BW Disrupt: Meta के MD, India ने स्टार्टअप को दिए टिप्स, बताया 27 महीने में क्या बदला

डॉक्टर अनुराग बत्रा के इस सवाल पर कि पिछले 27 महीने में भारत में क्या-क्या बदलाव हुआ का जवाब देते हुए अजीत मोहन ने तीन बदलाव बताए.

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Thursday, 15 September, 2022
Anurag Batra Ajit Mohan

नई दिल्ली: India's Top 30 Disruptors Under the age of 30 इवेंट के आखिरी सेशन में Meta, India के Managing Director & Vice President अजीत मोहन ने BW Business World के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ और एक्सचेंज4मीडिया के फाउंडर डॉक्टर अनुराग बत्रा के साथ कन्वर्सेशन के दौरान कई बड़ी बातें बताईं.

27 महीने में क्या कुछ बदला
अजीत मोहन ही वे शख्स हैं, जो अपनी जबर्दस्त स्ट्रैटजी के तहत मेटा के बिजनेस को भारत में काफी आगे तक ले गए. डॉक्टर अनुराग बत्रा के इस सवाल पर कि पिछले 27 महीने में भारत में क्या-क्या बदलाव हुआ का जवाब देते हुए अजीत मोहन ने तीन बदलाव बताए. उन्होंने कहा, "सबसे पहला बदलाव तो ये आया कि अब लोग ज्यादा ऑनलाइन रहने लगे हैं. लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, भारत में करीब 800 MN लोग डेली ऑनलाइन रहते हैं."

दूसरा बदलाव
दूसरे बदलाव के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "लोगों के व्यवहार में एक आदर्श बदलाव हो चुका है. हम अब ज्यादा डिजिटल हो चुके हैं. ऑफलाइन से ऑनलाइन में शिफ्ट हो चुके हैं. 27 महीने पहले हम ऑनलाइन इतना ज्यादा डिपेंड नहीं थे. ये इंटरनेट मार्केट के लिए अच्छा है."

तीसरा बदलाव
तीसरे बदलाव के बारे में बताते हुए अजीत मोहन के कहा, "उद्यमियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. लगभग सभी सेक्टर्स में स्टार्टअप्स की शुरुआत हुई है, जिसमें आज कई सफल हैं."

स्टार्टअप को टिप्स
BW Disrupt के इस इवेंट में कई स्टार्टअप्स के फाउंडर भी मौजूद थे. उन सभी को टिप्स देते हुए Meta के Managing Director & Vice President, India अजीत मोहन ने कहा, "आप कोई भी प्रोडक्ट लॉन्च करें तो सबसे पहले उसके बारे में लोकल स्तर पर सोचें. फिर उसके बाद धीरे-धीरे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विस्तार के बारे में सोचें. इससे मार्केट में पैठ बनाने में मदद मिलेगी."

Meta करती है मदद
उन्होंने कहा. "अभी कई स्टार्टअप हैं जो आने के साथ ही दुनिया में छा जाना चाहते हैं. यह सोच तो बहुत अच्छी है और हमारी कंपनी Meta इसमें उनकी मदद भी कर रही है. इससे कंपनी का विजन बड़ा दिखता है, लेकिन प्रोडक्ट के बारे में सबसे पहले लोकल लेवल पर सोचना चाहिए."

उन्होंने सभी नए उद्यमियों से कहा कि आप अपने काम, प्रोडक्ट और इनोवेशन पर पूरा ध्यान दीजिए. उसपर एनर्जी लगाइए. उसका रिजल्ट आपको जरूर मिलेगा.
 


अप्रैल में भारत की इकोनॉमी को रफ्तार, कॉम्पोजिट PMI 58.3 पर पहुंचा; मैन्युफैक्चरिंग में जोरदार उछाल

अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया. मैन्युफैक्चरिंग PMI बढ़कर 55.9 पर पहुंच गया, जो मार्च में 53.9 था. वहीं सर्विस PMI भी बढ़कर 57.9 हो गया, जो पहले 57.5 था.

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Thursday, 23 April, 2026
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नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत संकेत दिए हैं. अप्रैल 2026 में प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में तेजी दर्ज की गई है और कॉम्पोजिट PMI बढ़कर 58.3 पर पहुंच गया है. बढ़ती मांग, नए ऑर्डर और उत्पादन में इजाफे ने इस ग्रोथ को सपोर्ट किया है, जिससे आर्थिक गतिविधियों में मजबूती साफ दिखाई दे रही है.

प्राइवेट सेक्टर में तेज़ी के संकेत

HSBC फ्लैश इंडिया कॉम्पोजिट PMI आउटपुट इंडेक्स अप्रैल में 58.3 रहा, जो मार्च में 57.0 था. यह डेटा S&P Global द्वारा जारी किया गया है. PMI का 50 से ऊपर रहना आर्थिक गतिविधियों में विस्तार को दर्शाता है. मौजूदा स्तर लंबे समय के औसत से ऊपर है, जो मजबूत बिजनेस ग्रोथ का संकेत देता है.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना ग्रोथ का इंजन

अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया. मैन्युफैक्चरिंग PMI बढ़कर 55.9 पर पहुंच गया, जो मार्च में 53.9 था. वहीं सर्विस PMI भी बढ़कर 57.9 हो गया, जो पहले 57.5 था. हालांकि सर्विस सेक्टर में भी बढ़त जारी रही, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार ज्यादा तेज रही, जिसने कुल ग्रोथ को आगे बढ़ाया. 

