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मन या मजबूरी: बजट में नौकरीपेशा पर मेहरबानी दिखा सकती हैं वित्तमंत्री?
मोदी सरकार अगले महीने पूर्ण बजट पेश कर सकती है. फरवरी में वित्त मंत्री ने अंतरिम बजट पेश किया था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
लोकसभा चुनाव बीत गए, भाजपा की सरकार भी बन गई. अब सबकी निगाहें अगले महीने आने वाले बजट पर हैं. इस बार का बजट पिछली बार के बजट से अलग और खास हो सकता है. ऐसा नहीं है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अब महंगाई की मार झेल रही जनता का दुख ज्यादा साफ दिखाई दे रहा है, बल्कि बजट को खास और आकर्षक बनाना उनकी मजबूरी है. दरअसल, लोकसभा चुनाव के नतीजे भाजपा की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे हैं. उसे सहयोगियों के दम पर सरकार बनानी पड़ी है. ऐसे में वित्तमंत्री को सहयोगियों के साथ-साथ अपने बजट में रूठी जनता को भी खुश करना होगा. लिहाजा, माना जा रहा है कि जनता को राहत देने वालीं कुछ घोषणाएं हो सकती हैं.
टैक्सपेयर्स को मिलेगी सौगात!
बजट में महंगाई के मोर्चे पर जनता को कुछ राहत पहुंचाने के प्रावधान किए जा सकते हैं. खासतौर पर मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को वित्तमंत्री खुश कर सकती हैं. निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को वित्तवर्ष 2025 के लिए अंतरिम बजट में इनकम टैक्स से जुड़ी कोई बड़ी घोषणा नहीं की थी. अब जब अगले महीने पूर्ण बजट पेश किया जाएगा, तो टैक्स स्लैब में बदलाव किया जा सकता है. हालांकि, इसका फायदा केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जो न्यू टैक्स रिजीम चुनते हैं. इस रिजीम के तहत इनकम टैक्स छूट की सीमा को 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया जा सकता है. न्यू टैक्स रिजीम में सालाना 15 लाख रुपए से अधिक की कमाई पर 30% टैक्स का प्रावधान है, जिसे बढ़ाकर 20 लाख रुपए किया जा सकता है.
किस रिजीम में कितने स्लैब?
न्यू टैक्स रिजीम में कुल 6 स्लैब हैं - 3 लाख तक 0% टैक्स. 3-6 लाख तक 5% टैक्स. 6-9 लाख तक 10% टैक्स. 9-12 लाख तक 15%. 12-15 लाख तक 20% और 15 लाख से अधिक की कमाई पर 30% टैक्स. जबकि पुराने टैक्स रिजीम में स्लैब की संख्या कम है. इसमें 2.5 लाख तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता. 2.5 से 5 लाख तक की आय पर 5% टैक्स देना होता है. 5 से 10 लाख पर 20%, 10 लाख से अधिक इनकम पर 30% टैक्स लगता है. सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग न्यू टैक्स रिजीम को अपनाएं, इसलिए उसे और आकर्षक बनाने के लिए इनकम टैक्स में छूट का दायरा बढ़ाया जा सकता है.
80C की लिमिट में होगा बदलाव?
माना यह भी जा रहा है कि सरकार 80C की लिमिट में भी कोई बदलाव कर सकती है. महंगाई बढ़ने के बावजूद सरकार ने पिछले 10 साल में इसमें कोई बदलाव नहीं किया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसमें बदलाव से न केवल टैक्सपेयर्स को महंगाई से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि ELSS, टैक्स सेवर FDs, PPF जैसे सेविंग स्कीम्स में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा. मोदी सरकार ने अपने पहले बजट में 80C के तहत छूट को 1 लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख किया था. इसी तरह, होम लोन के ब्याज पर छूट डेढ़ लाख से बढ़ाकर 2 लाख कर दी गई थी. 2014-15 के बजट में टैक्स छूट की लिमिट 2 लाख से बढ़ाकर ढाई लाख की गई थी. जबकि सीनियर सिटीजंस के लिए छूट का दायरा ढाई लाख से बढ़ाकर 3 लाख किया गया था.
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