सेबी ने इंफोसिस के कुछ कर्मचारियों और उनसे जुड़ी कंपनियों पर साल 2021 में एक अंतरिम आदेश के जरिए इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप में कार्रवाई की थी. इसे अब बंद कर दिया गया है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
मार्केट रेगुलेटर सेबी ने सोमवार को इंफोसिस को बड़ी राहत दी है. इंफोसिस के कर्मचारियों और उनसे जुड़ी कंपनियों पर लगे इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप हटा लिए गए हैं. इसके साथ ही इन कंपनियों के जब्त किए गए पैसों को वापस कर दिया गया है. इंफोसिस के कर्मचारियों से जुड़ी इन कंपनियों पर आरोप था कि उन्होंने इनसाइडर ट्रेडिंग के जरिए यह रकम कमाई है.
इंफोसिस के कुछ कर्मचारियों पर था इनसाइडर ट्रेडिंग का आरोप
सेबी ने अपने नए आदेश में प्रतिबंध हटाने का ऐलान किया है. मार्केट रेगुलेटर सेबी ने इंफोसिस के कुछ कर्मचारियों और उनसे जुड़ी कंपनियों पर साल 2021 में एक अंतरिम आदेश के जरिए कार्रवाई की थी. इन पर इनसाइडर ट्रेडिंग से मुनाफा कमाने का आरोप था. सेबी ने अपने फाइनल ऑर्डर में कहा है कि जिन लोगों को भी नोटिस भेजे गए थे, उन सभी के खिलाफ अब कार्रवाई बंद की जा रही है. साथ ही उन संस्थाओं से जब्त की गई किसी भी राशि को भी जारी कर दिया जाएगा.
साल 2021 में जब्त कर ली थी कर्मचारियों एवं उनकी कंपनियों की रकम
इंफोसिस पर इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप लगने से कंपनी को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. सेबी ने इनसाइडर ट्रेडिंग का पता लगाने के लिए 1 दिसंबर, 2019 से 30 नवंबर, 2020 तक चार तिमाहियों के नतीजों की जांच की थी. इसके अलावा भी सेबी ने कई तिमाही के नतीजों की जांच की थी. इसके बाद मई, 2021 में अंतरिम आदेश और दिसंबर, 2021 में एक और आदेश जारी करते हुए इन कर्मचारियों एवं उनकी कंपनियों की रकम जब्त कर ली थी.
सेबी के आदेश के खिलाफ SAT चले गए थे दो कर्मचारी
इसके खिलाफ इंफोसिस के दो कर्मचारी प्रांशू भूतरा और वेंकटसुब्रमण्यम वीवी ने सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) में याचिका दाखिल की थी. सैट ने अप्रैल, 2022 में सेबी के आदेश पर रोक लगा दी थी. इसके बाद की गई जांच में प्रांशू भूतरा और वेंकटसुब्रमण्यम वीवी समेत 16 नोटिस प्राप्त करने वालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. इसमें कहा गया था कि प्रांशू भूतरा ने वेंकटसुब्रमण्यम और सुनील कुमार दरेश्वर से नजदीकी के चलते प्राइस सेंसिटिव इंफॉर्मेशन इकट्ठी की और इसे अन्य लोगों को दिया. हालांकि, अब अंतिम आदेश में इसकी पुष्टि के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं.
नियमों में परिचालन खर्चों को पूरा करने के लिए भी धनराशि सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है, हालांकि इसके लिए निर्धारित शर्तों और समय-सीमा का पालन करना होगा.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने वैकल्पिक निवेश कोष (AIFs) के समापन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नए नियमों को मंजूरी दे दी है. नए ढांचे के तहत फंड प्रबंधकों को अधिक लचीलापन मिलेगा, जबकि फंड के अंतिम चरण में अनुपालन संबंधी बोझ भी कम होगा.
संशोधित नियमों के अनुसार अब AIFs को कुछ विशेष परिस्थितियों में अपनी निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी परिसमापन से प्राप्त राशि अपने पास रखने की अनुमति होगी. यह पहले के नियमों से बड़ा बदलाव है, जिनमें फंड को अपना पंजीकरण सरेंडर करने से पहले सभी राशि निवेशकों को वितरित करनी होती थी और बैंक खाते का बैलेंस शून्य रखना अनिवार्य था.
‘इनऑपरेटिव फंड’ का नया ढांचा
सेबी ने "इनऑपरेटिव फंड" नाम से एक नया ढांचा भी पेश किया है. इसके तहत वे फंड, जिन्होंने अपनी निवेश अवधि पूरी कर ली है लेकिन लंबित देनदारियों, कानूनी विवादों या कर संबंधी मामलों के कारण पूरी तरह बंद नहीं हो पाए हैं, सीमित अनुपालन आवश्यकताओं के साथ संचालन जारी रख सकेंगे. ऐसे फंड तब तक इस व्यवस्था के तहत बने रहेंगे, जब तक उनका पंजीकरण औपचारिक रूप से सरेंडर नहीं कर दिया जाता.
किन परिस्थितियों में रख सकेंगे धनराशि?
सेबी के अनुसार यदि किसी AIF को मुकदमेबाजी संबंधी नोटिस, टैक्स डिमांड या नियामकीय दावा प्राप्त हुआ है, तो वह अपनी वैध अवधि के बाद भी कुछ धनराशि रोक कर रख सकता है. इसके अलावा संभावित देनदारियों को पूरा करने के लिए भी राशि सुरक्षित रखी जा सकती है, बशर्ते फंड को मूल्य के आधार पर कम से कम 75 प्रतिशत निवेशकों की सहमति प्राप्त हो.
नियमों में परिचालन खर्चों को पूरा करने के लिए भी धनराशि सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है, हालांकि इसके लिए निर्धारित शर्तों और समय-सीमा का पालन करना होगा.
