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BPCL और HMEL ने वेनेज़ुएला से भारी क्रूड खरीदा, रूसी तेल पर निर्भरता में कमी
भारतीय रिफाइनर कंपनियों ने वेनेज़ुएला के भारी क्रूड के सौदों के साथ रूसी तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत की प्रमुख रिफाइनिंग कंपनियों भारत पेट्रोलियम (Bharat Petroleum Corporation Ltd -BPCL) और मित्तल एनर्जी (HPCL Mittal Energy Ltd -HMEL) ने वेनेज़ुएला से भारी क्रूड तेल (Merey grade) की महत्वपूर्ण खरीद की है. यह BPCL का पहला ऐसा सौदा है, जबकि HMEL ने लगभग दो साल बाद वेनेज़ुएला से तेल खरीदना फिर से शुरू किया है.
दोनों रिफाइनर ने खरीदी 1‑1 मिलियन बैरल हर एक
स्रोतों के अनुसार, दोनों कंपनियों ने 1 मिलियन बैरल वेनेज़ुएला के भारी कच्चे तेल के बैरल खरीदे. ये सौदे वैश्विक ट्रेडर Vitol के माध्यम से किए गए हैं और इन कार्गो को एक बड़े क्रूड कैरियर पर सह‑लोड किए जाने की संभावना है ताकि ट्रांसपोर्ट लागत कम की जा सके. यह खरीद भारत के वेनेज़ुएला से कुल तेल आयात को कम से कम 6 मिलियन बैरल तक बढ़ा देगी, जो अप्रैल 2026 तक की अवधि के लिए है.
तेल आपूर्ति में विविधीकरण और रूस पर निर्भरता में कमी
विश्लेषकों का कहना है कि यह रणनीतिक कदम भारत के क्रूड आयात स्रोतों को विविध बनाने की दिशा में एक बड़ा संकेत है. भारतीय रिफाइनर पिछले कुछ समय में रूसी तेल की खरीद में कटौती कर रहे हैं, यह बदलाव नए दिल्ली‑वॉशिंगटन बीच ट्रांज़िट ट्रेड डील प्रयासों के साथ भी जुड़ा हुआ है. HMEL ने अक्टूबर 2025 में रूसी तेल आयात रोक दिया था, हालांकि केंद्र सरकार ने रूस से तेल आयात पूरी तरह बंद करने की औपचारिक घोषणा नहीं की है.
डिलीवरी योजनाएँ: अलग‑अलग बंदरगाहों से होगा वितरण
BPCL अपने वेनेज़ुएला तेल का एक हिस्सा कोच्चि पोर्ट (केरल) में अपने 3,10,000 बैरल‑प्रति‑दिन क्षमता वाले रिफ़ाइनरी के लिए उतारेगी और शेष हिस्सा सिक्का पोर्ट (गुजरात) में कंपनी के 1,56,000 बैरल‑प्रति‑दिन बिनाना रिफ़ाइनरी के लिए भेजा जाएगा. वहीं HMEL अपना तेल मुंद्रा पोर्ट (गुजरात) से लेकर जाएगा ताकि उसे अपने 2,26,000 बैरल‑प्रति‑दिन क्षमता वाले बाटिंडा रिफाइनरी में प्रोसेस किया जा सके.
बाजार में प्रतिक्रिया और रणनीतिक महत्व
व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक, वेनेज़ुएला का भारी क्रूड आमतौर पर वैश्विक बेंचमार्क की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध होता है, जिससे भारतीय रिफाइनर को रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ाने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा, यह कदम वैश्विक ऊर्जा भू‑राजनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में कदम को भी दर्शाता है.
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