आउटपुट और नए ऑर्डर में उछाल

HSBC की चीफ इंडिया इकॉनमिस्ट प्रांजुल भंडारी के अनुसार, मार्च में पश्चिम एशिया तनाव से आई रुकावट के बाद अब बिजनेस गतिविधियों में फिर तेजी आई है. कंपनियों को नए ऑर्डर तेजी से मिल रहे हैं और उत्पादन भी बढ़ा है. सप्लाई चेन से जुड़े जोखिमों को देखते हुए कंपनियां कच्चे माल और तैयार उत्पाद का स्टॉक भी बढ़ा रही हैं.

लागत दबाव बरकरार, कीमतों में बढ़ोतरी

हालांकि मांग मजबूत है, लेकिन कंपनियों पर लागत का दबाव अभी भी बना हुआ है. इस दबाव का कुछ हिस्सा कंपनियों ने कीमतें बढ़ाकर ग्राहकों पर डाला है.

रोजगार में तेज बढ़त

अप्रैल में प्राइवेट सेक्टर में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़े हैं. यह पिछले 10 महीनों की सबसे तेज वृद्धि मानी जा रही है. इसका कारण बिजनेस विस्तार योजनाएं, बढ़ती मांग, भविष्य को लेकर सकारात्मक नजरिया है. 

आगे का आउटलुक कैसा?

कंपनियां आने वाले 12 महीनों को लेकर आशावादी बनी हुई हैं. हालांकि मार्च के मुकाबले भरोसे में हल्की कमी आई है, लेकिन यह अभी भी पिछले 18 महीनों के दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर है.

अप्रैल के PMI आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत मांग और उत्पादन के दम पर नई रफ्तार पकड़ रही है. खासकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती आने वाले महीनों में ग्रोथ को और गति दे सकती है.
 


1 मई से बदल जाएगा ऑनलाइन गेमिंग का नियम, सरकार ने लागू किया नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क

नए नियमों के तहत गेम्स का अनिवार्य पूर्व-पंजीकरण समाप्त कर दिया गया है. हालांकि शर्त यह है कि कोई भी गेमिंग प्लेटफॉर्म ऐसी सेवाएं न दे जिससे यूजर्स या बच्चों को किसी तरह का नुकसान हो.

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Thursday, 23 April, 2026
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भारत में ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है. केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग को बढ़ावा देने और नियंत्रित करने के लिए बनाए गए नए कानून के तहत प्रशासनिक नियमों को अधिसूचित कर दिया है. ये नियम 1 मई 2026 से लागू होंगे. इसके तहत अब गेमिंग कंपनियों को यूजर्स की सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदार गेमिंग सुनिश्चित करने के लिए सख्त मानकों का पालन करना होगा.

सरकार ने जारी किए नए नियम

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब सभी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसे सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे जो वित्तीय, मानसिक, सामाजिक और सामग्री संबंधी नुकसान से उपयोगकर्ताओं की रक्षा कर सकें. नए नियमों का उद्देश्य जिम्मेदार गेमिंग को बढ़ावा देना और यूजर्स, खासकर बच्चों को किसी भी तरह के जोखिम से बचाना है.

ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी का गठन

सरकार ने इस सेक्टर को रेगुलेट करने के लिए ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण का गठन किया है. इसमें कुल छह सदस्य होंगे.

इसमें शामिल होंगे:

- आईटी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (अध्यक्ष)
- गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव
- वित्तीय सेवा विभाग के अधिकारी
- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी
- युवा मामले और खेल मंत्रालय के अधिकारी
- विधि विभाग के अधिकारी

पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव

नए नियमों के तहत गेम्स का अनिवार्य पूर्व-पंजीकरण समाप्त कर दिया गया है. हालांकि शर्त यह है कि कोई भी गेमिंग प्लेटफॉर्म ऐसी सेवाएं न दे जिससे यूजर्स या बच्चों को किसी तरह का नुकसान हो. साथ ही सभी ई-स्पोर्ट्स को अब अनिवार्य रूप से प्राधिकरण में रजिस्टर करना होगा.

शिकायत निवारण तंत्र अनिवार्य

सभी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली बनानी होगी, ताकि यूजर्स की समस्याओं का समय पर समाधान किया जा सके.

यह व्यवस्था हर गेमिंग कंपनी के लिए अनिवार्य होगी और इसे सक्रिय रूप से संचालित करना होगा.

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## **सरकार का रुख: सख्ती कम, सुरक्षा ज्यादा**

आईटी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा है कि सरकार ऑनलाइन गेमिंग को जरूरत से ज्यादा रेगुलेट नहीं करना चाहती, लेकिन यूजर्स की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है.

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## **निष्कर्ष**

1 मई से लागू होने वाले ये नए नियम भारत के ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं. इससे जहां इंडस्ट्री को स्पष्ट गाइडलाइन मिलेगी, वहीं यूजर्स की सुरक्षा भी मजबूत होगी.
 


