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CPI बास्केट में बदलाव से बदली उपभोग की तस्वीर, सेवाओं का बढ़ा हिस्सा: रिपोर्ट
एसबीआई रिसर्च का कहना है कि संशोधित CPI बास्केट भारत के बदलते उपभोग ढांचे को बेहतर तरीके से दर्शाती है, जबकि महंगाई की व्यापक दिशा में बड़े बदलाव की संभावना फिलहाल कम दिखाई देती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की संशोधित बास्केट से देश में बदलते उपभोग पैटर्न की झलक मिलती है. एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार नई CPI बास्केट में खाद्य पदार्थों का हिस्सा घटा है, जबकि सेवाओं से जुड़े खर्च का महत्व बढ़ता दिखाई दे रहा है. हालांकि इन बदलावों के बावजूद महंगाई की कुल दिशा में बड़ा बदलाव आने की संभावना कम बताई गई है.
रिपोर्ट के मुताबिक 2024 को आधार वर्ष मानकर तैयार की गई नई CPI संरचना देश में बदलती खपत की आदतों को दर्शाती है. जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आय स्तर में सुधार हो रहा है, लोगों का खर्च अलग-अलग श्रेणियों में बंट रहा है.
खाने-पीने की चीजों का घटा हिस्सा
रिपोर्ट के अनुसार नई CPI बास्केट में खाद्य और पेय पदार्थों का हिस्सा घटकर 36.75 प्रतिशत रह गया है, जो पहले 45.86 प्रतिशत था. इसका मतलब है कि परिवारों के कुल खर्च में भोजन पर होने वाला हिस्सा धीरे-धीरे कम हो रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि आय बढ़ने के साथ लोग अपनी आय का बड़ा हिस्सा अब अन्य चीजों और सेवाओं पर खर्च करने लगे हैं.
सेवाओं की हिस्सेदारी बढ़ी
नई CPI बास्केट में कई सेवाओं से जुड़े घटकों का हिस्सा बढ़ा है. इससे यह संकेत मिलता है कि उपभोक्ता खर्च में सेवाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक संशोधित CPI बास्केट में अब कुल 358 वेटेड आइटम शामिल किए गए हैं, जबकि पहले यह संख्या 299 थी. इसमें वस्तुओं (गुड्स) की संख्या 259 से बढ़कर 314 हो गई है, जबकि सेवाओं से जुड़े आइटम 40 से बढ़कर 50 हो गए हैं.
महंगाई के आंकड़ों का दायरा भी बढ़ा
नई CPI व्यवस्था में कीमतों का डेटा जुटाने के दायरे को भी बढ़ाया गया है. संशोधित प्रणाली के तहत अब देश के 434 शहरों में 1,465 ग्रामीण बाजारों और 1,395 शहरी बाजारों से कीमतों का डेटा इकट्ठा किया जाएगा. इससे महंगाई सूचकांक को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद है.
महंगाई की दिशा में बड़ा बदलाव नहीं
हालांकि बास्केट की संरचना और कवरेज में बदलाव के बावजूद रिपोर्ट के अनुसार महंगाई के समग्र रुझान में बड़ा बदलाव आने की संभावना कम है. विश्लेषण के मुताबिक यदि मौजूदा CPI ढांचे में नई वेटेज लागू की जाए तो औसतन हेडलाइन महंगाई दर में लगभग 20 से 30 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि जब खाद्य महंगाई अधिक होती है, तब नई CPI बास्केट के कारण महंगाई के आंकड़े 20 से 30 बेसिस पॉइंट तक कम भी दिखाई दे सकते हैं, क्योंकि इसमें खाद्य वस्तुओं का हिस्सा पहले की तुलना में कम रखा गया है.
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