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MSME निर्यातकों को बड़ी राहत, सरकार ने ₹7,295 करोड़ के सपोर्ट पैकेज को हरी झंडी दी

यह पैकेज ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मांग में सुस्ती और व्यापारिक चुनौतियों के चलते छोटे निर्यातकों पर दबाव बढ़ा हुआ है. सरकार का यह कदम भारतीय निर्यात को मजबूती देने और एमएसएमई सेक्टर को स्थिरता प्रदान करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के बीच छोटे और मझोले निर्यातकों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने ₹7,295 करोड़ के निर्यात सहायता पैकेज की घोषणा की है, जिसका मकसद एमएसएमई और पहली बार निर्यात करने वाले कारोबारियों को सस्ता ऋण और बेहतर फाइनेंसिंग सपोर्ट उपलब्ध कराना है. यह पैकेज वित्त वर्ष 2026-31 तक छह साल के लिए लागू रहेगा.

ब्याज सहायता और ऋण गारंटी दोनों शामिल

सरकार द्वारा घोषित इस पैकेज में दो प्रमुख उपाय शामिल हैं. पहला, ₹5,181 करोड़ की ब्याज सहायता योजना, और दूसरा, ₹2,114 करोड़ की निर्यात ऋण गारंटी योजना. इन दोनों योजनाओं के जरिए निर्यातकों की कार्यशील पूंजी की समस्या को कम करने और बैंक ऋण तक उनकी पहुंच आसान बनाने का लक्ष्य रखा गया है.

सस्ते ब्याज पर मिलेगा निर्यात ऋण

ब्याज सहायता योजना के तहत निर्यातकों को निर्यात से पहले और निर्यात के बाद लिए गए ऋण पर सब्सिडी दी जाएगी. इससे एमएसएमई निर्यातकों को बाजार दर से कम ब्याज पर निर्यात ऋण उपलब्ध हो सकेगा. सरकार ने इस योजना के लिए छह साल में ₹5,181 करोड़ खर्च करने का प्रावधान किया है. शुरुआत में ₹830 करोड़ के बकाया भुगतान का निपटान किया जाएगा. चालू वित्त वर्ष में सरकार को दोनों योजनाओं पर करीब ₹400 करोड़ खर्च होने की उम्मीद है.

2.75 फीसदी तक ब्याज में राहत

वाणिज्य विभाग के अनुसार, इस योजना के तहत निर्यातकों को 2.75 फीसदी की बुनियादी ब्याज रियायत दी जाएगी. इसके अलावा, कम प्रतिनिधित्व वाले और उभरते बाजारों में निर्यात के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया गया है. हालांकि, इन अतिरिक्त लाभों का क्रियान्वयन परिचालन तैयारियों पर निर्भर करेगा. यह योजना 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात संवर्धन मिशन का हिस्सा है, जिसे नवंबर में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी.

ब्याज समानीकरण योजना का नया रूप

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, यह योजना ब्याज समानीकरण योजना (IES) का नया संस्करण है, जिसे 31 दिसंबर 2024 के बाद बंद कर दिया गया था. नई व्यवस्था में योजना का फोकस मुख्य रूप से छोटे और पहली बार निर्यात करने वाले निर्यातकों पर रहेगा. पात्रता के लिए वार्षिक टर्नओवर की सीमा तय की जाएगी. सरकार ने साफ किया है कि इसका उद्देश्य सभी निर्यातकों को कवर करना नहीं, बल्कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात में छोटे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी की परेशानी को दूर करना है.

उभरते बाजारों में निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

वाणिज्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अजय भादू ने बताया कि नए और उभरते बाजारों में निर्यात करने वाले एमएसएमई को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह योजना कुल शुल्क लाइनों के 75 फीसदी को कवर करेगी और उत्पादों का चयन इस तरह किया गया है कि श्रम-प्रधान और अधिक पूंजी निवेश वाले सेक्टरों को प्राथमिकता मिले.

ब्याज दर की नियमित समीक्षा और सीमा तय

वाणिज्य विभाग के मुताबिक, घरेलू और वैश्विक बेंचमार्क के आधार पर हर साल मार्च और सितंबर में ब्याज दर की समीक्षा की जाएगी. प्रति फर्म वार्षिक लाभ की अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये तय की गई है. योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी किए जाएंगे. योजना की कार्यान्वयन एजेंसी RBI होगी.

निर्यात ऋण के लिए गारंटी समर्थन

सरकार ने निर्यात ऋण के लिए 2,114 करोड़ रुपये की गारंटी सहायता का भी ऐलान किया है. इसके तहत एमएसएमई निर्यातकों को निर्यात से जुड़ी कार्यशील पूंजी के लिए ऋण गारंटी दी जाएगी. इस योजना के अंतर्गत प्रति फर्म 10 करोड़ रुपये तक की ऋण गारंटी मिलेगी. सूक्ष्म और लघु निर्यातकों को 85 फीसदी तक और मझोले निर्यातकों को 65 फीसदी तक गारंटी कवरेज दिया जाएगा.

 


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