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30 में से 28 देशों ने दिए यूक्रेन युद्ध खत्म करने को लेकर सकारात्मक रुझान : Ipsos

भारत सहित अधिकतर देश अब यूक्रेन युद्ध के अंत की उम्मीद कर रहे हैं, बशर्ते कूटनीतिक प्रयास टिकाऊ और समावेशी बने रहें.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर शांति वार्ताओं में गति आने के साथ ही, इप्सोस (Ipsos) द्वारा किए गए एक वैश्विक सर्वेक्षण में सामने आया है कि अब भारत के 54% नागरिकों को उम्मीद है कि यह युद्ध 2025 में समाप्त हो जाएगा, जो कि छह महीने पहले नवंबर 2024 में 51% थी. यह संकेत है कि भारत में इस मुद्दे पर आशावाद बढ़ा है.

वैश्विक स्तर पर भी बढ़ा विश्वास

इसी तरह का रुझान दुनियाभर के 30 में से 28 देशों में देखने को मिला, जहाँ नागरिकों में यूक्रेन युद्ध के समाप्त होने को लेकर आशा बढ़ी है. इनमें कुछ प्रमुख देशों के आंकड़े इस प्रकार हैं:

1. इंडोनेशिया: अप्रैल 2025 में 63%, नवंबर 2024 में 56%
2. थाईलैंड: अप्रैल 2025 में 51%, नवंबर 2024 में 36%
3. इटली: अप्रैल 2025 में 45%, नवंबर 2024 में 23%
4. दक्षिण कोरिया: अप्रैल 2025 में 44%, नवंबर 2024 में 29%

हालांकि मलेशिया (48%) और स्वीडन (22%) जैसे दो देशों में इस विषय पर लोगों की राय में कोई बदलाव नहीं देखा गया है.

लंबे समय से चल रहा है युद्ध

यूक्रेन युद्ध अब अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और इसकी लंबी अवधि ने दुनियाभर के नागरिकों को प्रभावित किया है. युद्ध की जटिलता और इसके मानवीय प्रभावों के चलते नागरिक अब शांति की दिशा में किसी भी सकारात्मक संकेत को गंभीरता से ले रहे हैं.

डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका बनी चर्चा का विषय

इप्सोस इंडिया CSR और ESG कॉरपोरेट रेप्युटेशन, पब्लिक अफेयर्स की ग्रुप सर्विस लाइन लीडर परिजात चक्रवर्ती ने बताया "अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने को प्रमुख प्राथमिकता बताया था. ट्रंप ने यूक्रेन और रूस के बीच तुर्की में शांति वार्ताओं को शुरू करवाने में पहल की है, और युद्धबंदियों की अदला-बदली भी हो चुकी है." उन्होंने आगे कहा "भारत सहित दुनियाभर में नागरिक अब इस युद्ध के 2025 में समाप्त होने को लेकर पहले से ज्यादा आशावान हैं. हालांकि यूरोपीय संघ और यूके द्वारा रूस पर नएप्रतिबंध, पोप लियो XIV की मध्यस्थता की कोशिशें, और ट्रंप की रुचि में संभावित कमी जैसी घटनाएं युद्ध की स्थिति को अभी भी अनिश्चित बनाए हुए हैं."

सैन्य हस्तक्षेप के खिलाफ हैं नागरिक

इस सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि भारत और अन्य देशों के नागरिक अपने देश की सैन्य रूप से युद्ध में भागीदारी के खिलाफ हैं. लोगों का रुझान स्पष्ट रूप से कूटनीतिक और शांतिपूर्ण समाधान की ओर है, न कि सैन्य कार्रवाई की ओर है.

संकट क्षेत्र

युद्ध अपने तीसरे वर्ष में है और सर्वेक्षण से पता चलता है कि 10 में से 7 भारतीय (72%) और सर्वेक्षण में शामिल विभिन्न बाजारों के नागरिक चाहते हैं कि उनका देश यूक्रेन में चल रहे संघर्ष में सैन्य रूप से शामिल होने से बचे. जबकि 70% वैश्विक नागरिकों ने इस विचार का समर्थन किया, प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी के खिलाफ जनभावना हंगरी (87%), थाईलैंड (84%), मलेशिया (83%), तुर्किये (82%) और सिंगापुर (82%) में अधिक स्पष्ट रूप से देखी गई पश्चिमी और उत्तरी यूरोप में यह भावना अपेक्षाकृत कम देखने को मिली कि उनका देश सैन्य रूप से शामिल नहीं होना चाहिए. अगर किसी संप्रभु देश पर किसी अन्य देश द्वारा हमला किया जाता है, तो कम से कम 72% भारतीय और 65% वैश्विक नागरिक मानते हैं कि ऐसे देशों को उनके देश द्वारा समर्थन दिया जाना चाहिए.

सर्वेक्षण की पृष्ठभूमि

ये परिणाम इप्सोस द्वारा किए गए 29 देशों के एक सर्वेक्षण के हैं, 21 मार्च से 4 अप्रैल 2025 के बीच किया गया था. इस सर्वेक्षण के लिए इप्सोस ने भारत में 18 वर्ष और उससे अधिक आयु, कनाडा, रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, और संयुक्त राज्य अमेरिका में 18-74 आयु वर्ग, थाईलैंड में 20-74, इंडोनेशिया और सिंगापुर में 21-74, और अन्य सभी देशों में 16-74 आयु वर्ग के कुल 23,216 वयस्कों का साक्षात्कार लिया. 

इप्सोस का यह सर्वेक्षण वैश्विक नागरिक चेतना में आ रहे बदलाव की ओर संकेत करता है. यूक्रेन युद्ध जैसे लंबे संघर्षों में जब शांति की हल्की सी भी उम्मीद दिखती है, तो यह दुनिया भर में आशा की लहर ले आती है.
 


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