लंबे समय से चली आ रही व्यावहारिक समस्याओं का समाधान
यह सुधार उन व्यावहारिक चुनौतियों को दूर करने के उद्देश्य से लाया गया है, जिनका सामना कई AIFs को अपने समापन के दौरान करना पड़ता था. अक्सर ऐसा देखा गया कि फंड अपने निवेश पोर्टफोलियो का परिसमापन कर चुके होते थे, लेकिन लंबित कानूनी मामलों, कर निर्धारण प्रक्रियाओं या अन्य परिचालन दायित्वों के कारण वे औपचारिक रूप से बंद नहीं हो पाते थे.
अनुपालन बोझ होगा कम
नए इनऑपरेटिव फंड ढांचे के तहत सेबी ऐसे फंडों के लिए कई अनुपालन आवश्यकताओं को युक्तिसंगत बनाने की तैयारी में है. इनमें कुछ नियमित रिपोर्टिंग और फाइलिंग दायित्वों से राहत भी शामिल हो सकती है. हालांकि इन फंडों को नए निवेश योजनाएं शुरू करने की अनुमति नहीं होगी और सभी देनदारियों के निपटारे तथा पंजीकरण सरेंडर होने तक वे नियामकीय निगरानी में बने रहेंगे.
उद्योग जगत ने किया स्वागत
बाजार विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिभागियों ने सेबी के इस कदम का स्वागत किया है. उनका मानना है कि यह AIFs को अधिक व्यावहारिक और सुगम एग्जिट तंत्र उपलब्ध कराएगा, साथ ही निवेशकों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा. विशेषज्ञों के अनुसार इस बदलाव से उन फंडों की प्रशासनिक लागत भी घटेगी, जो सक्रिय परिचालन बंद कर चुके हैं लेकिन लंबित दायित्वों के कारण पंजीकृत बने हुए हैं.
निवेश प्रबंधन उद्योग में कारोबार सुगमता बढ़ाने की दिशा में कदम
ताजा सुधार भारत के निवेश प्रबंधन उद्योग में कारोबार सुगमता बढ़ाने और वैकल्पिक निवेश साधनों से जुड़े नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाने की दिशा में सेबी के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं.
कंपनी का कहना है कि यह नई रणनीति भारत के प्रतिस्पर्धी लुब्रिकेंट बाजार में रिलस्टार को अलग पहचान दिलाने के साथ-साथ मूल्य-सचेत उपभोक्ताओं के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करेगी.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस बीपी मोबिलिटी के उपभोक्ता लुब्रिकेंट ब्रांड रिलस्टार (Relstar) को नई पहचान देने के लिए डिजाइन इंटेलिजेंस फर्म EuMo (यूरेका मोमेंट) ने व्यापक ब्रांड रीपोजिशनिंग और पैकेजिंग ट्रांसफॉर्मेशन की घोषणा की है. कंपनी ने रिलस्टार के लिए "Driven by More" नामक नया ब्रांड प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जिसके साथ पूरे उत्पाद पोर्टफोलियो की पैकेजिंग को भी नया स्वरूप दिया गया है.
कंपनी का कहना है कि यह नई रणनीति भारत के प्रतिस्पर्धी लुब्रिकेंट बाजार में रिलस्टार को अलग पहचान दिलाने के साथ-साथ मूल्य-सचेत उपभोक्ताओं के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करेगी.
140 से अधिक उत्पादों में लागू होगी नई पैकेजिंग
EuMo द्वारा विकसित नई विजुअल आइडेंटिटी और पैकेजिंग आर्किटेक्चर रिलस्टार के ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल लुब्रिकेंट्स के पूरे पोर्टफोलियो में लागू की जाएगी. इसमें 13 सेगमेंट और तीन प्राइस टियर में फैले 140 से अधिक उत्पाद वेरिएंट शामिल हैं. नई पैकेजिंग का उद्देश्य ग्राहकों तक उत्पाद की गुणवत्ता और प्रदर्शन का संदेश स्पष्ट रूप से पहुंचाना है, साथ ही ब्रांड के साथ भावनात्मक संबंध को भी मजबूत करना है.
एकरूपता और आसान पहचान पर जोर
नई डिजाइन रणनीति एक लचीले पैकेजिंग फ्रेमवर्क पर आधारित है. इसमें उत्पाद संबंधी जानकारी और बड़े आकार की वाहन छवियों को प्रमुखता दी गई है, ताकि उत्पाद के उपयोग और उससे जुड़ी भावनाओं को प्रभावी ढंग से दर्शाया जा सके.
नई पैकेजिंग की प्रमुख विशेषताएं
1. स्केलेबल डिजाइन सिस्टम-एक ही सुसंगत लेआउट को सभी सेगमेंट और प्राइस टियर में अपनाया गया है. इससे 140 से अधिक उत्पाद वेरिएंट्स के बीच ब्रांड की तुरंत पहचान संभव होगी और ग्राहकों के लिए सही उत्पाद चुनना आसान बनेगा.
2. रंगों के जरिए श्रेणीकरण- तीनों प्राइस कैटेगरी के लिए अलग-अलग रंग बैंड निर्धारित किए गए हैं. इससे ग्राहक आसानी से अपनी जरूरत और बजट के अनुसार उत्पाद चुन सकेंगे, जबकि रिटेलर्स के लिए भी उत्पादों को व्यवस्थित करना सरल होगा.
3. प्रभावशाली विजुअल्स- नई पैकेजिंग में ऑटोमोबाइल और मशीनरी की आकर्षक तस्वीरों का उपयोग किया गया है, जो तुरंत उत्पाद के उपयोग को दर्शाती हैं. इन्हें साधारण पृष्ठभूमि के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि पैकेजिंग पर अनावश्यक दृश्य अव्यवस्था न हो.