जियो फाइनेंशियल और एलियांज का बड़ा करार, भारत में बनेगा 50:50 बीमा जॉइंट वेंचर

कंपनियों के संयुक्त बयान के अनुसार, इस प्रस्तावित उद्यम की घोषणा पहली बार जुलाई 2025 में की गई थी. यह जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के डिजिटल प्लेटफॉर्म और व्यापक वितरण नेटवर्क को एलियांज की वैश्विक बीमा विशेषज्ञता के साथ जोड़ेगा.

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Thursday, 23 April, 2026
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जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और जर्मनी की एलियांज ने भारत में 50:50 हिस्सेदारी के साथ एक प्राथमिक बीमा संयुक्त उद्यम बनाने के लिए बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह पहल देश के तेजी से बढ़ते सामान्य और स्वास्थ्य बीमा बाजार को लक्ष्य बनाएगी.

डिजिटल ताकत और वैश्विक विशेषज्ञता का संगम

कंपनियों के संयुक्त बयान के अनुसार, इस प्रस्तावित उद्यम की घोषणा पहली बार जुलाई 2025 में की गई थी. यह जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के डिजिटल प्लेटफॉर्म और व्यापक वितरण नेटवर्क को एलियांज की वैश्विक बीमा विशेषज्ञता के साथ जोड़ेगा. सभी वैधानिक और नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद इस संयुक्त उद्यम का संचालन शुरू होगा.

तकनीक आधारित बीमा उत्पादों पर जोर

दोनों साझेदारों ने बताया कि यह उद्यम व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए व्यापक और तकनीक-आधारित बीमा उत्पाद उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखेगा. यह पहल भारत के “2047 तक सभी के लिए बीमा” के नीति लक्ष्य के अनुरूप होगी.

भारत में बीमा क्षेत्र की बड़ी संभावनाएं

भारत दुनिया की उन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है जहां बीमा कवरेज अभी भी कम है. हालांकि, बढ़ती आय, डिजिटल अपनाने और सरकारी नीतियों के समर्थन से बीमा की मांग में तेज वृद्धि देखी जा रही है.

जीवन बीमा क्षेत्र में भी विस्तार की तैयारी

कंपनियों ने यह भी संकेत दिया कि वे भारत के जीवन बीमा क्षेत्र में प्रवेश के लिए एक अलग बाध्यकारी समझौते पर काम कर रही हैं. जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन मुकेश डी. अंबानी ने कहा कि यह साझेदारी समूह के उस सिद्धांत को दर्शाती है जिसमें आवश्यक सेवाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाता है.

उन्होंने कहा कि जियो की डिजिटल पहुंच और एलियांज की वैश्विक विशेषज्ञता का संयोजन बेहद प्रभावशाली है और इसका उद्देश्य पूरे देश में सस्ते और आसान बीमा उत्पाद उपलब्ध कराना होगा.

एलियांज की दीर्घकालिक रणनीति

एलियांज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओलिवर बाटे ने कहा कि कंपनी, जो वर्ष 2000 से भारत में सक्रिय है, इस साझेदारी को सुरक्षा सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता मजबूत करने के अवसर के रूप में देखती है. उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत के लिए एक अधिक सुरक्षित और वित्तीय रूप से मजबूत भविष्य बनाने में मदद करेगी.

वैश्विक निवेशकों की बढ़ती रुचि

भारत का बीमा क्षेत्र वैश्विक बीमा कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है. नियामकीय सुधार और डिजिटल वितरण के विस्तार से दुनिया के सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश में नए विकास अवसर खुल रहे हैं.


टेक महिंद्रा का चौथी तिमाही मुनाफा 16% बढ़ा, 36 रुपये प्रति शेयर अंतिम डिविडेंड घोषित

कंपनी के अनुसार, चौथी तिमाही में शुद्ध लाभ बढ़कर 1,354 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, राजस्व सालाना आधार पर 7.2 प्रतिशत बढ़कर 56,815 करोड़ रुपये रहा.

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Thursday, 23 April, 2026
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टेक महिंद्रा ने मार्च 2026 तिमाही के लिए अपने समेकित शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है. मजबूत डील जीत और मार्जिन में सुधार के चलते कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहा. साथ ही, कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 36 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है.

मुनाफा और राजस्व में बढ़ोतरी

कंपनी के अनुसार, चौथी तिमाही में शुद्ध लाभ बढ़कर 1,354 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, राजस्व सालाना आधार पर 7.2 प्रतिशत बढ़कर 56,815 करोड़ रुपये रहा. ब्याज और कर से पहले की आय (EBIT) में 39.2 प्रतिशत की तेज वृद्धि हुई और यह 7,152 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.

पूरे साल का प्रदर्शन भी मजबूत

पूरे वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का कर पश्चात लाभ 13.2 प्रतिशत बढ़कर 4,811 करोड़ रुपये हो गया.

डील विन में बड़ी छलांग

चौथी तिमाही में कंपनी की नई डील्स का कुल मूल्य 1.096 अरब डॉलर रहा, जो सालाना आधार पर 47 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 34.3 प्रतिशत अधिक है.

एआई आधारित रणनीति पर जोर

टेक महिंद्रा के सीईओ और प्रबंध निदेशक मोहित जोशी ने कहा कि कंपनी तेजी से एआई-आधारित संगठन बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि सेवाओं में एआई को शामिल करते हुए ग्राहकों के लिए बेहतर वैल्यू देने पर फोकस किया जा रहा है और कंपनी वित्त वर्ष 2027 के लक्ष्यों को हासिल करने की राह पर है.

