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RBI ने नहीं दी राहत और इधर हिस्से में आई मामूली राहत भी छिनने के आसार!

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है, जो भारत जैसे देश के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दामों में तेजी देखने को मिल रही है. एक दिन पहले यानी गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल प्राइस 88.67 बैरल प्रति डॉलर के करीब पहुंच गया था. माना जा रहा है कि ये जल्दी ही 90 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर लेगा. कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल कई कारणों से आ रहा है और आने वाले समय में इसकी रफ्तार तेज हो सकती है. ऐसे में अपनी ईंधन खपत को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर भारत की मुश्किलों में इजाफा हो सकता है.  

चुनाव बाद बढ़ सकते हैं दाम  
भारत अपनी तेल जरूरतों का 80 प्रतिशत आयात करता है. ऐसे में कच्चे तेल में होने वाले उतार-चढ़ाव का उस पर काफी असर पड़ता है. लंबे इंतजार के बाद ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने हाल ही में पेट्रोल-डीजल के दामों (Petrol-Diesel Price) में 2 रुपए की कटौती की थी. अब यदि कच्चा तेल महंगा होता रहता है, तो जनता को मिली ये मामूली राहत भी छिन सकती है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर क्रूड ऑयल के दाम लगातार चढ़ते हैं, तो चुनाव बाद घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफे से इंकार नहीं किया जा सकता.   

4 महीनों में ही 15 डॉलर महंगा
एक मीडिया रिपोर्ट में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव पंकज जैन के हवाले से बताया गया है कि कच्चे तेल के दाम बढ़ना भारत के लिए चिंता का विषय है. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बेंचमार्क ब्रेंट की कीमत करीब 4 महीनों में 15 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर करीब 89 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है, जो वाकई चिंता की बात है. उन्होंने आगे कहा कि कीमत में वृद्धि के असर का अंदाजा तभी लगाया जा सकता है जब लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहे. यदि कीमतें एक महीने या उससे अधिक समय तक इसी तरह रहती हैं, तो कंपनियां उसी के हिसाब से निर्णय लेंगी.

इन कारणों से बढ़ रही आशंका
वहीं, जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि रूस (Russia) की तरफ से क्रूड ऑयल (Crude Oil) उत्पादन में की गई कटौती से सितंबर तक ग्लोबल बेंचमार्क क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच सकती हैं. ओपेक+ (OPEC+) के कई देशों ने भी तेल बाजार में जारी उठापटक को रोकने के इरादे से प्रति दिन 2.2 मिलियन बैरल की स्वैच्छिक उत्पादन कटौती साल के अंत तक जारी रखने का फैसला लिया है. इसके अलावा, सीरिया में ईरान दूतावास पर इस्राइली हमले में कुछ सीनियर ईरानी सैन्य अधिकारियों के मारे जाने के बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष को बढ़ावा मिल सकता है. इन सभी कारणों से कच्चे तेल के दामों में और उछाल आ सकता है.

RBI ने तोड़ दी लोगों की उम्मीद
उधर, RBI ने रेपो रेट में एक बाद फिर कोई बदलाव नहीं किया है. केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 6.50% पर यथावत रख सकता है. RBI ने इससे पहले फरवरी में हुई बैठक में भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था. आखिरी बार फरवरी 2023 में ब्याज दरों में 0.25% की बढ़ोत्तरी की गई थी. यदि आरबीआई रेपो रेट में इजाफा करता, तो बैंकों की ओर से सभी तरह के लोन की ब्याज दर बढ़ सकती थी. ऐसे में आपकी EMI भी बढ़ जाती. वहीं अगर आरबीआई रेपो रेट कम करता, तो आपका लोन सस्ता हो सकता था, यानी EMI का बोझ कुछ कम हो जाता. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. लोन धारक लंबे समय से यही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि महंगाई के मौसम में EMI का बोझ कुछ कम हो जाए.  


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