4. 'आर्म ऑफ स्टार' ब्रांड मोटिफ- नई पहचान का प्रमुख आकर्षण "Arm of Star" नामक ब्रांड मोटिफ है. यह गतिशील स्टार-आकार का डिजाइन तत्व पैकेजिंग को ऊर्जा प्रदान करता है और ब्रांड की विशिष्ट पहचान को मजबूत बनाता है.
ग्राहकों की आकांक्षाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई रणनीति
EuMo की सह-संस्थापक और क्रिएटिव डायरेक्टर शानू भाटिया ने कहा कि "Driven by More" की अवधारणा इस विश्वास पर आधारित है कि मूल्य-सचेत ग्राहक भी अपनी आकांक्षाओं, महत्वाकांक्षाओं और जीवन में महत्वपूर्ण चीजों से अधिक पाने की इच्छा से प्रेरित होते हैं.
उन्होंने कहा कि EuMo का उद्देश्य इस समझ को ऐसे ब्रांड प्लेटफॉर्म और पैकेजिंग आर्किटेक्चर में बदलना था, जो बड़े पैमाने पर ब्रांड को अलग पहचान दिलाने के साथ-साथ खुदरा बाजार में ग्राहकों के लिए उत्पादों को समझना और चुनना भी आसान बनाए.
भाटिया के अनुसार, रिलस्टार के लिए सबसे बड़ा अवसर उन लोगों के साथ मजबूत भावनात्मक संबंध बनाना था, जो रोजमर्रा के कामकाज में इसके उत्पादों पर भरोसा करते हैं. "Arm of Star" इसी सोच को मूर्त रूप देता है और पूरे पोर्टफोलियो में एक यादगार तथा विशिष्ट विजुअल पहचान तैयार करता है.
टाटा कंसल्टेंसी ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने DXC टेक्नोलॉजी से जुड़े व्यापारिक गोपनीयता विवाद में उसकी समीक्षा याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को अमेरिका में चल रहे बहुचर्चित DXC टेक्नोलॉजी ट्रेड सीक्रेट्स मामले में बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर कंपनी की समीक्षा याचिका सुनने से इनकार कर दिया है. इसके बाद टीसीएस को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त प्रावधान करना पड़ेगा. कंपनी पहले ही 15 करोड़ डॉलर का प्रावधान कर चुकी है और अब कुल देनदारी हर्जाने, ब्याज तथा कानूनी खर्चों के कारण और बढ़ गई है.
सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
टाटा कंसल्टेंसी ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने DXC टेक्नोलॉजी से जुड़े व्यापारिक गोपनीयता विवाद में उसकी समीक्षा याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. अदालत के इस फैसले के बाद कंपनी को अतिरिक्त 7 करोड़ डॉलर का प्रावधान करना होगा. यह राशि एक बार के असाधारण व्यय के रूप में दर्ज की जाएगी.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद वर्ष 2019 में सामने आया था, जब कंप्यूटर साइसेंज कॉर्पोरेशन (CSC) (अब DXC टेक्नोलॉजी का हिस्सा) ने टीसीएस पर व्यापारिक गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग का आरोप लगाया था. आरोप था कि टीसीएस ने ट्रांसअमेरिका के करीब 2,200 कर्मचारियों को अपने साथ जोड़ने के बाद उनकी सॉफ्टवेयर तक पहुंच का इस्तेमाल कर प्रतिस्पर्धी लाइफ इंश्योरेंस सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म विकसित किया.
मामला उस समय शुरू हुआ जब ट्रांसअमेरिका और टीसीएस के बीच करीब 2 अरब डॉलर का आउटसोर्सिंग समझौता हुआ था. टीसीएस का दावा था कि इस प्रक्रिया में उसकी गोपनीय तकनीकी जानकारी का अनुचित उपयोग किया गया.
अदालत ने लगाया भारी हर्जाना
साल 2023 में अमेरिकी अदालत की एक पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि टीसीएस ने जानबूझकर व्यापारिक गोपनीयता का दुरुपयोग किया है. इसके बाद कंपनी पर 21 करोड़ डॉलर का हर्जाना लगाया गया. हालांकि, 2024 में अमेरिकी जिला न्यायाधीश ब्रेंटली स्टार ने इस राशि को घटाकर 16.8 करोड़ डॉलर कर दिया था. बाद में पांचवें अमेरिकी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने भी इस फैसले को बरकरार रखा.
अपील की सभी राहें हुईं बंद
टीसीएस ने फैसले के खिलाफ पहले अपील और फिर सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर की थी. कंपनी को उम्मीद थी कि उसे कानूनी राहत मिलेगी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद उसके लिए फैसले को चुनौती देने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं.
कंपनी पर कितना पड़ेगा असर?
टीसीएस पहले ही इस मामले के लिए 15 करोड़ डॉलर का प्रावधान कर चुकी है. अब अतिरिक्त 7 करोड़ डॉलर जोड़ने के बाद कंपनी की कुल वित्तीय देनदारी बढ़ जाएगी. इसमें हर्जाना, ब्याज और कानूनी खर्च शामिल हैं. हालांकि, कंपनी की मजबूत बैलेंस शीट को देखते हुए इसका दीर्घकालिक कारोबारी प्रभाव सीमित रहने की उम्मीद है, लेकिन अल्पकाल में यह उसके मुनाफे पर दबाव डाल सकता है.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद निवेशकों की नजर टीसीएस के आगामी तिमाही नतीजों पर रहेगी. बाजार यह आकलन करेगा कि अतिरिक्त प्रावधान का कंपनी की लाभप्रदता और मार्जिन पर कितना असर पड़ता है. साथ ही, यह मामला वैश्विक आईटी कंपनियों के लिए बौद्धिक संपदा और व्यापारिक गोपनीयता से जुड़े जोखिमों की भी याद दिलाता है.
