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निवेशकों के लिए बड़ी खबर, NSE में अडानी पावर समेत 6 नए स्टॉक्स पर होगी F&O ट्रेडिंग
एनएसई का कहना है कि F&O सेगमेंट में नई कंपनियों को शामिल करने का मुख्य उद्देश्य बाजार में गहराई और तरलता बढ़ाना है. इससे निवेशकों को डेरिवेटिव ट्रेडिंग में ज्यादा विकल्प मिलेंगे और बाजार की गतिविधि भी बढ़ेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने डेरिवेटिव बाजार को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. एक्सचेंज ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल 2026 से छह नई कंपनियों के शेयरों को फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में शामिल किया जाएगा. इस फैसले से निवेशकों को ट्रेडिंग के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे और बाजार में तरलता बढ़ने की उम्मीद है.
1 अप्रैल से लागू होगा फैसला
एनएसई ने सोमवार शाम जारी एक सर्कुलर में बताया कि 1 अप्रैल 2026 से छह कंपनियों के शेयरों को F&O सेगमेंट में जोड़ा जाएगा. इनमें अदाणी पावर, कोचीन शिपयार्ड, ह्यूंडै मोटर इंडिया, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज, निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट और विशाल मेगा मार्ट शामिल हैं. इन कंपनियों के शेयरों के शामिल होने से डेरिवेटिव बाजार में निवेश के अवसर और बढ़ेंगे. इससे ट्रेडर्स और निवेशकों को नई कंपनियों में F&O ट्रेडिंग का मौका मिलेगा.
30 मार्च को घोषित होगी लॉट और स्ट्राइक प्राइस योजना
एनएसई के अनुसार इन सभी शेयरों के लिए मार्केट लॉट और स्ट्राइक प्राइस की योजना 30 मार्च 2026 को घोषित की जाएगी. इसके अलावा कितनी मात्रा तक ट्रेडिंग पर रोक यानी क्वांटिटी फ्रीज लागू होगी, इसकी जानकारी कॉन्ट्रैक्ट फाइल में दी जाएगी. यह कॉन्ट्रैक्ट फाइल 1 अप्रैल से ट्रेडिंग के लिए प्रभावी होगी. इससे निवेशकों को ट्रेडिंग से पहले जरूरी जानकारी मिल सकेगी.
बाजार में बढ़ेगी गहराई और तरलता
एनएसई का कहना है कि F&O सेगमेंट में नई कंपनियों को शामिल करने का मुख्य उद्देश्य बाजार में गहराई और तरलता बढ़ाना है. इससे निवेशकों को डेरिवेटिव ट्रेडिंग में ज्यादा विकल्प मिलेंगे और बाजार की गतिविधि भी बढ़ेगी.
F&O ट्रेडिंग में जोखिम भी अधिक
हालांकि फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग को काफी जोखिम भरा माना जाता है. बाजार नियामक सेबी और सरकार पहले ही खुदरा निवेशकों को इस बाजार में अत्यधिक जोखिम लेने से बचाने के लिए कई कदम उठा चुके हैं. सेबी की एक स्टडी के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में F&O बाजार में ट्रेडिंग करने वाले 90 प्रतिशत से अधिक व्यक्तिगत निवेशकों को नुकसान हुआ. रिपोर्ट के अनुसार इन निवेशकों का कुल शुद्ध नुकसान बढ़कर 1,05,603 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 74,812 करोड़ रुपये था.
सट्टेबाजी रोकने के लिए सेबी के कदम
बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी को रोकने और निवेशकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए सेबी ने कई कदम उठाए हैं. इनमें साप्ताहिक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव, कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाना, अधिक मार्जिन की आवश्यकता और इंट्राडे पोजिशन लिमिट की निगरानी जैसे उपाय शामिल हैं.
F&O पर टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव
इस बीच सरकार ने भी फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह प्रस्ताव वित्त वर्ष 2027 के बजट में पेश किया था. प्रस्ताव के अनुसार फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट पर STT 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया जाएगा. वहीं ऑप्शंस प्रीमियम पर STT 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत और ऑप्शंस एक्सरसाइज पर 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है. सरकार के अनुसार STT की नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू हो सकती हैं.
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