफेक (DeepFake) टेक्नोलॉजी के बढ़ते दुरुपयोग के बीच, अब एक नई उम्मीद जागी है. दरअसल, Zero Defend Security ने एक अत्याधुनिक DeepFake Detection System विकसित किया है, जो AI द्वारा जनरेट की गई तस्वीरें, वीडियो और ऑडियो की पहचान करने में 99% तक सटीकता प्रदान करता है. इस एडवांस टेक्नोलॉजी को देखकर उम्मीद की जा रही है कि यह साइबर अपराधों से निपटने और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी. बता दें, हाल ही में, इस डिटेक्शन सिस्टम को CID कर्नाटक द्वारा आयोजित 'CIDECODE हैकाथॉन' इवेंट में सम्मानित किया जा चुका है. तो आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

कैसे काम करता है ये सिस्टम?

टेक्नोलॉजी हमारे जीवन को सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने के लिए है, लेकिन कुछ लोग इसका गलत इस्तेमाल करके साइबर अपराधों को बढ़ावा दे रहे हैं. इसी समस्या को देखते हुए, भारत में एक अत्याधुनिक डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम को विकसित किया गया है, जो AI द्वारा जनरेट किए गए फोटो, वीडियो और आवाज़ की पहचान करने में सक्षम है। इस सिस्टम का नाम है Vastav, जिसे Zero Defend Security ने विकसित किया है. 

Zero Defend Security द्वारा डेवलप 'Vastav' सिस्टम का मुख्य उद्देश्य डिजिटल सामग्री की प्रमाणिकता की जांच करना है. यह तकनीक कॉन्फिडेंस स्कोर, हीटमैप और मेटाडेटा इनसाइट्स का उपयोग करके, डिजिटल कंटेंट की वास्तविकता की जांच करती है. जब कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो भेजा जाता है, तो यह सिस्टम उसके बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करता है, जिससे फर्जी सामग्री का पता चलता है. बता दें, Zero Defend Security एक प्रमुख साइबर सुरक्षा कंपनी है, जो रैनसमवेयर सुरक्षा, DDoS मिटिगेशन, क्लाउड सुरक्षा, पेनेट्रेशन टेस्टिंग (VAPT), और थ्रेट इंटेलिजेंस जैसी सेवाएं प्रदान करती है. इसके अलावा, यह कंपनी एथिकल हैकिंग, रेड/ब्लू टीमिंग, OSCP, OSINT, वेब और एंड्रॉयड सिक्योरिटी जैसी ट्रेनिंग भी देती है.

Vastav डिटेक्शन सिस्टम की खूबियां

1.99% सटीकता : Vastav सिस्टम 99% तक सटीकता के साथ डीपफेक कंटेंट की पहचान कर सकता है. 
2. तेज और कुशल : यह सिस्टम कुछ ही सेकेंड्स में गहन विश्लेषण करता है और तुरंत फर्जी कंटेंट को हाइलाइट करता है.
3. हीटमैप और कॉन्फिडेंस स्कोर : ये टूल्स कंटेंट के विश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और फर्जी कंटेंट को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करते हैं.

कीमत और उपलब्धता

जहां तक इस सिस्टम की कीमत की बात है, कानून प्रवर्तन संस्थाओं और सरकारी एजेंसियों को इस सिस्टम का फ्री एक्सेस दिया गया है. वहीं, आम जनता और प्राइवेट कंपनियों के लिए यह सिस्टम पेड सर्विस के रूप में उपलब्ध होगा. फिलहाल, इसकी सब्सक्रिप्शन फीस के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.

 


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