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भारत में क्लीन एनर्जी को मिलेगा बूस्ट, IGRPL को इंडियन बैंक से जुटाए ₹836 करोड़
यह CBG क्षेत्र में किसी एकल बैंक द्वारा अब तक की सबसे बड़ी फंडिंग है और पहली बार बिना कॉरपोरेट गारंटी के इस प्रकार का ऋण मिला है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) और जीपीएस रिन्युएबल्स के संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) आईओसी जीपीएस रिन्युएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (IOC GPS) ने देशभर में 9 कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए इंडियन बैंक से 836 करोड़ रुपये (लगभग 95 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का ऋण प्राप्त किया है. यह फंडिंग कंप्रेस्ड बायोगैस क्षेत्र में किसी एकल बैंक द्वारा दिया गया अब तक का सबसे बड़ा ऋण है. यह पहली बार है जब इस क्षेत्र में पूर्ण रूप से नॉन-रिकोर्स (बिना कॉरपोरेट गारंटी) ऋण मंजूर किया गया है.
इस धन का उपयोग देश के विभिन्न राज्यों हरियाणा (4 परियोजनाएं) , उत्तर प्रदेश (3), छत्तीसगढ़ (1) और आंध्र प्रदेश (1) में CBG संयंत्रों की स्थापना के लिए किया जाएगा. प्रत्येक संयंत्र की दैनिक उत्पादन क्षमता 15 टन CBG होगी और यह धान की पराली को प्रमुख कच्चे माल के रूप में उपयोग करेगा. सभी 9 संयंत्रों के 2026 तक पूरा और चालू होने की उम्मीद है.
देवेन्द्र सिंह सहगल, सीईओ, IGRPL ने इस मौके पर कहा "IGRPL की स्थापना भारत के बायोगैस इन्फ्रास्ट्रक्चर को विस्तार देने और व्यापक अपनाने को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी. यह फंडिंग हमें इस मिशन को तेजी से आगे बढ़ाने की ताकत देती है. पहली बार किसी OMC ज्वाइंट वेंचर को बिना किसी कॉरपोरेट गारंटी के CBG परियोजनाओं के लिए ऋण मिला है, जो IOCL की विश्वसनीयता और इस क्षेत्र की विशाल संभावनाओं को दर्शाता है."
दीपक अग्रवाल, प्रबंध निदेशक, GPSR आर्य (GPS Renewables का एसेट प्लेटफॉर्म) ने कहा "CBG क्षेत्र में यह सबसे बड़ी सिंगल-बैंक फंडिंग है, जो इस क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं की पुष्टि करती है. जैसे-जैसे भारत स्वच्छ ऊर्जा की ओर अग्रसर हो रहा है, हमारा लक्ष्य बायोफ्यूल उत्पादन को बढ़ावा देना और भारत को रिन्युएबल एनर्जी के प्रमुख उत्पादक के रूप में स्थापित करना है. यह फंडिंग IGRPL के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिससे देशभर में CBG संयंत्रों का एक मजबूत नेटवर्क खड़ा कर जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करने में मदद मिलेगी."
यह निवेश भारत के हरित ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक ठोस कदम है, जो किसानों के लिए पराली के प्रबंधन में नया विकल्प प्रदान करता है, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देता है, और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित करेगा.
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