मार्जिन में लगातार सुधार

मुख्य वित्तीय अधिकारी रोहित आनंद ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 कंपनी के स्थिरीकरण चरण का अंत रहा. चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद लगातार 10वीं तिमाही में मार्जिन में सुधार दर्ज किया गया. उन्होंने कहा कि पूरे साल में कुल 51 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया गया, जो कंपनी के इतिहास में सबसे अधिक है.

कर्मचारियों की संख्या में कमी

मार्च के अंत तक कंपनी का कुल हेडकाउंट 1,47,623 रहा, जो एक साल पहले की तुलना में 1,108 कम है. तिमाही आधार पर कर्मचारियों की संख्या में 1.3 प्रतिशत की गिरावट आई. पिछले 12 महीनों में आईटी सेवाओं में एट्रिशन दर घटकर 12.1 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही में 12.3 प्रतिशत थी.

नकदी स्थिति मजबूत

तिमाही के अंत में कंपनी के पास 8,456 करोड़ रुपये की नकदी और नकदी समकक्ष उपलब्ध थे. ब्रोकरेज फर्म इक्विरस रिसर्च के अनुसार, टेक महिंद्रा का चौथी तिमाही का प्रदर्शन अपेक्षाओं के अनुरूप रहा. हालांकि, उन्होंने मांग के रुझान, विकास रणनीति और मार्जिन को लेकर प्रबंधन से और स्पष्टता का इंतजार जताया.

शेयर में गिरावट

परिणाम घोषित होने के बाद दोपहर के कारोबार में टेक महिंद्रा का शेयर 2.5 प्रतिशत गिरकर 1,463.30 रुपये पर कारोबार करता देखा गया.


महाराष्ट्र में 2.56 लाख करोड़ का मेगा निवेश, 1 लाख से ज्यादा नौकरियों का रास्ता खुला

इन प्रोजेक्ट्स से MSME को भी बड़ा लाभ मिलेगा. साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए रोजगार क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा.

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Thursday, 23 April, 2026
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महाराष्ट्र की औद्योगिक तस्वीर तेजी से बदलने वाली है. राज्य सरकार ने एक साथ 2.56 लाख करोड़ रुपये के बड़े निवेश वाले 18 औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं के पूरा होने पर राज्य में 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है. यह फैसला न सिर्फ औद्योगिक विकास को गति देगा, बल्कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगा.

सरकार की बैठक में बड़ा फैसला

देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई उद्योग, ऊर्जा, श्रम और खनन से जुड़ी कैबिनेट उप-समिति की 14वीं बैठक में इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई. बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उद्योग मंत्री उदय सामंत और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. सरकारी बयान के अनुसार इन प्रोजेक्ट्स में कुल ₹2,56,137.01 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है.

किन सेक्टर्स में होगा निवेश?

यह निवेश कई रणनीतिक और हाई-टेक क्षेत्रों में किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:

1. सोलर सेल और सोलर मॉड्यूल
2. ग्रीन स्टील और ग्रीन अमोनिया
3. इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल
4. लिथियम-आयन बैटरी
5. स्पेस और डिफेंस टेक्नोलॉजी
6. गैस-टू-केमिकल्स इंडस्ट्री

सरकार का लक्ष्य इन सेक्टर्स के जरिए राज्य को इंडस्ट्रियल हब के रूप में और मजबूत करना है.

कई बड़ी कंपनियां करेंगी निवेश

इस मेगा प्लान के तहत देश-विदेश की कई बड़ी कंपनियां महाराष्ट्र में भारी निवेश करेंगी.

1. Virtuoso Compressors (नासिक): ₹800 करोड़, 500 नौकरियां
2. Tembo Defence (अमरावती): ₹1,000 करोड़
3. Jabil Circuit (पुणे): ₹1,500 करोड़, 3,000 नौकरियां
4. Ashok Leyland (भंडारा): ₹10,000 करोड़
5. ACME Cleantech (नागपुर व रायगढ़): ₹22,400 करोड़ से अधिक
6. Solar Defence and Aerospace (नागपुर): ₹12,780 करोड़
7. Godavari New Energy (छत्रपति संभाजीनगर): ₹27,515 करोड़
8. Rashmi Metallurgical Industries (गढ़चिरोली): ₹40,000 करोड़, 20,000 नौकरियां
9. Essar Exploration and Production (रायगढ़): ₹56,852 करोड़, 25,000 नौकरियां

रोजगार और स्थानीय विकास पर जोर

सरकारी अनुमान के अनुसार इन परियोजनाओं से 1 लाख से अधिक नौकरियां पैदा होंगी. इनमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोजगार शामिल हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निवेश कोंकण, विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को तेज करेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा.

MSME और स्किल डेवलपमेंट को फायदा

इन प्रोजेक्ट्स से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को भी बड़ा लाभ मिलेगा. साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए रोजगार क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा.

महाराष्ट्र का यह मेगा निवेश पैकेज राज्य को औद्योगिक विकास के नए स्तर पर ले जाने की क्षमता रखता है. सरकार का दावा है कि यह कदम न सिर्फ निवेश को आकर्षित करेगा, बल्कि रोजगार और क्षेत्रीय विकास की गति को भी कई गुना बढ़ा देगा.
 