यम ब्रांड्स के अनुसार, पिज्जा हट का वैश्विक कारोबार (चीन को छोड़कर) निजी इक्विटी फर्म LongRange Capital लगभग 1.5 अरब डॉलर में खरीदेगी.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दुनिया की सबसे पहचान वाली पिज्जा चेन में शुमार पिज्जा हट (Pizza Hut) अब नए मालिकों के हाथों में जाने वाली है. इसकी मूल कंपनी यम ब्रांड्स (Yum Brands) ने 2.7 अरब डॉलर (करीब 25,500 करोड़ रुपये) में पिज्जा हट कारोबार बेचने का फैसला किया है. लगातार घटती बिक्री, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलती उपभोक्ता पसंद के दबाव के बीच कंपनी ने अपने इस ऐतिहासिक ब्रांड से अलग होने का निर्णय लिया है. इस सौदे के बाद यम ब्रांड्स अपना पूरा ध्यान KFC और Taco Bell जैसे अधिक लाभदायक ब्रांड्स के विस्तार पर केंद्रित करेगी.
दो हिस्सों में होगी डील
यम ब्रांड्स के अनुसार, पिज्जा हट का वैश्विक कारोबार (चीन को छोड़कर) निजी इक्विटी फर्म LongRange Capital लगभग 1.5 अरब डॉलर में खरीदेगी. वहीं मुख्य भूमि चीन में संचालित पिज्जा हट रेस्तरां को Yum China Holdings करीब 1.2 अरब डॉलर में अपने अधीन लेगी. दोनों सौदों के वर्ष की तीसरी तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है.
चीन पिज्जा हट के लिए अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा बाजार है और कंपनी की कुल बिक्री में उसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है. ऐसे में कारोबार को दो हिस्सों में विभाजित कर अलग-अलग खरीदारों को सौंपने का फैसला रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है.
नवंबर से चल रही थी रणनीतिक समीक्षा
यम ब्रांड्स ने नवंबर 2025 में पिज्जा हट के भविष्य को लेकर रणनीतिक समीक्षा शुरू की थी. कंपनी की चिंता का मुख्य कारण लगातार कमजोर होती बिक्री और प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बाजार हिस्सेदारी में गिरावट थी. समीक्षा के दौरान कंपनी ने कई विकल्पों पर विचार किया और अंततः बिक्री का फैसला लिया.
क्यों कमजोर पड़ा Pizza Hut?
पिज्जा हट की मुश्किलों की सबसे बड़ी वजह बदलता बाजार और बढ़ती प्रतिस्पर्धा रही है. Domino's और Papa John's जैसी कंपनियों ने डिजिटल ऑर्डरिंग, तेज डिलीवरी और आक्रामक मार्केटिंग के जरिए ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित किया. दूसरी ओर पिज्जा हट लंबे समय तक अपने पारंपरिक डाइन-इन मॉडल पर निर्भर रहा, जिससे वह बदलती उपभोक्ता जरूरतों के अनुरूप तेजी से खुद को नहीं ढाल पाया.
महंगाई, कच्चे माल की बढ़ती लागत और उपभोक्ताओं की खर्च करने की आदतों में बदलाव ने भी कंपनी के मुनाफे पर दबाव बढ़ाया. पिछले साल पिज्जा हट की कुल वैश्विक बिक्री में वृद्धि हुई, लेकिन पिज्जा हट की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई.
68 साल का गौरवशाली सफर
पिज्जा हट की शुरुआत 1958 में अमेरिका के कंसास राज्य के विचिटा शहर में हुई थी. दो भाइयों ने अपनी मां से 600 डॉलर उधार लेकर पहला रेस्तरां शुरू किया था. देखते ही देखते यह दुनिया की सबसे बड़ी पिज्जा चेन बन गई. 1969 में इसकी पहचान बनी लाल छत और 1971 तक यह बिक्री के मामले में वैश्विक बाजार की अग्रणी पिज्जा कंपनी बन चुकी थी.
1977 में इसे PepsiCo ने खरीदा और बाद में 1997 में इसके रेस्टोरेंट कारोबार को अलग कर यम ब्रांड्स का गठन हुआ. हालांकि बदलते बाजार और नई प्रतिस्पर्धा के दौर में Pizza Hut अपनी पुरानी चमक बरकरार नहीं रख सका.
Yum Brands की नई रणनीति
कंपनी का मानना है कि पिज्जा हट की वापसी के लिए बड़े निवेश और व्यापक पुनर्गठन की जरूरत है. ऐसे में यम ब्रांड्स ने अपने संसाधनों को KFC और Taco Bell जैसे तेजी से बढ़ते ब्रांड्स पर केंद्रित करने का फैसला किया है.
इस सौदे से मिलने वाली राशि का उपयोग शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजन, शेयर बायबैक और भविष्य की विकास योजनाओं में किया जाएगा. वहीं नए मालिक पिज्जा हट को फिर से प्रतिस्पर्धी बनाने और उसकी खोई हुई बाजार हिस्सेदारी वापस पाने की कोशिश करेंगे.
बदलते फूड बिजनेस की बड़ी मिसाल
पिज्जा हट की बिक्री केवल एक कारोबारी सौदा नहीं, बल्कि यह वैश्विक फूड इंडस्ट्री में तेजी से बदलते उपभोक्ता व्यवहार और डिजिटल युग की चुनौतियों का भी संकेत है. कभी पिज्जा बाजार का पर्याय मानी जाने वाली यह चेन आज ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां उसे नई रणनीति और नए नेतृत्व के सहारे अपनी पहचान दोबारा स्थापित करनी होगी.
मंगलवार को BSE सेंसेक्स 544.15 अंक यानी 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,808.48 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 135.25 अंक चढ़कर 23,989.15 के स्तर पर पहुंच गया.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार ने मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती दिखाई और सेंसेक्स 544 अंक की छलांग लगाकर 76,808 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 24,000 के बेहद करीब पहुंच गया. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और आईटी शेयरों में खरीदारी ने बाजार को समर्थन दिया. अब निवेशकों की नजर आज के कारोबार पर रहेगी, जहां वैश्विक संकेतों के साथ-साथ कई कॉरपोरेट घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.
