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किसानों को मिली बड़ी राहत, सरकार ने दी PM Aasha स्कीम को जारी रखने की मंजूरी!

प्रधानमंत्री आशा (PM Aasha) स्कीम का दायरा बढ़ सकता है. इस स्कीम के तहत फसल के भाव मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) से नीचे जाने पर सरकार दालों और तिलहन की खरीदारी करती है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारत सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते वाला फैसला लिया है. दरअसल, सरकार ने प्रधानमंत्री आशा स्कीम (PM Aasha Scheme) को जारी रखने और इसका दायरा बढ़ाने को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट ने 35,000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली पीएम आशा (अन्नदाता आय संरक्षण अभियान) को मंजूरी दे दी है. इसके तहत सभी दालों और तिलहन को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने की योजना है. तो आइए जानते हैं ये स्कीम क्या है और इससे किसानों को क्या फायदा होता है?

क्या है पीएम आशा स्कीम और इसका फायदा
पीएम आशा स्कीम किसानों को दालों और तिलहन की खरीद के लिए किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का आश्वासन देती है, जिससे उनकी आय में सुधार होता है और आर्थिक सुरक्षा मिलती है. बता दें, पीएम-आशा स्कीम की घोषणा सितंबर 2018 में की गई थी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दलहन, तिलहन आदि उगाने वाले किसानों को हर साल उनकी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले. एमएसपी भारत सरकार द्वारा कृषि उत्पादकों को कृषि मूल्य में किसी भी तेज गिरावट के खिलाफ सुरक्षा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने का एक तरीका है. साथ ही सरकार की ओर से किसानों की उपज के लिए एक गारंटी मूल्य है. सरकार इस स्कीम के जरिए देश को दालों और तिलहन में आत्म निर्भर बनने की तैयारी कर रही है. 

स्कीम के लिए मिला इतना बजट
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि 15वें वित्त आयोग के दौरान 2025-26 तक कैबिनेट ने 35,000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली पीएम आशा (अन्नदाता आय संरक्षण अभियान) को मंजूरी दे दी है. पीएम आशा दलहन, तिलहन और अन्य आवश्यक कृषि-बागवानी वस्तुओं के उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगी. इसके तहत सभी दालों और तिलहन को MSP पर खरीदने की योजना है. बता दें कि इस स्कीम के तहत फसल के भाव MSP से नीचे जाने पर सरकार खरीदारी करती है. हाल में ही सोयाबीन का दाम MSP से नीचे चला गया था, जिसके बाद सरकार ने 3 राज्यों में सोयाबीन खरीदने का फैसला लिया था. बता दें कि केंद्र सरकार दालों, तिलहन, कोपरा आदि के लिए 2018 से एमएसपी योजना चला रही है. इसके तहत एमएसपी से कम दाम होने से कीमत में अंतर का भुगतान किया जाता है. इस योजना की बदौलत दालों का बफर स्टॉक कुछ लाख टन से बढ़कर 20 लाख टन हो गया है. 

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