RBI का बड़ा प्रस्ताव: डिजिटल वॉलेट में ₹2 लाख तक की लिमिट तय

ड्राफ्ट के अनुसार जनरल पर्पज PPI (जैसे ई-वॉलेट) में किसी भी समय अधिकतम ₹2 लाख तक ही बैलेंस रखा जा सकेगा. वहीं कैश के जरिए वॉलेट में लोडिंग की सीमा भी तय की गई है.

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Thursday, 23 April, 2026
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डिजिटल पेमेंट सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) यानी डिजिटल वॉलेट और कार्ड्स के नियमों में बड़े बदलाव का ड्राफ्ट जारी किया है. प्रस्ताव के मुताबिक अब किसी भी वॉलेट में ₹2 लाख से ज्यादा बैलेंस रखने की अनुमति नहीं होगी. इस मसौदे पर 22 मई 2026 तक स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे गए हैं.

RBI ने डिजिटल लेनदेन को और सुरक्षित बनाने के लिए PPI फ्रेमवर्क में व्यापक बदलाव की तैयारी की है. PPI ऐसे पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं. जिनमें पहले पैसे लोड किए जाते हैं और फिर उसी बैलेंस का उपयोग खरीदारी या ट्रांजैक्शन के लिए किया जाता है. ड्राफ्ट के अनुसार जनरल पर्पज PPI (जैसे ई-वॉलेट) में किसी भी समय अधिकतम ₹2 लाख तक ही बैलेंस रखा जा सकेगा. वहीं कैश के जरिए वॉलेट में लोडिंग की सीमा भी तय की गई है. अब महीने में ₹10,000 से ज्यादा कैश लोड नहीं किया जा सकेगा.

RBI ने PPI को अलग अलग कैटेगरी में बांटा है. जिनमें जनरल पर्पज, गिफ्ट PPI, ट्रांजिट PPI (मेट्रो/बस कार्ड) और NRI PPI शामिल हैं. प्रस्ताव के मुताबिक.

1. गिफ्ट PPI की अधिकतम सीमा ₹10,000 होगी
2. ट्रांजिट PPI की सीमा ₹3,000 तय की गई है

कौन जारी कर सकेगा PPI?
ड्राफ्ट में कहा गया है कि वे बैंक जिन्हें डेबिट कार्ड जारी करने की अनुमति मिली है. वे RBI के पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम विभाग (DPSS) को सूचना देकर PPI जारी कर सकते हैं. इसके अलावा गैर बैंकिंग कंपनियां भी RBI की मंजूरी के बाद PPI जारी कर सकेंगी. हालांकि गैर बैंकिंग संस्थाओं के लिए न्यूनतम नेटवर्थ ₹5 करोड़ होना जरूरी होगा. और उन्हें अपने वैधानिक ऑडिटर से प्रमाण पत्र भी देना होगा.

सुरक्षा और कस्टमर प्रोटेक्शन पर फोकस
इस नए ड्राफ्ट में ट्रांजैक्शन सिक्योरिटी को मजबूत करने. रिफंड प्रोसेस को स्पष्ट बनाने और शिकायतों के तेजी से निपटारे के लिए भी नियम शामिल किए गए हैं. RBI का कहना है कि इन बदलावों का मकसद डिजिटल पेमेंट सिस्टम को ज्यादा भरोसेमंद और सुरक्षित बनाना है. अब इस ड्राफ्ट पर 22 मई तक इंडस्ट्री से फीडबैक लिया जाएगा. जिसके बाद अंतिम नियम लागू किए जा सकते हैं.
 


एक्सपायरी डे आज: बाजार में बढ़ेगी हलचल, इन स्टॉक्स पर रखें फोकस

बुधवार को BSE सेंसेक्स 756.84 अंक टूटकर 78,516.49 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 भी 198.50 अंक गिरकर 24,378.10 के स्तर पर आ गया.

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Thursday, 23 April, 2026
BWHindia

गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी का माहौल बना हुआ है. पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता और कमजोर ग्लोबल संकेतों के चलते निवेशकों का भरोसा डगमगाया है. पिछले सत्र की तेज गिरावट का असर आज भी जारी है और साप्ताहिक एक्सपायरी के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका है. बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) बीएसई सेंसेक्स 756.84 अंक टूटकर 78,516.49 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 भी 198.50 अंक गिरकर 24,378.10 के स्तर पर आ गया. इस गिरावट का असर गुरुवार की शुरुआत में भी देखने को मिल रहा है.

आईटी शेयरों में भारी बिकवाली
आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला. एचसीएल टेक के शेयर 10% से अधिक टूटे, जिससे कंपनी के मार्केट कैप में करीब 40,000 करोड़ रुपये की कमी आई. वहीं इंफोसिस और टीसीएस में भी लगभग 3% की गिरावट दर्ज की गई.

दिग्गज शेयरों में कमजोरी
महिंद्रा एंड महिंद्रा, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और लार्सन एंड टुब्रो जैसे दिग्गज शेयरों में दबाव रहा. हालांकि हिंदुस्तान यूनिलीवर, एनटीपीसी और अल्ट्राटेक सीमेंट में हल्की खरीदारी देखने को मिली.

