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लंदन के बड़े निवेशकों के साथ साझेदारी करेगा ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट, जानिए क्यों?
ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट, विकासशील देशों में निजी निवेश बढ़ाने के लिए शुरुआती £50 मिलियन की सस्ती पूंजी (concessionary capital) देगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
लंदन शहर जलवायु वित्त (climate finance) के क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है। इसके लिए उसे ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (BII) के साथ मिलकर काम करना होगा, जो ब्रिटेन की एक विकास वित्त संस्था (development finance institution) और प्रभाव निवेशक (impact investor) है। यह संस्थान जलवायु संकट से निपटने के प्रयासों में मदद करता है।
पिछले साल, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि BII एक नया £100 मिलियन का मोबिलाइजेशन फंड (Mobilisation Facility) संभालेगा. इस फंड का उद्देश्य उन विकासशील देशों (Emerging economies) में निजी निवेश बढ़ाना है, जिन्हें बड़े निवेशक जोखिम भरा मानते हैं.
आज, BII ने बताया कि इस फंड में से £50 मिलियन एक नई पहल (initiative) के लिए अलग रखे गए हैं. इसके तहत, BII वैश्विक निवेश फर्म Mercer के साथ साझेदारी कर रहा है. इसका मकसद निवेश प्रबंधकों (asset managers) को ऐसी योजनाएँ बनाने के लिए प्रेरित करना है, जो जलवायु से जुड़े प्रोजेक्ट्स में निजी निवेश को आकर्षित करें. साथ ही, यह उन चुनौतियों को हल करने की कोशिश करेगा, जिनमें बड़े निवेशकों का जोखिम लेने की क्षमता और उनकी लाभ की उम्मीदों के बीच अंतर होता है.
विकासशील देश (Emerging Economies) आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक वृद्धि (Global Economic Growth) में अहम भूमिका निभाएंगे. वर्तमान में, वे दुनिया की कुल GDP का 60% से अधिक योगदान देते हैं और 2050 तक वैश्विक ऊर्जा खपत (energy consumption) का 74% हिस्सा बनने की उम्मीद है. इससे स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) जैसे क्षेत्रों में निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं, जो विकास, विविधता और सकारात्मक प्रभाव के लिए फायदेमंद हो सकते हैं.
मिनिस्टर ऑफ डेवलपमेंट एनेलीज़ डोड्स ने इस पहल का स्वागत किया और कहा कि "जो देश जलवायु संकट (Climate Crisis) से प्रभावित हैं, वे भीषण मौसम (Extreme Weather) का सामना कर रहे हैं. इससे उनकी अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है, विकास रुक रहा है और लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं. इन देशों को इस संकट से निपटने और खुद को इसके अनुसार ढालने के लिए तुरंत वित्तीय मदद (Finance) की जरूरत है.
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि "इसी समय, ब्रिटेन की वित्तीय संस्थाएं (Financial Institutions) जलवायु वित्त (Climate Finance) में वैश्विक नेतृत्व करने और इन नए बाज़ारों में निवेश करने के लिए बिल्कुल सही स्थिति में हैं. इससे न केवल ब्रिटेन में आर्थिक वृद्धि होगी, बल्कि दूसरे देशों को भी ज़रूरी वित्तीय सहायता मिलेगी. निजी (Private) और सरकारी (Public) विशेषज्ञता और पूंजी (Capital) को एक साथ लाकर, ब्रिटेन दुनिया का नेतृत्व कर रहा है और उन देशों को वित्तीय मदद पहुंचा रहा है, जिन्हें जलवायु संकट से निपटने के लिए इसकी सख्त जरूरत है."
ब्रिटेन और दुनियाभर के एसेट मैनेजर्स (Asset Managers), जो जलवायु वित्त (Climate Finance) में अच्छा अनुभव रखते हैं और विकासशील देशों (Emerging Economies) में निवेश करने में रुचि रखते हैं, उन्हें BII के साथ साझेदारी के लिए अपने प्रस्ताव (Proposals) भेजने का आमंत्रण दिया गया है.
वे प्रस्ताव, जो निजी निवेश (Private Investment) को तेज़ी से बढ़ाने और बड़े स्तर पर जलवायु प्रभाव दिखाने की क्षमता रखते हैं, उन्हें £50 मिलियन तक की सस्ती पूंजी (Concessional Capital) मिलेगी. इसके अलावा, उन्हें BII से अतिरिक्त निवेश फंडिंग (Non-Concessional Investment Funding) पाने का भी मौका मिलेगा.
BII के CEO, लेस्ली मासडॉर्प ने कहा कि "BII, ब्रिटेन की मुख्य संस्था है, जो जलवायु वित्त (Climate Finance) को बाज़ारों तक पहुंचाती है. लेकिन जलवायु संकट की बड़ी चुनौती को देखते हुए, हमें निजी संस्थानों (Private Institutions) की बड़ी पूंजी को भी इसमें लगाना होगा. आज हमने जो साझेदारी शुरू की है, वह इसे करने का एक नया और बेहतरीन तरीका है."
Mercer के यूके प्रेसिडेंट और CEO, बेनोइट हुडोन ने कहा कि "यह पहल विकासशील देशों में नए प्रोजेक्ट्स में निवेश को बढ़ावा दे सकती है, जिससे उनकी आर्थिक प्रगति (Economic Development) को समर्थन मिलेगा. मर्सर उन एसेट मैनेजर प्रस्तावों की पहचान करने में अहम भूमिका निभाएगा, जो ऊर्जा बदलाव (Energy Transition) में मदद कर सकते हैं और निवेशकों की उन चिंताओं को दूर कर सकते हैं, जो विकासशील देशों में निवेश को लेकर झिझकते हैं."
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