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Eternal में लगातार बिकवाली, 52 हफ्तों के हाई से 30% नीचे फिसला शेयर

विश्लेषकों का मानना है कि शेयर में गिरावट की मुख्य वजह क्विक कॉमर्स सेगमेंट में तेज होती प्रतिस्पर्धा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago

फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेक्टर की प्रमुख कंपनी इटरनल (Eternal Ltd)जो जोमैटो (Zomato) की पैरेंट कंपनी है, के शेयरों में गिरावट का सिलसिला जारी है. मंगलवार को कंपनी का शेयर लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में टूट गया. पिछले पांच दिनों में स्टॉक करीब 9 फीसदी फिसल चुका है, जबकि एक महीने में इसमें 17 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. 52 हफ्तों के उच्च स्तर से शेयर लगभग 30 फीसदी नीचे आ चुका है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है.

दिनभर के कारोबार में दबाव

मंगवार को खबर लिखे जाने के दौरान शेयर लगभग 14 रुपये यानी 5.22 फीसदी की कमजोरी के साथ 254 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था. इंट्राडे में इसने 264.90 रुपये का उच्च स्तर और 252.55 रुपये का निचला स्तर छुआ. लगातार बिकवाली यह संकेत दे रही है कि फिलहाल काउंटर पर शॉर्ट टर्म में दबाव बना हुआ है और निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं.

क्विक कॉमर्स में बढ़ती प्रतिस्पर्धा बनी बड़ी वजह

विश्लेषकों का मानना है कि शेयर में गिरावट की मुख्य वजह क्विक कॉमर्स सेगमेंट में तेज होती प्रतिस्पर्धा है. अमेजन (Amazon() ने ‘Amazon Now’ और Amazon Fresh के जरिए इस सेगमेंट में आक्रामक एंट्री की है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. वहीं, फ्लिपकार्ट (Flipkart) की ‘Flipkart Minutes’ सेवा भी 10-15 मिनट डिलीवरी मॉडल के साथ ग्राहकों को आकर्षित कर रही है. इसके अलावा जेप्टो (Zepto) के संभावित IPO की चर्चाओं ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा है. ब्रोकरेज फर्म Elara के अनुसार Zepto और Instamart की कीमतें Blinkit की तुलना में 3-4 फीसदी तक सस्ती हैं, जिससे मार्जिन पर दबाव की आशंका बढ़ गई है. कीमतों की यह प्रतिस्पर्धा और तेज विस्तार की रणनीति निकट अवधि में लाभप्रदता को प्रभावित कर सकती है.

जेफरीज की नजर में लंबी अवधि का अवसर

ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस Jefferies का मानना है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद क्विक कॉमर्स का टोटल एड्रेसेबल मार्केट यानी TAM अभी भी आकर्षक है. ब्रोकरेज के मुताबिक कंपनी मुनाफे को सुधारने के लिए किसी तरह की कृत्रिम विंडो ड्रेसिंग नहीं कर रही है, बल्कि उसका फोकस दीर्घकालिक रणनीति पर है.

कंपनी के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने पहले CEO पद से इस्तीफा देते समय कहा था कि वे नए और ज्यादा जोखिम वाले प्रयोगों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और ऐसे प्रयोग पब्लिक कंपनी के ढांचे से बाहर बेहतर तरीके से किए जा सकते हैं. मैनेजमेंट ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रमोटर हिस्सेदारी बेचने की कोई योजना नहीं है.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक प्रतिस्पर्धा स्थिर नहीं होती और लाभप्रदता के मोर्चे पर स्पष्ट सुधार नहीं दिखता, तब तक शेयर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. निवेशकों की नजर अब कंपनी की ग्रोथ, मार्जिन ट्रेंड और क्विक कॉमर्स सेगमेंट में उसकी रणनीतिक बढ़त पर रहेगी.


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