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यूनिटेक के पूर्व प्रमोटरों को SEBI से मिली राहत, शेयर में हेराफेरी के आरोप खारिज
शेयरों में कथित हेराफेरी के आरोप में संजय चंद्रा और अजय चंद्रा को सेबी से राहत मिल गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
यूनिटेक के पूर्व प्रमोटर संजय चंद्रा और अजय चंद्रा को बाजार नियामक SEBI से राहत मिली है. सेबी ने जांच के बाद दोनों पर लगे शेयरों में हेराफेरी के आरोपों को खारिज कर दिया है. सेबी अपने ऑर्डर में कहा है कि इस बात के पर्याप्त सबूत नहीं हैं कि दोनों भाइयों ने धोखाधड़ी या हेराफेरी करके शेयरों का सौदा किया. इसके साथ ही बाजार नियामक ने चंद्रा बंधुओं के खिलाफ कंपनी के शेयर मूल्य में हेराफेरी करने के लिए विदेशी बैंक खातों के माध्यम से भारतीय शेयर बाजार में पैसा लगाने के आरोपों को खारिज कर दिया.
EOW कर रही जांच
रियल्टी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी यूनिटेक के पूर्व प्रमोटर मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. दोनों धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच का सामना कर रहे हैं. ऐसे में सेबी से आई यह खबर उनके लिए बड़ी राहत है. 21 जून यानी आज जारी आदेश में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बताया है कि संजय चंद्रा और अजय चंद्रा के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही का निपटारा कर दिया गया है.
SEBI ने कही ये बात
सेबी के आदेश में कहा गया है - जांच रिपोर्ट (IR) या आईआर के साथ उपलब्ध कराई गई सामग्री में इस आरोप को स्थापित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं कि नोटिस प्राप्तकर्ताओं (चंद्रा बंधुओं) ने यूनिटेक की प्रतिभूतियों में अप्रत्यक्ष रूप से धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से कारोबार किया और यूनिटेक की प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री के संबंध में जोड़-तोड़ और भ्रामक तरीके अपनाए हैं या सच्चाई को गलत तरीके से पेश किया है या यूनिटेक के शेयरों को धोखाधड़ी से खरीदने के बारे में ज्ञात महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाया है.
क्या है मामला?
नियामक ने इस बात की स्वत: संज्ञान लेकर जांच शुरू की थी कि क्या 1 अप्रैल, 2006 से 31 मार्च, 2008 के बीच संजय चंद्रा और अजय चंद्रा द्वारा यूबीएस AG के बैंक खातों के माध्यम से भारतीय प्रतिभूति बाजार में पैसा लगाया गया, जो सेबी अधिनियम, 1992 और उसके तहत बनाए गए विनियमों तथा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड अधिनियम, 2003 के प्रावधानों का उल्लंघन है. सेबी ने अब यह साफ कर दिया है कि चंद्रा बंधुओं पर लगाये गए आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं, इसलिए कार्यवाही का निपटारा किया जा रहा है.
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