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संस्थानों के निर्माता: प्रणव चतुर्वेदी की एंटरप्राइज सोच और दीर्घकालिक दृष्टि

प्रणव चतुर्वेदी उन चुनिंदा उद्यमियों में हैं जिन्होंने कारोबार को केवल मूल्यांकन और फंडिंग के नजरिये से नहीं, बल्कि टिकाऊ ढांचे और दीर्घकालिक प्रभाव के रूप में देखा है. कल यानी 11 फरवरी को उनका जन्मदिन था.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago

1998 में प्रधानमंत्री मानवाधिकार पुरस्कार से सम्मानित चतुर्वेदी को कम उम्र में ही नेतृत्व की पहचान मिल गई थी. 2003 में एसएस कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज से विशिष्ट श्रेणी में स्नातक करने के बाद, वे 2006 तक कोटक महिंद्रा समूह में सबसे कम उम्र के चीफ मैनेजर बने. हालांकि, उन्होंने पारंपरिक कॉरपोरेट सफलता की राह पर आगे बढ़ने के बजाय एक अलग दिशा चुनी, कॉरपोरेट तेजी से हटकर उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाया.

शिक्षा क्षेत्र में स्केलेबल मॉडल की नींव

2009 में उन्होंने प्रथम् टेस्ट प्रेप की सह-स्थापना की, जो आज गैर-विज्ञान प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भारत के सबसे बड़े अंडरग्रेजुएट टेस्ट-प्रेप संस्थानों में से एक है. यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक संरचित, परिणाम-केंद्रित और परिचालन अनुशासित मॉडल की उनकी शुरुआती समझ को दर्शाती है.

Favcy Venture Builders: एक व्यापक दृष्टि

2015 में सह-स्थापित Favcy Venture Builders के साथ चतुर्वेदी ने अपनी सोच को और व्यापक रूप दिया. इसे एक पारंपरिक फंड की तरह नहीं, बल्कि एक संस्थागत ढांचे वाले वेंचर स्टूडियो के रूप में विकसित किया गया.

Favcy के अंतर्गत 1to10 एक्सेलेरेटर, शिक्षा, फूड एंड बेवरेज और मीडिया आईपी जैसे क्षेत्रों में सेक्टोरल स्टूडियोज, तथा रणनीतिक एसेट अधिग्रहण का स्पष्ट जनादेश शामिल है.

इसकी सबसे बड़ी विशेषता उत्तराधिकार की चुनौती झेल रहे पारंपरिक व्यवसायों का अधिग्रहण और उन्हें नए सिरे से पुनर्जीवित करना है, ऑपरेशनल विशेषज्ञता, सशक्त गवर्नेंस फ्रेमवर्क, पूंजी अनुशासन और तकनीकी एकीकरण के माध्यम से. जहां बाजार अक्सर वैल्यूएशन पर केंद्रित रहता है, वहां यह मॉडल टिकाऊपन को प्राथमिकता देता है.

नैरेटिव बिल्डिंग और “मॉडर्न धंधा” की सोच

प्रणव चतुर्वेदी की भूमिका केवल उद्यम निर्माण तक सीमित नहीं है. वे Kal Ke Krorepati – Shubh Labh Universe के निर्माता हैं, जो JioHotstar पर स्ट्रीम हो रहा है. इस शो के माध्यम से वे “मॉडर्न धंधा” को एक सांस्कृतिक और व्यावसायिक आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जहां उद्यमिता को केवल प्रेरक कहानी नहीं, बल्कि संस्थागत ढांचे के रूप में देखने की वकालत की जाती है. उनका मानना है कि भारत में उद्यम को रोमांटिक बनाने के बजाय व्यवस्थित और संरचित किया जाना चाहिए.

सिनेमा में भी उपस्थिति

फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उन्होंने 2022 में Ghaath का निर्माण किया, जिसे बर्लिनाले फिल्म फेस्टिवल इंडिया शोकेस में प्रदर्शित किया गया. यह दर्शाता है कि सोच-समझकर समर्थित बौद्धिक संपदा वैश्विक मंच तक पहुंच सकती है, जबकि अपनी स्थानीय पहचान बनाए रखती है.

संस्थागत विरासत गढ़ने की दिशा

शिक्षा, वेंचर बिल्डिंग, मीडिया और रणनीतिक अधिग्रहण, हर क्षेत्र में एक समान पैटर्न दिखाई देता है. चतुर्वेदी पूंजी और ऑपरेटर, विरासत और विस्तार, रचनात्मकता और गवर्नेंस के बीच सेतु का निर्माण करते हैं.

आज उनका मिशन उत्तराधिकार संकट से जूझ रहे व्यवसायों का अधिग्रहण और रूपांतरण करना है,  यह केवल विकास की नहीं, बल्कि संरक्षण और संस्थागत निरंतरता की भी कहानी है.

व्यक्तिगत मंत्र से संस्थागत सोच तक

“If it is to be, it is up to me” , उनका यह व्यक्तिगत मंत्र समय के साथ ऐसी संरचनाओं में बदल गया है, जो व्यक्ति से आगे टिकने की क्षमता रखती हैं.

उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में लिखी गई यह स्टोरी केवल उपलब्धियों की सूची नहीं, बल्कि उन इकोसिस्टम्स की है जिन्हें उन्होंने  निरंतरता और स्थायित्व को ध्यान में रखते हुए शांत, व्यवस्थित और दीर्घकालिक दृष्टि के साथ तैयार किया है.


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