मिडकैप-स्मॉलकैप में हल्की बढ़त
आईटी के साथ-साथ फाइनेंशियल सर्विसेज और ऑटो शेयरों में भी गिरावट रही. वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में सीमित बढ़त दर्ज की गई. इस दौरान रुपया भी कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 93.79 पर पहुंच गया.

पश्चिम एशिया तनाव बना मुख्य वजह
गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता प्रमुख कारण रही. सीजफायर बढ़ने के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर की मजबूती ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया, जबकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने कमजोरी को और गहरा किया.

आज साप्ताहिक एक्सपायरी
गुरुवार को साप्ताहिक एक्सपायरी के चलते बाजार में तेज उतार-चढ़ाव संभव है. गिफ्ट निफ्टी के संकेत भी कमजोर शुरुआत की ओर इशारा कर रहे हैं.

इन शेयरों पर रखें नजर

आज इंफोसिस, टाटा कैपिटल, आदित्य बिरला सन लाइफ एएमसी, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस, ब्लूस्टोन ज्वैलरी एंड लाइफस्टाइल, सीआईई ऑटोमोटिव इंडिया, साइएंट, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX), महिंद्रा लॉजिस्टिक्स, स्टर्लिंग एंड विल्सन रिन्यूएबल एनर्जी, टाटा टेलीसर्विसेज (महाराष्ट्र), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी अपने तिमाही नतीजे पेश करेंगी, जिन पर निवेशकों की खास नजर रहेगी.

मंथली डेटा के अनुसार मार्च में रिलायंस जियो ने 32.27 लाख नए सब्सक्राइबर्स जोड़े, जबकि भारती एयरटेल ने 50.94 लाख और वोडा आइडिया ने 1.02 लाख यूजर्स जोड़े, जो सेक्टर में मजबूती का संकेत है. क्वांट म्यूचुअल फंड ने ब्लैकबक में हिस्सेदारी खरीदी, जबकि मुफिन ग्रीन फाइनेंस में खरीद-बिक्री के सौदे हुए. इसके अलावा आज क्रिसिल, हुहतामाकी इंडिया और शेफलर इंडिया एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे, वहीं सेल में एफएंडओ की नई पोजिशन पर रोक रहेगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


2028 तक भारत की ग्रोथ में गिरावट का अनुमान, मूडीज ने जारी की रिपोर्ट

मूडीज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत की जीडीपी ग्रोथ 2025 के अनुमानित 7.5% से घटकर 2026 में 7% और 2027 में 6.5% रह सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 April, 2026
Last Modified:
Wednesday, 22 April, 2026
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वैश्विक रेटिंग एजेंसी Moody’s Investors Service ने अनुमान लगाया है कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि दर में धीरे-धीरे कमी आ सकती है. हालांकि इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा.

2028 तक GDP ग्रोथ में गिरावट का अनुमान

मूडीज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत की जीडीपी ग्रोथ 2025 के अनुमानित 7.5% से घटकर 2026 में 7% और 2027 में 6.5% रह सकती है. आगे चलकर यह 2028 तक घटकर 6.3% तक पहुंचने का अनुमान है. यह संकेत देता है कि उच्च वृद्धि के दौर के बाद अब अर्थव्यवस्था सामान्य स्तर की ओर बढ़ रही है.

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी सुस्ती के संकेत

रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी विकास दर धीमी हो सकती है. इस क्षेत्र की ग्रोथ 2025 में 4.3% से घटकर 2026 में 3.8% और 2027 में 3.6% रहने का अनुमान है.

कमजोर मांग और एक्सपोर्ट ग्रोथ की चुनौती

मूडीज ने कहा कि घरेलू मांग में नरमी और निर्यात वृद्धि में संभावित गिरावट इस सुस्ती के प्रमुख कारण हैं. हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद भारत क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा.

महंगाई में बढ़ोतरी का अनुमान

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में महंगाई दर में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. 2025 में महंगाई 2.2% और 2026 में 4.5% बढ़ने का अनुमान है. इसका कारण वैश्विक स्तर पर कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव बताए गए हैं.

मध्य पूर्व तनाव और वैश्विक जोखिम

मूडीज ने खास तौर पर मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों को प्रमुख जोखिम बताया है. इन कारणों से तेल और अन्य कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. यह स्थिति कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान देखी गई सप्लाई बाधाओं जैसी बताई गई है.

रोजगार पर भी हल्का दबाव

रिपोर्ट के अनुसार भारत में बेरोजगारी दर में भी मामूली बढ़ोतरी हो सकती है. 2025 में बेरोजगारी 6.9% और 2026 में  7% तक जाने का अनुमान है. यह संकेत देता है कि आर्थिक सुस्ती का असर रोजगार सृजन पर भी पड़ सकता है.

कुल मिलाकर, Moody’s Investors Service की रिपोर्ट के अनुसार भारत की विकास दर में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है, लेकिन इसके बावजूद देश वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा. आने वाले वर्षों में वैश्विक अनिश्चितताएं और घरेलू चुनौतियां आर्थिक गति को प्रभावित कर सकती हैं.
 


