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कैपेक्स दबाव और टैरिफ जोखिमों के बावजूद भारतीय कॉरपोरेट्स की क्रेडिट स्थिति मजबूत : रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक वृद्धि, बेहतर मार्जिन और अनुकूल फंडिंग परिस्थितियों का मेल भारतीय कॉरपोरेट्स को स्थिर क्रेडिट प्रोफाइल बनाए रखने में मदद करेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) के अनुसार, भारी निवेश यानी कैपेक्स दबाव और वैश्विक टैरिफ से जुड़े जोखिमों के बावजूद भारतीय कॉरपोरेट्स के क्रेडिट मेट्रिक्स वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान भी कुल मिलाकर स्थिर बने रहने की उम्मीद है. फिच का कहना है कि राजस्व वृद्धि और मुनाफे में सुधार, ऊंचे निवेश और कमजोर फ्री कैश फ्लो से पैदा होने वाले दबाव को काफी हद तक संतुलित कर देंगे.

FY27 तक स्थिर रहेंगे क्रेडिट मेट्रिक्स

फिच ने अपनी रिपोर्ट “India Corporates Credit Trends: January 2026” में कहा है कि मार्च 2027 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष तक भारतीय कॉरपोरेट्स की क्रेडिट प्रोफाइल मोटे तौर पर स्थिर बनी रहेगी. रेटिंग एजेंसी के अनुसार, FY27 में रेटेड भारतीय कंपनियों का कुल राजस्व करीब 6 प्रतिशत बढ़ सकता है, जबकि FY26 में इसमें लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है.

राजस्व और मार्जिन से मिलेगा सहारा

फिच का मानना है कि उच्च राजस्व और बेहतर ऑपरेटिंग मार्जिन, कई सेक्टर्स में ऊंचे कैपेक्स और कमजोर फ्री कैश फ्लो के असर को संतुलित करेंगे. एजेंसी ने FY27 में EBITDA मार्जिन बढ़कर करीब 16 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो FY26 में अनुमानित 15.3 प्रतिशत था. यह सुधार मजबूत मांग, बेहतर प्राइसिंग, इनपुट लागत में कमी और कुछ मामलों में बेहतर प्रोडक्ट मिक्स के चलते संभव हो सकता है.

GST कटौती और खपत में तेजी से मिलेगा लाभ

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिर वृद्धि और वस्तु एवं सेवा कर (GST) दरों में व्यापक कटौती के बाद उपभोक्ता खर्च के मजबूत होने से कंपनियों की आय में सुधार देखने को मिल सकता है. फिच का कहना है कि इससे कॉरपोरेट सेक्टर के प्रदर्शन को अतिरिक्त समर्थन मिलेगा.

ऊंचे निवेश के बावजूद कर्ज पर नियंत्रण

भले ही निवेश का स्तर ऊंचा बना हुआ है, लेकिन फिच को उम्मीद है कि कंपनियों का लीवरेज नियंत्रण में रहेगा. फिच-रेटेड भारतीय कॉरपोरेट्स के लिए मीडियन EBITDA नेट लीवरेज FY27 में लगभग 3.2 गुना रहने का अनुमान है, जबकि FY26 में यह करीब 3.3 गुना था. एजेंसी का कहना है कि मुनाफे में बढ़ोतरी कई सेक्टर्स में कैपेक्स के कारण उत्पन्न नकारात्मक फ्री कैश फ्लो की भरपाई कर देगी.

वैश्विक टैरिफ और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम

फिच ने बाहरी जोखिमों को लेकर भी आगाह किया है, खासकर वैश्विक व्यापार और टैरिफ से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर. एजेंसी के अनुसार, फिलहाल भारतीय कंपनियों का अमेरिकी टैरिफ्स से सीधा जोखिम सीमित है, लेकिन यदि आगे और टैरिफ लगाए जाते हैं तो फार्मा जैसे सेक्टर्स पर दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा, अतिरिक्त शुल्क वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकते हैं, जिसका अप्रत्यक्ष असर भारतीय कंपनियों पर भी पड़ सकता है.

रुपये में गिरावट से बढ़ सकता है जोखिम

करेंसी रिस्क को लेकर भी फिच ने चिंता जताई है. एजेंसी ने कहा कि यदि भारतीय रुपया तेज़ी से कमजोर होता है, तो विदेशी मुद्रा में कर्ज रखने वाली कंपनियों की बैलेंस शीट पर दबाव आ सकता है और इससे क्रेडिट प्रोफाइल प्रभावित हो सकती है.

फंडिंग माहौल बना रहेगा सहायक

फंडिंग के मोर्चे पर फिच को FY27 में हालात अनुकूल बने रहने की उम्मीद है. मजबूत बैंक बैलेंस शीट और कम ब्याज दरें कंपनियों के लिए फंड जुटाना आसान बनाए रखेंगी. इसके साथ ही, कंपनियां अपने फंडिंग मिक्स को बेहतर बनाने पर भी काम करती रहेंगी.

ऑफशोर बॉन्ड इश्यू में आंशिक सुधार की उम्मीद

फिच को 2026 में ऑफशोर बॉन्ड इश्यू में आंशिक सुधार की भी उम्मीद है. यह सुधार अमेरिका में ब्याज दरों में और कटौती की संभावनाओं और भारतीय कंपनियों के लिए बाहरी उधारी से जुड़े आरबीआई नियमों में संभावित ढील के कारण आ सकता है, बशर्ते प्रस्तावित बदलाव लागू किए जाएं.

 


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