तीन दिन की तेजी से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 544.15 अंक यानी 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,808.48 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 135.25 अंक चढ़कर 23,989.15 के स्तर पर पहुंच गया. बाजार में यह लगातार तीसरा सत्र था, जब प्रमुख सूचकांक मजबूती के साथ बंद हुए. रुपया भी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ और 94.56 पर बंद हुआ.
आईटी और कंज्यूमर शेयरों ने संभाला मोर्चा
पिछले सत्र में HCL Tech, NTPC, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, रिलायंस, TCS और ITC जैसे शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली. वहीं इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति, टाटा स्टील, SBI और सन फार्मा जैसे शेयर दबाव में रहे.
किन सेक्टरों ने दिखाई मजबूती?
निफ्टी रियल्टी, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर मंगलवार के कारोबार में सबसे बड़े गेनर्स रहे. इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे व्यापक बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला. हालांकि मेटल शेयरों में कमजोरी बनी रही.
कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी नजर
बाजार की तेजी के पीछे एक बड़ा कारण पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद भी रही. ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के बीच ब्रेंट क्रूड में गिरावट दर्ज की गई और यह 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. यदि कच्चे तेल में नरमी जारी रहती है तो भारतीय बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है.
आज इन शेयरों पर रहेगा फोकस
भारतीय शेयर बाजार में आज कई कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. दरअसल, DOMS Industries में इटली की कंपनी FILA द्वारा करीब 7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की तैयारी की खबर है, जबकि GIC Re में सरकार OFS के जरिए 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है. Bharat Forge की सहायक कंपनी Kalyani Strategic Systems ने Eurosatory 2026 में नया बख्तरबंद वाहन पेश किया है. वहीं Wipro ने Anthropic के Claude AI मॉडल्स पर आधारित Applied AI Center of Excellence लॉन्च किया है. Cipla ने शिवम पुरी को One India Business का नया CEO नियुक्त किया है. दूसरी ओर Sonata Software और Renaissance Global में संस्थागत निवेश देखने को मिला है. Essar Group ने International Resources Holding के साथ 500 मिलियन डॉलर की क्रूड सोर्सिंग और सप्लाई सुविधा के लिए समझौता किया है. Bank of Maharashtra ने MCLR दरों में बढ़ोतरी की है, जबकि Garware Technical Fibres ने 16.17 लाख शेयरों के कैंसिलेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली है. इन सभी घटनाक्रमों के चलते आज संबंधित शेयरों पर निवेशकों की विशेष नजर रहने की संभावना है.
आज बाजार पर क्या रहेगी नजर?
विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक बाधा बना हुआ है. यदि वैश्विक संकेत सकारात्मक रहे और कच्चे तेल में नरमी जारी रही तो बाजार अपनी तेजी बरकरार रख सकता है. वहीं मुनाफावसूली की स्थिति में निवेशकों को उतार-चढ़ाव का सामना भी करना पड़ सकता है. फिलहाल बाजार की नजर वैश्विक घटनाक्रमों, कच्चे तेल की चाल और चुनिंदा कॉरपोरेट शेयरों पर रहेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
इस परियोजना में लगभग 2,250 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. संयंत्र में प्रतिवर्ष 1.2 किलो टन सिंटर्ड नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) मैग्नेट का उत्पादन होगा.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और जापान के बीच बढ़ता औद्योगिक सहयोग अब एक ऐसे क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है, जिस पर लंबे समय से चीन का लगभग एकाधिकार रहा है. आंध्र प्रदेश में जापान की अग्रणी कंपनी प्रोटेरियल द्वारा 2,250 करोड़ रुपये के निवेश से रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण संयंत्र स्थापित किया जाएगा. यह परियोजना न केवल भारत की तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देगी, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश भारत को वैश्विक रेयर अर्थ सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकता है.
आंध्र प्रदेश में स्थापित होगा अत्याधुनिक प्लांट
जापान की प्रमुख एडवांस्ड मैटेरियल्स कंपनी प्रोटेरियल आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले स्थित अच्युतापुरम में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण इकाई स्थापित करेगी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परियोजना में लगभग 2,250 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. संयंत्र में प्रतिवर्ष 1.2 किलो टन सिंटर्ड नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) मैग्नेट का उत्पादन होगा.
ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, विंड टर्बाइनों, औद्योगिक मोटर्स, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियों में उपयोग होने वाले सबसे महत्वपूर्ण घटकों में शामिल हैं. आंध्र प्रदेश की निवेश प्रोत्साहन समिति ने हाल ही में इस परियोजना को मंजूरी प्रदान की है.
चीन की मोनोपॉली को मिलेगी चुनौती
वर्तमान में वैश्विक रेयर अर्थ मैग्नेट बाजार और इसकी सप्लाई चेन पर चीन का दबदबा है. दुनिया भर के कई उद्योग इन महत्वपूर्ण सामग्रियों के लिए चीनी आपूर्ति पर निर्भर हैं. ऐसे में भारत में इस उत्पादन क्षमता का विकास रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
इस परियोजना के शुरू होने से भारत की आयात निर्भरता कम होगी और देश अपनी घरेलू रेयर अर्थ वैल्यू चेन विकसित करने में सक्षम होगा. इससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों को भी मजबूती मिलेगी.
सरकार की आत्मनिर्भरता रणनीति को मिलेगा बल
केंद्र सरकार हाल के वर्षों में सेमीकंडक्टर, बैटरी और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रही है. इसी दिशा में सरकार ने हाल ही में सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है. यह कदम दर्शाता है कि भारत इस क्षेत्र को केवल औद्योगिक अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देख रहा है.
कौन है प्रोटेरियल?
