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क्रिटिकल मिनरल्स में चीन की पकड़ बरकरार, भारत-अमेरिका समझौते के सामने बड़ी चुनौती: रिपोर्ट

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-अमेरिका समझौते की सफलता केवल आयात बदलने पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि भरोसेमंद सप्लाई चेन के जरिए रिफाइनिंग, प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने पर ज्यादा फोकस करना होगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 hours ago

भारत और अमेरिका ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए बड़ा समझौता किया है. इसका मकसद सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, क्लीन एनर्जी और डिफेंस सेक्टर के लिए जरूरी खनिजों की सुरक्षित सप्लाई सुनिश्चित करना है. हालांकि, एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत अब भी कई अहम मिनरल्स और बैटरी सप्लाई चेन के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर है. रेयर अर्थ मेटल्स, परमानेंट मैग्नेट्स और लिथियम-आयन बैटरियों में चीन की मजबूत पकड़ भारत के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है.

भारत-अमेरिका के बीच हुआ बड़ा समझौता

Rubix Data Sciences की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और अमेरिका ने 26 मई को क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स पर द्विपक्षीय फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते का उद्देश्य माइनिंग, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और निवेश के जरिए सप्लाई चेन को मजबूत करना है. यह डील खास तौर पर सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, क्लीन एनर्जी और रक्षा तकनीकों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

चीन पर अब भी भारी निर्भरता

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन अब भी कुछ चुनिंदा देशों पर केंद्रित है, जिसमें चीन सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के रेयर अर्थ मेटल्स आयात में चीन की हिस्सेदारी 68 प्रतिशत रही. वहीं देश में आयात किए गए 78 प्रतिशत परमानेंट मैग्नेट्स भी चीन से आए. इसके अलावा लिथियम कार्बोनेट आयात में चीन की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत रही, जो बैटरी और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर के लिए बेहद अहम कच्चा माल माना जाता है.

क्रिटिकल मिनरल्स आयात में बढ़ोतरी

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का चयनित क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ प्रोडक्ट्स का आयात वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 6.45 प्रतिशत बढ़कर 521.75 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया. एक साल पहले यह आंकड़ा 490.12 मिलियन डॉलर था. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से एनर्जी ट्रांजिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी बढ़ती मांग की वजह से हुई.

अमेरिका की हिस्सेदारी अब भी सीमित

डेटा के अनुसार, अमेरिका अभी ज्यादातर श्रेणियों में भारत का छोटा सप्लायर बना हुआ है. रेयर अर्थ कंपाउंड्स, ग्रेफाइट और जर्मेनियम जैसे उत्पादों में भारत के आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी केवल 1 से 3 प्रतिशत के बीच रही. हालांकि लिथियम कार्बोनेट में अमेरिका की स्थिति कुछ बेहतर दिखी, जहां उसकी हिस्सेदारी 14 प्रतिशत रही. इसके बावजूद चीन इस क्षेत्र में सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है.

दूसरे देशों से भी बढ़ रही सप्लाई

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जापान, दक्षिण कोरिया, अर्जेंटीना, तंजानिया और बेल्जियम जैसे देशों से भी सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के रेयर अर्थ कंपाउंड्स आयात में जापान की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत रही. वहीं अर्जेंटीना ने लिथियम हाइड्रॉक्साइड आयात में 33 प्रतिशत योगदान दिया. प्राकृतिक ग्रेफाइट के मामले में तंजानिया और मेडागास्कर ने मिलकर 60 प्रतिशत से ज्यादा सप्लाई दी.

लिथियम-आयन बैटरी में चीन की मजबूत पकड़

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी लिथियम-आयन बैटरियों के मामले में चीन पर निर्भरता है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल लिथियम-आयन बैटरी आयात में चीन की हिस्सेदारी 84 प्रतिशत से ज्यादा रही. रिपोर्ट के मुताबिक चीन केवल कच्चे माल ही नहीं, बल्कि प्रोसेस्ड कंपोनेंट्स और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में भी मजबूत स्थिति में है.

परमानेंट मैग्नेट्स आयात सबसे ज्यादा

रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक मोटर्स और रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजी में इस्तेमाल होने वाले परमानेंट मैग्नेट्स का आयात बढ़कर 221.66 मिलियन डॉलर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 206.26 मिलियन डॉलर था.

वहीं, जर्मेनियम और अन्य रणनीतिक धातुओं का आयात बढ़कर 87.68 मिलियन डॉलर हो गया. रेयर अर्थ कंपाउंड्स का आयात भी दोगुने से ज्यादा बढ़कर 23.03 मिलियन डॉलर पहुंच गया.

लंबी अवधि की रणनीति पर रहेगा फोकस

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-अमेरिका समझौते की सफलता केवल आयात बदलने पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि भरोसेमंद सप्लाई चेन के जरिए रिफाइनिंग, प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने पर ज्यादा फोकस करना होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत को घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने की जरूरत होगी.
 


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