भारत के कपड़ा निर्यात में 2.1% की बढ़ोतरी, FY26 में ₹3.16 लाख करोड़ के पार पहुंचा कारोबार

कपड़ा निर्यात में सबसे बड़ा योगदान रेडीमेड गारमेंट्स (RMG) का रहा. इस सेगमेंट का निर्यात ₹1,35,427.6 करोड़ से बढ़कर ₹1,39,349.6 करोड़ हो गया, यानी 2.9% की वृद्धि दर्ज की गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 22 April, 2026
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Wednesday, 22 April, 2026
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भारत के कपड़ा निर्यात ने वित्त वर्ष 2025–26 में स्थिर वृद्धि दर्ज की है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल टेक्सटाइल निर्यात (हस्तशिल्प सहित) 2.1% बढ़कर ₹3,16,334.9 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹3,09,859.3 करोड़ था. यह बढ़ोतरी वैश्विक मांग में सुधार और प्रमुख बाजारों में मजबूत प्रदर्शन को दर्शाती है.

रेडीमेड गारमेंट्स बने सबसे बड़े निर्यातक सेगमेंट

कपड़ा निर्यात में सबसे बड़ा योगदान रेडीमेड गारमेंट्स (RMG) का रहा. इस सेगमेंट का निर्यात ₹1,35,427.6 करोड़ से बढ़कर ₹1,39,349.6 करोड़ हो गया, यानी 2.9% की वृद्धि दर्ज की गई. यह लगातार भारतीय टेक्सटाइल उद्योग की सबसे मजबूत कैटेगरी बनी हुई है.

सूती और मैनमेड फाइबर में स्थिर और मजबूत प्रदर्शन

सूती धागा, कपड़े, मेड-अप्स और हैंडलूम उत्पादों का निर्यात लगभग स्थिर रहा और यह ₹1,02,399.7 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष यह ₹1,02,002.8 करोड़ था. वहीं, मैन-मेड यार्न, फैब्रिक्स और मेड-अप्स सेगमेंट में 3.6% की मजबूत वृद्धि देखी गई, जहां निर्यात ₹41,196 करोड़ से बढ़कर ₹42,687.8 करोड़ हो गया.

हैंडिक्राफ्ट्स में सबसे तेज वृद्धि

वैल्यू-एडेड सेगमेंट में हस्तशिल्प (हैंडिक्राफ्ट्स) ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया. हैंडमेड कारपेट्स को छोड़कर इस कैटेगरी का निर्यात 6.1% बढ़कर ₹14,945.5 करोड़ से ₹15,855.1 करोड़ हो गया. यह दर्शाता है कि पारंपरिक भारतीय उत्पादों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है.

120 से ज्यादा देशों में बढ़ा निर्यात

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारत के टेक्सटाइल निर्यात में 120 से अधिक देशों में वृद्धि दर्ज की गई. यह भारत के निर्यात बाजार के तेजी से भौगोलिक विस्तार को दर्शाता है.

प्रमुख बाजारों में मजबूत बढ़त

भारत के कई प्रमुख बाजारों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई. संयुक्त अरब अमीरात में 22.3%, यूनाइटेड किंगडम में 7.8%, जर्मनी में 9.9%, स्पेन में 15.5%, जापान में 20.6%, मिस्र में 38.3%, नाइजीरिया में 21.4%, सेनेगल में 54.4% और सूडान में 205.6% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से बढ़ेंगे अवसर

सरकार का कहना है कि आगामी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ा लाभ मिलेगा. इससे टैरिफ में कमी, बेहतर सप्लाई चेन इंटीग्रेशन और नए बाजारों तक पहुंच आसान होगी. यह टेक्सटाइल, अपैरल, हैंडिक्राफ्ट्स और टेक्निकल टेक्सटाइल्स के लिए नए अवसर पैदा करेगा.

सरकारी योजनाओं से मिला समर्थन

सरकार ने इस सेक्टर को समर्थन देने के लिए कई योजनाओं को जारी रखा है, जिनमें RoSCTL और RoDTEP स्कीम शामिल हैं. इन्हें 31 मार्च 2026 के बाद भी जारी रखने की घोषणा की गई है, जिससे निर्यातकों को लागत में राहत और प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी.

## निष्कर्ष

कुल मिलाकर, भारत का टेक्सटाइल सेक्टर स्थिर लेकिन मजबूत वृद्धि की ओर बढ़ रहा है. वैश्विक बाजारों में विस्तार, नीतिगत समर्थन और वैल्यू-एडेड उत्पादों की बढ़ती मांग के चलते आने वाले समय में इस सेक्टर के और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है.
 


क्या भारत की सबसे शक्तिशाली जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय अपनी कन्विक्शन रेट में हेरफेर करती है?

एजेंसी दावा करती है कि उसकी कन्विक्शन रेट 93.6 प्रतिशत है, वह ₹1.54 लाख करोड़ की जब्त संपत्तियों को संभालती है, और आज तक कभी किसी स्वतंत्र परफॉर्मेंस ऑडिट के दायरे में नहीं आई है. यहां पढ़िए कि जब आप इसके आंकड़ों को बारीकी से देखते हैं तो क्या सामने आता है.

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Published - Wednesday, 22 April, 2026
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Wednesday, 22 April, 2026
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पलक शाह 

भारत की सबसे शक्तिशाली जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की वित्तीय स्थिति और कार्यप्रणाली देश के सबसे बड़े रहस्यों में से एक बनी हुई है.