प्रोटेरियल, जिसे पहले हिताची मेटल्स के नाम से जाना जाता था, रेयर अर्थ मैग्नेट तकनीक के क्षेत्र में दुनिया की अग्रणी कंपनियों में गिनी जाती है. कंपनी उच्च गुणवत्ता वाले चुंबकीय पदार्थों और उन्नत औद्योगिक सामग्रियों के निर्माण के लिए जानी जाती है. पिछले वर्ष कंपनी ने लगभग 45,000 करोड़ रुपये का समेकित राजस्व दर्ज किया था. इसके संचालन उत्तर अमेरिका, यूरोप, चीन और एशिया के कई देशों में फैले हुए हैं.
'चीन प्लस वन' रणनीति में भारत को मिलेगा लाभ
वैश्विक कंपनियां अब सप्लाई चेन के लिए केवल चीन पर निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक उत्पादन केंद्र तलाश रही हैं. इसे 'चीन प्लस वन' रणनीति कहा जाता है. भारत इस रणनीति का सबसे बड़ा लाभार्थी बनने की कोशिश कर रहा है.
जापान की इस बड़ी परियोजना से भारत को न केवल निवेश और रोजगार मिलेगा, बल्कि वैश्विक रेयर अर्थ सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर भी प्राप्त होगा. आने वाले वर्षों में यह परियोजना भारत को इस रणनीतिक क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
चेन्नई स्थित फुल-स्टैक सॉवरेन AI कंपनी Sarvam ने घोषणा की है कि उसने अपनी 300 मिलियन डॉलर की सीरीज-B फंडिंग के पहले चरण में 234 मिलियन डॉलर जुटाए हैं.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के सॉवरेन AI इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए AI स्टार्टअप Sarvam ने अपनी सीरीज-B फंडिंग के पहले चरण में 234 मिलियन डॉलर जुटाए हैं. इस निवेश के साथ कंपनी का मूल्यांकन 1.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया है और वह यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो गई है. फंडिंग राउंड में HCLTech ने प्रमुख रणनीतिक निवेशक के रूप में भाग लिया है.
सीरीज-B फंडिंग में जुटाए 234 मिलियन डॉलर
चेन्नई स्थित फुल-स्टैक सॉवरेन AI कंपनी Sarvam ने घोषणा की है कि उसने अपनी 300 मिलियन डॉलर की सीरीज-B फंडिंग के पहले चरण में 234 मिलियन डॉलर जुटाए हैं. कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन 1.5 अरब डॉलर आंका गया है. इस निवेश दौर में HCLTech और Bessemer Venture Partners शामिल हुए हैं, जबकि मौजूदा निवेशकों Khosla Ventures और Peak XV Partners ने भी अपना समर्थन जारी रखा है.
HCLTech करेगा 150 मिलियन डॉलर का निवेश
इस फंडिंग राउंड में HCLTech 150 मिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है. कंपनी का कहना है कि HCLTech की वैश्विक उपस्थिति, एंटरप्राइज ट्रांसफॉर्मेशन विशेषज्ञता, डेटा और सॉफ्टवेयर क्षमताएं Sarvam को भारत और वैश्विक बाजारों के लिए मजबूत AI इकोसिस्टम विकसित करने में मदद करेंगी.
HCLTech के सीईओ और प्रबंध निदेशक सी. विजयकुमार ने कहा कि यह निवेश भारत के भरोसेमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी AI इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने कहा कि Sarvam की AI रिसर्च और HCLTech की वैश्विक पहुंच मिलकर एंटरप्राइज और सरकारी संस्थानों के लिए सुरक्षित, स्केलेबल और जिम्मेदार AI समाधान विकसित करेंगी.
भारत के लिए सॉवरेन AI प्लेटफॉर्म बनाने पर फोकस
Sarvam के सह-संस्थापक प्रत्युष कुमार ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य ऐसे AI मॉडल विकसित करना है जो भारतीय भाषाओं, दस्तावेजों और स्थानीय जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकें. उनका कहना है कि कंपनी एंटरप्राइज और सरकारों को अपना स्वयं का सॉवरेन AI विकसित और संचालित करने में सक्षम बनाने के लिए फुल-स्टैक AI समाधान तैयार कर रही है.
नए निवेश का उपयोग कंपनी अपने अगले फ्रंटियर AI मॉडल के विकास, एजेंटिक AI, कोडिंग और साइबर सुरक्षा से जुड़े उपयोग मामलों पर शोध तथा बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने में करेगी.
भारत में विकसित किए कई उन्नत AI मॉडल
Sarvam ने पिछले कुछ महीनों में कई फाउंडेशन मॉडल लॉन्च किए हैं, जिन्हें पूरी तरह भारत में विकसित और प्रशिक्षित किया गया है. कंपनी के अनुसार, Sarvam 105B मॉडल ज्ञान, तर्क क्षमता और एजेंटिक AI बेंचमार्क पर कई बड़े मॉडलों के बराबर या उनसे बेहतर प्रदर्शन करता है. वहीं Sarvam 30B को उपभोक्ता हार्डवेयर पर चलने के लिए अनुकूलित किया गया है.
इसके अलावा Sarvam Vision प्लेटफॉर्म हस्तलिखित दस्तावेजों और भारतीय भाषाओं के रिकॉर्ड को डिजिटाइज करने में इस्तेमाल हो रहा है. कंपनी अब तक बीमा फॉर्म से लेकर पुराने भूमि अभिलेखों तक 3.5 करोड़ से अधिक पन्नों का डिजिटलीकरण कर चुकी है.
बैंकिंग, बीमा और रक्षा क्षेत्र में बढ़ रही पहुंच
Sarvam के AI समाधान तेजी से बैंकिंग, बीमा, सरकारी प्रौद्योगिकी और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनाए जा रहे हैं. कंपनी का संवादात्मक AI प्लेटफॉर्म प्रतिदिन 20 लाख से अधिक इंटरैक्शन संभाल रहा है और पिछले दो महीनों में इसका उपयोग दोगुना हो गया है. वहीं कंपनी का इन्फरेंस प्लेटफॉर्म भारत में रोजाना लगभग 1 करोड़ API कॉल प्रोसेस कर रहा है.
