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115 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, ऊर्जा बाजार में सप्लाई संकट का बढ़ता खतरा: GlobalData

ग्लोबलडेटा ने अपने ताजा अनुमान में तीन संभावित परिदृश्यों का जिक्र किया है, जिनमें ब्रेंट क्रूड की कीमतें मुख्य रूप से खाड़ी क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति व्यवधान की गंभीरता पर निर्भर रहेंगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

9 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया. ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जबकि ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए 120 डॉलर के करीब पहुंच गया, जो लगभग चार साल का उच्चतम स्तर है. इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म ग्लोबलडेटा (GlobalData) के आर्थिक शोध विश्लेषक जैसन डेविस के अनुसार यह तेजी संकेत देती है कि तेल बाजार अब केवल लॉजिस्टिक्स व्यवधान नहीं बल्कि संभावित आपूर्ति संकट को भी कीमतों में शामिल कर रहा है.

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर

ग्लोबलडेटा की 2 मार्च 2026 की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के कारण मार्च के अंत तक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. उस समय मुख्य चिंता लॉजिस्टिक्स व्यवधान, समुद्री सुरक्षा जोखिम और टैंकरों की आवाजाही पर संभावित असर को लेकर थी. हालांकि इसके बाद संघर्ष अपेक्षा से अधिक तेजी से बढ़ा है, जिससे बाजार में अस्थिरता की नई लहर पैदा हो गई है.

लॉजिस्टिक्स से सप्लाई संकट की ओर बढ़ता बाजार

विश्लेषकों के अनुसार हालिया कीमतों में उछाल इस बात का संकेत है कि बाजार अब केवल लॉजिस्टिक्स समस्याओं को नहीं बल्कि वास्तविक आपूर्ति में संभावित कमी को भी ध्यान में रख रहा है. शुरुआत में ट्रेडर्स की चिंता मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री जोखिम को लेकर थी, जिससे शिपिंग लागत बढ़ने और तेल की खेप में देरी होने की आशंका थी. लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख उत्पादकों की उत्पादन और निर्यात क्षमता भी प्रभावित हो सकती है.

सीमित अतिरिक्त क्षमता से बढ़ी संवेदनशीलता

तेल की कीमतों का 100 डॉलर से नीचे से बढ़कर 115 डॉलर से ऊपर पहुंचना यह दिखाता है कि वैश्विक बाजार में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का बफर काफी कम रह गया है. विशेषज्ञों के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में उत्पादन में थोड़ी भी बाधा आने पर कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है, क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल के बड़े हिस्से का व्यापार इसी क्षेत्र से होता है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता बढ़ाती है जोखिम

वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात से निर्यात होता है और इनका अधिकांश निर्यात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए गुजरता है. ऐसे में इस एक समुद्री मार्ग पर निर्भरता वैश्विक ऊर्जा बाजार को भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है. वित्तीय बाजारों ने भी इस तेल झटके के व्यापक आर्थिक प्रभावों को कीमतों में शामिल करना शुरू कर दिया है. इसमें बढ़ती महंगाई, मुद्रा बाजार में अस्थिरता और ऊर्जा आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं के शेयर बाजारों पर दबाव जैसी आशंकाएं शामिल हैं.

तीन संभावित परिदृश्यों पर आधारित अनुमान

ग्लोबलडेटा ने अपने ताजा अनुमान में तीन संभावित परिदृश्यों का जिक्र किया है, जिनमें ब्रेंट क्रूड की कीमतें मुख्य रूप से खाड़ी क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति व्यवधान की गंभीरता पर निर्भर रहेंगी. विश्लेषकों के अनुसार अगर ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है तो तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का जोखिम बढ़ सकता है. इससे केंद्रीय बैंकों की नीतियां भी जटिल हो सकती हैं और बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है.

संघर्ष की अवधि होगी निर्णायक

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल बाजार की दिशा अब इस बात पर निर्भर करेगी कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव कितने समय तक बना रहता है. अगर कुछ हफ्तों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य हो जाती है तो तेल की कीमतों में हालिया बढ़त का कुछ हिस्सा कम हो सकता है. लेकिन यदि संघर्ष बढ़ता है और निर्यात बुनियादी ढांचे पर खतरा बना रहता है तो वैश्विक बाजार में आपूर्ति की कमी पैदा हो सकती है, जिससे कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं.

कूटनीतिक प्रयासों से मिल सकती है राहत

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देश और तुर्की अमेरिका तथा अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक चैनलों के जरिए तनाव कम करने में सफल होते हैं तो बाजार में मौजूदा जोखिम प्रीमियम घट सकता है.

ऐसी स्थिति में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से टैंकरों की आवाजाही स्थिर हो सकती है, बीमा और परिवहन लागत कम हो सकती है और उत्पादन में की गई कटौती भी धीरे-धीरे वापस ली जा सकती है. इससे तेल की कीमतें संकट से पहले के स्तर के करीब आ सकती हैं.

तेल बाजार पर खाड़ी क्षेत्र का असर जारी

ग्लोबलडेटा का मानना है कि आने वाले समय में भी तेल बाजार खाड़ी क्षेत्र की परिस्थितियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना रहेगा. कीमतों की दिशा काफी हद तक सुरक्षा स्थिति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए निर्यात मार्गों की स्थिरता पर निर्भर करेगी. भले ही शिपिंग में अल्पकालिक स्थिरता आ जाए, लेकिन उत्पादन, बुनियादी ढांचे या टैंकर यातायात में किसी भी प्रकार का व्यवधान तेल बाजार में अस्थिरता और तेल आयात करने वाले देशों में महंगाई के दबाव को बनाए रख सकता है.

 


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