ED की 2024–25 की वार्षिक रिपोर्ट 93.6 प्रतिशत की कन्विक्शन रेट के साथ शुरू होती है. यह ऐसा आंकड़ा है जो संसद के जवाबों, FATF ब्रीफिंग्स और टीवी डिबेट्स तक पहुंचता है. यह एक सटीक और प्रभावी जांच तंत्र का संकेत देता है.

लेकिन जब आप इसके गणित को देखते हैं, तो तस्वीर बदल जाती है.

ED ने अपने गठन के बाद से PMLA के तहत 1,739 प्रॉसिक्यूशन शिकायतें दाखिल की हैं. इनमें से केवल 47 मामलों में ही अंतिम अदालत का फैसला आया है.

“47”

यानी सिर्फ 47 मामले.

93.6 प्रतिशत का दावा इन्हीं बेहद छोटे हिस्से पर आधारित है, जो कुल मामलों का केवल 2.7 प्रतिशत है. बाकी 97 प्रतिशत मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं और मुख्य आंकड़े में शामिल नहीं किए जाते.

यह असल में कन्विक्शन रेट नहीं है, बल्कि एक ऐसा चयनित आधार है जिससे एक विशेष परिणाम निकल सके. और आज तक कोई स्वतंत्र ऑडिट नहीं है जो आधिकारिक तौर पर इसे चुनौती दे सके.

यहीं सवाल उठता है: क्या ED अपनी कन्विक्शन रेट को “कुक” करती है?

₹1.54 लाख करोड़, जिसका कोई स्वतंत्र हिसाब नहीं

रिपोर्ट का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण दावा सिर्फ कन्विक्शन रेट नहीं है, बल्कि संपत्ति जब्ती का आंकड़ा है.

₹1,54,594 करोड़ की अस्थायी रूप से जब्त संपत्तियां जमीन, इमारतें, कंपनियां, बैंक खाते, जिन्हें अक्सर वर्षों तक फ्रीज रखा जाता है.

FY25 में ही ED ने ₹30,036 करोड़ की संपत्ति जब्त की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 141 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई है.

लेकिन इन संपत्तियों का मूल्यांकन कैसे किया गया? इसका कोई स्वतंत्र सत्यापन नहीं है. न ही CAG ने यह जांचा है कि ये मूल्यांकन सटीक, कम या अधिक दिखाए गए हैं.

यह आंकड़ा खुद एजेंसी द्वारा रिपोर्ट किया गया है और बिना किसी बाहरी जांच के आगे बढ़ता है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि FY25 में ₹5,238 करोड़ का FEMA जुर्माना लगाया गया, लेकिन इसमें से कितना वसूला गया, यह जानकारी नहीं दी गई है.

वह ऑडिटर जो मौजूद ही नहीं है

ED का पूरा बजट भारत की संचित निधि से आता है. संविधान के अनुच्छेद 148–151 और CAG अधिनियम 1971 की धारा 13 के तहत यह पूरी तरह से नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के अधिकार क्षेत्र में आता है.

लेकिन वास्तविकता में CAG केवल प्रशासनिक खर्चों जैसे वेतन, भवन और खरीद का ऑडिट करता है.

ED के संचालन और प्रदर्शन पर आज तक कोई समर्पित परफॉर्मेंस ऑडिट नहीं किया गया है, और न ही ऐसा कोई रिपोर्ट संसद में पेश हुआ है.

आयकर विभाग और कस्टम्स जैसे संस्थानों का ऑडिट हो चुका है, लेकिन ED का नहीं.

2024–25 की 212 पन्नों की रिपोर्ट में CAG का एक भी उल्लेख नहीं है.

वह डिस्क्लेमर जिसे नजरअंदाज कर दिया गया

रिपोर्ट के अंत में एक अहम लाइन दर्ज है.

प्रवर्तन निदेशालय कहता है कि वह दस्तावेज में मौजूद किसी भी तथ्य, त्रुटि, व्याख्या या राय की जिम्मेदारी या जवाबदेही स्वीकार नहीं करता.

यानि: ये हमारे आंकड़े हैं, हम इन्हें सही मानते हैं, लेकिन अगर ये गलत हों तो इसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं है.

एक मजबूत जवाबदेही प्रणाली में यह काम बाहरी ऑडिट करता है, लेकिन यहां यह खाली जगह बनी रहती है.

असल निगरानी क्या है?

ED पर निगरानी पूरी तरह अनुपस्थित नहीं है. अदालतें मामलों की जांच करती हैं, FATF ने 2024 में भारत की सराहना की है, और आंतरिक निगरानी तंत्र भी मौजूद है.

लेकिन ये सभी निगरानी व्यक्तिगत मामलों तक सीमित हैं, पूरी प्रणाली के प्रदर्शन को नहीं आंकते.

स्पष्ट स्थिति

ED भारत की सबसे शक्तिशाली जांच एजेंसियों में से एक है. यह बिना अदालत के फैसले से पहले संपत्तियां जब्त कर सकती है और भारी वित्तीय नियंत्रण रखती है.

लेकिन यह अपनी सफलता खुद तय करती है, अपने आंकड़े खुद सत्यापित करती है, और अपनी रिपोर्ट खुद प्रकाशित करती है, बिना किसी स्वतंत्र ऑडिट के जो इसे चुनौती दे सके.

यही सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या एक पूरी संस्था इतने लंबे समय तक बिना स्वतंत्र जांच के अपनी ही परिभाषित सफलता के आधार पर काम कर सकती है?

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)