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सेबी ने AIF एग्जिट नियमों में दी राहत, ‘इनऑपरेटिव फंड’ ढांचा लागू

नियमों में परिचालन खर्चों को पूरा करने के लिए भी धनराशि सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है, हालांकि इसके लिए निर्धारित शर्तों और समय-सीमा का पालन करना होगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 days ago

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने वैकल्पिक निवेश कोष (AIFs) के समापन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नए नियमों को मंजूरी दे दी है. नए ढांचे के तहत फंड प्रबंधकों को अधिक लचीलापन मिलेगा, जबकि फंड के अंतिम चरण में अनुपालन संबंधी बोझ भी कम होगा.

संशोधित नियमों के अनुसार अब AIFs को कुछ विशेष परिस्थितियों में अपनी निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी परिसमापन से प्राप्त राशि अपने पास रखने की अनुमति होगी. यह पहले के नियमों से बड़ा बदलाव है, जिनमें फंड को अपना पंजीकरण सरेंडर करने से पहले सभी राशि निवेशकों को वितरित करनी होती थी और बैंक खाते का बैलेंस शून्य रखना अनिवार्य था.

‘इनऑपरेटिव फंड’ का नया ढांचा

सेबी ने "इनऑपरेटिव फंड" नाम से एक नया ढांचा भी पेश किया है. इसके तहत वे फंड, जिन्होंने अपनी निवेश अवधि पूरी कर ली है लेकिन लंबित देनदारियों, कानूनी विवादों या कर संबंधी मामलों के कारण पूरी तरह बंद नहीं हो पाए हैं, सीमित अनुपालन आवश्यकताओं के साथ संचालन जारी रख सकेंगे. ऐसे फंड तब तक इस व्यवस्था के तहत बने रहेंगे, जब तक उनका पंजीकरण औपचारिक रूप से सरेंडर नहीं कर दिया जाता.

किन परिस्थितियों में रख सकेंगे धनराशि?

सेबी के अनुसार यदि किसी AIF को मुकदमेबाजी संबंधी नोटिस, टैक्स डिमांड या नियामकीय दावा प्राप्त हुआ है, तो वह अपनी वैध अवधि के बाद भी कुछ धनराशि रोक कर रख सकता है. इसके अलावा संभावित देनदारियों को पूरा करने के लिए भी राशि सुरक्षित रखी जा सकती है, बशर्ते फंड को मूल्य के आधार पर कम से कम 75 प्रतिशत निवेशकों की सहमति प्राप्त हो.

नियमों में परिचालन खर्चों को पूरा करने के लिए भी धनराशि सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है, हालांकि इसके लिए निर्धारित शर्तों और समय-सीमा का पालन करना होगा.

लंबे समय से चली आ रही व्यावहारिक समस्याओं का समाधान

यह सुधार उन व्यावहारिक चुनौतियों को दूर करने के उद्देश्य से लाया गया है, जिनका सामना कई AIFs को अपने समापन के दौरान करना पड़ता था. अक्सर ऐसा देखा गया कि फंड अपने निवेश पोर्टफोलियो का परिसमापन कर चुके होते थे, लेकिन लंबित कानूनी मामलों, कर निर्धारण प्रक्रियाओं या अन्य परिचालन दायित्वों के कारण वे औपचारिक रूप से बंद नहीं हो पाते थे.

अनुपालन बोझ होगा कम

नए इनऑपरेटिव फंड ढांचे के तहत सेबी ऐसे फंडों के लिए कई अनुपालन आवश्यकताओं को युक्तिसंगत बनाने की तैयारी में है. इनमें कुछ नियमित रिपोर्टिंग और फाइलिंग दायित्वों से राहत भी शामिल हो सकती है. हालांकि इन फंडों को नए निवेश योजनाएं शुरू करने की अनुमति नहीं होगी और सभी देनदारियों के निपटारे तथा पंजीकरण सरेंडर होने तक वे नियामकीय निगरानी में बने रहेंगे.

उद्योग जगत ने किया स्वागत

बाजार विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिभागियों ने सेबी के इस कदम का स्वागत किया है. उनका मानना है कि यह AIFs को अधिक व्यावहारिक और सुगम एग्जिट तंत्र उपलब्ध कराएगा, साथ ही निवेशकों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा. विशेषज्ञों के अनुसार इस बदलाव से उन फंडों की प्रशासनिक लागत भी घटेगी, जो सक्रिय परिचालन बंद कर चुके हैं लेकिन लंबित दायित्वों के कारण पंजीकृत बने हुए हैं.

निवेश प्रबंधन उद्योग में कारोबार सुगमता बढ़ाने की दिशा में कदम

ताजा सुधार भारत के निवेश प्रबंधन उद्योग में कारोबार सुगमता बढ़ाने और वैकल्पिक निवेश साधनों से जुड़े नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाने की दिशा में सेबी के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं.
 


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