किसानों और बीमा ग्राहकों तक पहुंचा AI
Sarvam की तकनीक का उपयोग बड़े पैमाने पर सामाजिक प्रभाव पैदा करने के लिए भी किया जा रहा है. कंपनी के बहुभाषी वॉयस एजेंट प्लेटफॉर्म ने 1.7 करोड़ किसानों से डेटा एकत्र कर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई हैं.
इसके अलावा भारत की एक प्रमुख बीमा कंपनी के लिए Sarvam ने 4.5 करोड़ पॉलिसीधारकों तक पहुंचने वाले कम लागत वाले वॉयस अभियान को भी समर्थन दिया है.
AI को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का लक्ष्य
Sarvam के सह-संस्थापक विवेक राघवन ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य AI तकनीक को भारत में व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराना है, ताकि नागरिकों, छोटे व्यवसायों, उद्योगों और राज्य व केंद्र सरकारों को इसका लाभ मिल सके. उन्होंने कहा कि HCLTech के साथ साझेदारी इस बात का उदाहरण है कि भारतीय कॉरपोरेट समूह देश में AI की बुनियादी क्षमता निर्माण में कैसे योगदान दे सकते हैं.
भारत के AI क्षेत्र के लिए बड़ा संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि Sarvam की यह फंडिंग भारत के उभरते सॉवरेन AI इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. HCLTech जैसे बड़े तकनीकी समूह के समर्थन से कंपनी भारतीय भाषाओं, सरकारी उपयोग और एंटरप्राइज AI समाधानों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकती है.
ग्लोबल विंड डे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में पुरानी विंड टर्बाइनें संचालित हो रही हैं, जिन्हें आधुनिक और अधिक क्षमता वाली मशीनों से बदला जा सकता है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार की ओर से विंड एनर्जी सेक्टर को लेकर किए गए एक महत्वपूर्ण कदम ने निवेशकों का भरोसा बढ़ा दिया है. केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी के हालिया बयान और नई पहल के बाद सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली. मंगलवार को कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर 5 प्रतिशत तक उछल गया. बाजार का मानना है कि पुरानी विंड टर्बाइनों को आधुनिक तकनीक से बदलने की सरकारी योजना से विंड एनर्जी उद्योग को नई गति मिल सकती है.
पुरानी टर्बाइनों के आकलन का निर्देश
गोवा में ग्लोबल विंड डे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में पुरानी विंड टर्बाइनें संचालित हो रही हैं, जिन्हें आधुनिक और अधिक क्षमता वाली मशीनों से बदला जा सकता है. इससे बिना अतिरिक्त भूमि उपयोग के बिजली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव होगी. उन्होंने विंड इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (WIPPA) और इंडियन विंड टर्बाइन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IWTMA) को 30 दिनों के भीतर देशभर में पुरानी हो चुकी टर्बाइनों का विस्तृत आकलन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया.
भारत की विंड एनर्जी क्षमता पर सरकार का भरोसा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मजबूत लोकलाइजेशन, उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण भारत का विंड एनर्जी सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है. नेसेल, ब्लेड, टावर और एडवांस्ड गियरबॉक्स जैसे प्रमुख उपकरणों के निर्माण में भारतीय कंपनियां अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं और वैश्विक बाजार में भी विस्तार कर रही हैं.
WT-MARUT पोर्टल का शुभारंभ
कार्यक्रम के दौरान प्रह्लाद जोशी ने WT-MARUT पोर्टल भी लॉन्च किया. यह डिजिटल प्लेटफॉर्म विंड एनर्जी उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से लेकर प्रोजेक्ट साइट तक पूरी सप्लाई चेन की निगरानी और ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करेगा. सरकार के अनुसार, यह पोर्टल ट्रेसेबिलिटी, पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय अनुपालन को मजबूत बनाएगा. इससे विंड एनर्जी परियोजनाओं के संचालन में दक्षता बढ़ने की उम्मीद है.
सुजलॉन के नए 5 मेगावाट टर्बाइन का अनावरण
इस अवसर पर कर्नाटक के विजयनगर में प्रह्लाद जोशी ने सुजलॉन एनर्जी के अत्याधुनिक S175 (5 मेगावाट) विंड टरबाइन का भी अनावरण किया. कंपनी के अनुसार, 175 मीटर रोटर, 160 मीटर हाइब्रिड लैटिस टावर और 247.5 मीटर ब्लेड टिप ऊंचाई वाला यह टरबाइन अधिक ऊंचाई पर उपलब्ध तेज और स्थिर हवाओं का उपयोग कर ज्यादा बिजली उत्पादन करने में सक्षम है.
2030 तक 100 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य
भारत ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट और 2036 तक 156 गीगावाट विंड एनर्जी क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी टर्बाइनों के रिपावरिंग कार्यक्रम और नई तकनीकों के इस्तेमाल से इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी.
शेयर में दिखी जोरदार तेजी
सरकारी घोषणाओं के बाद सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली. दोपहर के कारोबार में खबर लिखे जाने तक कंपनी का शेयर 4.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 58.02 रुपये पर कारोबार करता दिखा. पिछले तीन महीनों में यह शेयर 40 प्रतिशत से अधिक चढ़ चुका है, जबकि तीन वर्षों में निवेशकों को 290 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दे चुका है.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार की रिपावरिंग योजना तेजी से आगे बढ़ती है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ विंड टरबाइन निर्माण और परियोजना विकास से जुड़ी कंपनियों को मिल सकता है.
