होम / बिजनेस / बुच पर आरोपों की बौछार के बाद अब कांग्रेस ने Adani पर SEBI से किए तीखे सवाल
बुच पर आरोपों की बौछार के बाद अब कांग्रेस ने Adani पर SEBI से किए तीखे सवाल
कांग्रेस लीडर जयराम रमेश ने अडानी मामले को लेकर सेबी से कुछ तीखे सवाल पूछे हैं. कांग्रेस सेबी प्रमुख पर भी कई गंभीर आरोप लगा चुकी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
कांग्रेस सेबी चीफ माधबी पुरी बुच को लगातार निशाना बना रही है. बुच पर एक के बाद एक कई गंभीर आरोप लगाने के बाद अब कांग्रेस ने अडानी समूह को लेकर सेबी से सवाल पूछा है. कांग्रेस ने सवाल किया है कि क्या अडानी मामले में फंसे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (SEBI) को अपने वास्तविक मालिकों का विवरण दिया है? यह ब्यौरा देने की आखिरी तिथि नौ सितंबर थी, जो अब बीत चुकी है.
पालन करना चाहिए
कांग्रेस पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आगे कहा कि सेबी को निर्धारित मानदंडों का ईमानदारी के साथ पालन करना चाहिए. बता दें कि अमेरिकी संस्था हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में अडानी समूह पर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे. इस मामले में कुछ विदेशी निवेशकों की भूमिका को कठघरे में खड़ा किया गया था. कांग्रेस ने उसी को लेकर अब सेबी पर सवाल दागा है.
आज 11 सितंबर है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) – जिन पर अपने इक्विटी पोर्टफ़ोलियो के लगभग पूरे हिस्से को एक ही कॉर्पोरेट ग्रुप में रखने का आरोप है - को अपनी होल्डिंग्स के लाभकारी मालिकों के नाम बताने के लिए निर्धारित SEBI की डेडलाइन को ख़त्म हुए दो दिन हो गए हैं। इसकी… https://t.co/PIeXTRbJPY
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) September 11, 2024
X पर लिखा पोस्ट
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर लिखा है - आज 11 सितंबर है. उन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को अपनी होल्डिंग्स के लाभकारी मालिकों के नाम बताने के लिए निर्धारित SEBI की समयसीमा को खत्म हुए दो दिन बीत गए हैं, जिन पर अपने इक्विटी पोर्टफ़ोलियो के लगभग पूरे हिस्से को एक ही कॉरपोरेट समूह में रखने का आरोप है. रमेश ने आगे कहा है कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को कुछ दिन पहले उठाया था कि मॉरीशस स्थित उन दो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण में याचिका दायर कर नए फॉरेन इन्वेस्टर्स नॉर्म्स का पालन करने से तत्काल राहत की मांग की है जो महाघोटाले में हो रहे खुलासे का हिस्सा हैं.
कौन रहे विफल?
कांग्रेस लीडर ने सवाल किया कि क्या सभी FPI को इन मानदंडों का पालन करने के लिए सेबी के समक्ष अपने अंतिम लाभकारी मालिकों के विवरण का खुलासा करना आवश्यक है? किन विदेशी निवेशकों ने इसका पालन किया है और कौन-कौन से ऐसा करने में विफल रहे हैं? सबसे अहम यह कि क्या महाघोटाले में फंसे एफपीआई ने सेबी को अपने वास्तविक मालिकों का विवरण दिया है? रमेश ने दावा किया कि मोदानी महाघोटाले पर अपने शुरुआती फैसलों के हिस्से के रूप में उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया था कि सेबी इन FPI द्वारा किए गए उल्लंघन की जांच दो महीने के भीतर करे. उन्होंने सवाल किया कि इस नए मानदंड को लागू करने में 18 महीने क्यों लगे?
टैग्स