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ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड से FY30 तक 10,000 करोड़ रुपये जुटा सकते हैं शहरी निकाय: ICRA
FY27-FY30 के दौरान शहरी बुनियादी ढांचे के लिए 56 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की जरूरत का अनुमान
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 hours ago
देश के शहरी स्थानीय निकाय वित्त वर्ष 2026-27 से 2029-30 के बीच ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटा सकते हैं. रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, शहरों में बढ़ती बुनियादी ढांचा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूंजी बाजार से फंड जुटाने की भूमिका बढ़ सकती है.
ICRA के मुताबिक, FY27 से FY30 के दौरान शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश की जरूरत 56 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है. इसमें से करीब 3 लाख करोड़ रुपये तक की जरूरत कमर्शियल डेट के जरिए पूरी की जा सकती है. ऐसे में म्युनिसिपल और ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड के लिए संभावनाएं बढ़ सकती हैं.
पानी और कचरा प्रबंधन जैसी परियोजनाओं को मिल सकता है ग्रीन फाइनेंस
जल आपूर्ति, सीवरेज और वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट, ठोस कचरा प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं ग्रीन फाइनेंस के लिए पात्र हो सकती हैं. इससे नगर निकायों के पास ग्रीन बॉन्ड के जरिए फंड जुटाने के लिए परियोजनाओं की एक बड़ी संभावित सूची उपलब्ध हो सकती है.
निवेशकों की ग्रीन बॉन्ड में बढ़ रही दिलचस्पी
अब तक म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए जुटाए गए 6,540 करोड़ रुपये में करीब एक-चौथाई राशि ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए जुटाई गई है. इसके अलावा करीब एक-चौथाई हिस्से को ग्रीन बॉन्ड के रूप में वर्गीकृत किए जाने की संभावना है.
ICRA ने अनुमान लगाया है कि FY2027-FY2030 के दौरान ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड जारी करने की क्षमता करीब 10,000 करोड़ रुपये हो सकती है. हालांकि, नगर निकायों की तैयारी बेहतर होने पर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है.
हाल में जारी किए गए कुछ ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड को इश्यू साइज की तुलना में करीब पांच गुना सब्सक्रिप्शन मिला है. इससे इस तरह के बॉन्ड में निवेशकों की रुचि का संकेत मिलता है. इन बॉन्ड पर सॉवरेन बेंचमार्क की तुलना में 1.90 प्रतिशत अंक तक और राज्य सरकार के बॉन्ड की तुलना में 1.55 प्रतिशत अंक तक अधिक यील्ड भी मिली है.
नगर निकायों की तैयारी बड़ी चुनौती
ICRA के अनुसार, पूंजी बाजार तक नगर निकायों की पहुंच कई कारकों पर निर्भर करेगी. इनमें क्रेडिट क्वालिटी, वित्तीय खुलासे, कर्ज चुकाने की स्पष्टता, परियोजनाओं की तैयारी और बॉन्ड जारी करने से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए तैयारियां शामिल हैं.
रेटिंग एजेंसी का कहना है कि इन शर्तों के कारण उन नगर निकायों की संख्या सीमित हो सकती है जो वास्तव में पूंजी बाजार से बॉन्ड के जरिए फंड जुटाने में सक्षम हैं. यानी शहरी बुनियादी ढांचे के लिए वित्त की जरूरत व्यापक होने के बावजूद सभी नगर निकाय बाजार से पैसा जुटाने की स्थिति में नहीं होंगे.
ICRA के मुताबिक, ग्रीन फाइनेंस के योग्य परियोजनाओं की उपलब्धता बाजार के विस्तार में मुख्य बाधा नहीं है. इसके बजाय नगर निकायों की वित्तीय और संस्थागत तैयारी तथा पूंजी बाजार की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण होगी. रेटिंग एजेंसी ने कहा कि निवेशकों की ओर से म्युनिसिपल ग्रीन फाइनेंस में रुचि बढ़ रही है, जबकि बाजार के विस्तार में पूंजी की उपलब्धता की तुलना में आपूर्ति पक्ष से जुड़ी चुनौतियां बड़ी बाधा बनी हुई हैं.
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