मई में बढ़ी बेरोजगारी दर, रोजगार और श्रम भागीदारी दोनों में आई गिरावट, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अधिक चिंताजनक है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के श्रम बाजार से चिंताजनक संकेत सामने आए हैं. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के ताजा मासिक सर्वेक्षण के अनुसार, मई 2026 में देश की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले 11 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. इसके साथ ही श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) और रोजगार दर (WPR) में भी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे रोजगार बाजार की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई दे रही है.
11 महीने के निचले स्तर पर पहुंची श्रम भागीदारी दर
सर्वेक्षण के अनुसार, मई में काम कर रहे या सक्रिय रूप से रोजगार की तलाश कर रहे लोगों का अनुपात घटकर 54.4 प्रतिशत रह गया, जो पिछले 11 महीनों का सबसे निचला स्तर है. अप्रैल में यह आंकड़ा 55 प्रतिशत था. ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम भागीदारी दर अप्रैल के 57.5 प्रतिशत से घटकर 56.6 प्रतिशत पर आ गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 50.1 प्रतिशत से मामूली गिरावट के साथ 49.8 प्रतिशत दर्ज की गई.
रोजगार दर में भी लगातार गिरावट
मई के दौरान रोजगार प्राप्त लोगों का अनुपात भी घटा है. अप्रैल में जहां यह 52.2 प्रतिशत था, वहीं मई में यह घटकर 51.4 प्रतिशत रह गया. यह भी पिछले 11 महीनों का सबसे निचला स्तर है. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार दर 54.9 प्रतिशत से घटकर 53.8 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 46.8 प्रतिशत से घटकर 46.6 प्रतिशत रह गई.
NSO ने बताए श्रम बाजार की कमजोरी के संकेत
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय का कहना है कि कामकाजी आबादी और रोजगार प्राप्त लोगों के अनुपात में कमी तथा बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी श्रम बाजार की कमजोर होती स्थिति की ओर इशारा करती है. रिपोर्ट के अनुसार, रोजगार के अवसरों में कमी, काम की तलाश करने वालों की संख्या में आई गिरावट की तुलना में अधिक तेज रही है. यही वजह है कि बेरोजगारी दर में वृद्धि दर्ज की गई. मई के दौरान आर्थिक गतिविधियों में मौसमी सुस्ती को भी इस स्थिति का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है.
पुरुषों और महिलाओं दोनों के रोजगार में कमी
रोजगार के मोर्चे पर पुरुषों और महिलाओं दोनों की स्थिति कमजोर हुई है. मई में पुरुषों का रोजगार अनुपात अप्रैल के 73.2 प्रतिशत से घटकर 72.5 प्रतिशत रह गया. वहीं महिलाओं का रोजगार अनुपात 32.1 प्रतिशत से घटकर 31 प्रतिशत पर आ गया. यह आंकड़े संकेत देते हैं कि रोजगार के अवसरों में कमी का असर दोनों वर्गों पर समान रूप से पड़ा है.
ग्रामीण भारत में बढ़ी बेरोजगारी, शहरों में मामूली राहत
मई में शहरी क्षेत्रों की बेरोजगारी दर 6.4 प्रतिशत रही, जो अप्रैल के 6.6 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ी कम है. हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ी है, जहां बेरोजगारी दर 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो गई.
महिलाओं की बेरोजगारी दर पुरुषों से अधिक
लैंगिक आधार पर देखें तो बेरोजगारी दर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पुरुषों की बेरोजगारी दर अप्रैल के 5.1 प्रतिशत से बढ़कर मई में 5.4 प्रतिशत हो गई. वहीं महिलाओं की बेरोजगारी दर 5.4 प्रतिशत से बढ़कर 5.6 प्रतिशत पर पहुंच गई.
क्या कहते हैं आंकड़े?
मई 2026 के आंकड़े संकेत देते हैं कि देश के श्रम बाजार पर दबाव बढ़ रहा है. बेरोजगारी दर में वृद्धि के साथ श्रम भागीदारी और रोजगार दर में गिरावट यह दर्शाती है कि रोजगार सृजन की गति धीमी हुई है. विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन सकती है. यदि आने वाले महीनों में रोजगार के अवसरों में सुधार नहीं हुआ, तो श्रम बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है.
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 16 जून से डीजल और ATF के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) की नई दरें लागू हो गई हैं.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है. सरकार का कहना है कि यह कदम घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और निर्यातकों को वैश्विक कीमतों के अंतर का अतिरिक्त लाभ उठाने से रोकने के लिए उठाया गया है. हालांकि पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
16 जून से लागू हुई नई दरें
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 16 जून से डीजल और ATF के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) की नई दरें लागू हो गई हैं. सरकार ने डीजल के निर्यात पर SAED को 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. वहीं ATF के निर्यात पर यह शुल्क 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. दूसरी ओर, पेट्रोल के निर्यात पर लागू शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह पहले की तरह 1.5 रुपये प्रति लीटर बना रहेगा.
घरेलू बाजार पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन कर ढांचे में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं होगा.
पश्चिम एशिया संकट के बाद बढ़ी सतर्कता
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों तथा उसके बाद हुए जवाबी हमलों से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया था. इसके चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.
इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने 26 मार्च को डीजल और ATF के निर्यात पर शुल्क लगाया था और तब से हर पखवाड़े इसकी समीक्षा की जा रही है. बाद में 16 मई को पेट्रोल के निर्यात पर भी शुल्क लगाया गया था.
क्यों बढ़ाया गया विंडफॉल टैक्स?
सरकार का मानना है कि युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. ऐसे माहौल में निर्यातकों को वैश्विक कीमतों का असामान्य लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य ऐसे अतिरिक्त मुनाफे पर नियंत्रण रखना और घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है. सरकार चाहती है कि वैश्विक संकट के दौर में ईंधन निर्यात के कारण देश के भीतर आपूर्ति प्रभावित न हो और ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे.