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रुपये की मजबूती के लिए RBI का बड़ा कदम, बैंकिंग सिस्टम में बढ़ेगी ₹3 लाख करोड़ की लिक्विडिटी

RBI का यह कदम रुपये को स्थिरता देने और बैंकिंग सिस्टम की नकदी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. हालांकि बाजार की नजर आगे की मौद्रिक नीति और संभावित अतिरिक्त हस्तक्षेप पर बनी रहेगी, जो रुपये और ब्याज दरों की दिशा तय करेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

रुपये पर बने दबाव और बैंकिंग सिस्टम में नकदी की कमी को दूर करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने तरलता बढ़ाने का बड़ा ऐलान किया है. केंद्रीय बैंक ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) और डॉलर-रुपया स्वैप के जरिए करीब ₹3 लाख करोड़ की लिक्विडिटी सिस्टम में डालने की तैयारी कर रहा है.

OMO और डॉलर स्वैप से बढ़ेगी नकदी

RBI ने बताया कि वह 29 दिसंबर, 5 जनवरी, 12 जनवरी और 22 जनवरी को चार चरणों में ₹50-50 हजार करोड़ के OMO करेगा. इसके जरिए कुल ₹2 लाख करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियां खरीदी जाएंगी. इसके अलावा 13 जनवरी को 10 अरब डॉलर का तीन साल का डॉलर बनाम रुपया खरीद-बिक्री स्वैप भी किया जाएगा, जिससे सिस्टम में अतिरिक्त नकदी आएगी.

घाटे में है बैंकिंग सिस्टम की तरलता

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार तक बैंकिंग सिस्टम में ₹54,851 करोड़ की शुद्ध नकदी की कमी दर्ज की गई थी. विदेशी मुद्रा बाजार में हालिया हस्तक्षेप, अग्रिम कर भुगतान और प्रचलन में अधिक नकदी जैसे मौसमी कारणों से लिक्विडिटी पर दबाव बढ़ा है. इसी को संतुलित करने के लिए RBI यह कदम उठा रहा है.

रुपये को मिला सहारा, आगे भी संभव हस्तक्षेप

पिछले सप्ताह RBI के हस्तक्षेप के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले 91 से मजबूत होकर 89 के स्तर तक पहुंचा. बाजार जानकारों का मानना है कि अगर रुपये पर दबाव बना रहता है, तो चौथी तिमाही में केंद्रीय बैंक आगे भी बाजार में दखल दे सकता है.

HDFC बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता के अनुसार, बाजार पहले से ही कम से कम ₹2 लाख करोड़ की नकदी डाले जाने की उम्मीद कर रहा था. मौजूदा हस्तक्षेप को देखते हुए ₹3 लाख करोड़ की लिक्विडिटी उचित लगती है, हालांकि यह अंतिम कदम नहीं हो सकता. आगे की रणनीति तरलता की स्थिति और बाजार की जरूरत पर निर्भर करेगी.

दिसंबर में अब तक ₹1.45 लाख करोड़ की स्थायी नकदी

RBI ने दिसंबर महीने में अब तक OMO और डॉलर स्वैप के जरिए करीब ₹1.45 लाख करोड़ की स्थायी नकदी डाली है. बॉन्ड बाजार के जानकारों का कहना है कि अधिक लिक्विड सरकारी बॉन्ड में OMO से बाजार सहभागिता और मूल्य निर्धारण में सुधार होता है.

साल की पहली छमाही में बड़ा समर्थन

चालू कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही में RBI ने बैंकिंग सिस्टम में कुल ₹9.5 लाख करोड़ की नकदी डाली थी. इसके चलते दिसंबर 2024 के मध्य से घाटे में चल रही तरलता स्थिति मार्च 2025 के अंत तक अधिशेष में बदल गई थी.

बॉन्ड यील्ड पर अब भी दबाव

तरलता बढ़ाने की घोषणा और दिसंबर के पहले सप्ताह में रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती के बावजूद सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी बनी हुई है. बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड दिसंबर की शुरुआत से अब तक करीब 12 आधार अंक बढ़ चुकी है.


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