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NCLT का बड़ा फैसला, अनिल अंबानी को ED-CBI दस्तावेज देखने की अनुमति

यह विवाद मई 2018 में शुरू हुई दिवाला कार्यवाही से जुड़ा है, जब एरिक्सन इंडिया ने 550 करोड़ रुपये के बकाया को लेकर रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी. उस समय अनिल अंबानी कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक थे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई पीठ ने उद्योगपति अनिल धीरूभाई अंबानी को बड़ी राहत देते हुए उन्हें जांच एजेंसियों से जुड़े दस्तावेज़ों तक सीमित पहुंच की अनुमति दे दी है. यह मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस के दिवालिया प्रक्रिया से जुड़ा है.

क्या है पूरा मामला

यह विवाद मई 2018 में शुरू हुई दिवाला कार्यवाही से जुड़ा है, जब एरिक्सन इंडिया ने 550 करोड़ रुपये के बकाया को लेकर रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी. उस समय अनिल अंबानी कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक थे.

अदालत में क्या दलील दी गई

अनिल अंबानी ने ट्रिब्यूनल को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उनके खिलाफ जांच शुरू की है, जो उनके कार्यकाल के दौरान कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड पर आधारित है. उन्होंने यह भी कहा कि फरवरी 2026 में दस्तावेज़ों की मांग के बावजूद उन्हें कोई जवाब नहीं मिला, जिससे उनके बचाव का अधिकार प्रभावित हो रहा है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हो रहा है.

रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल का विरोध

मामले में रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने अंबानी की याचिका का विरोध किया. उनका कहना था कि 2019 में इस्तीफा देने के बाद अंबानी का कंपनी के गोपनीय दस्तावेज़ों पर कोई अधिकार नहीं बचता. साथ ही, गोपनीयता बनाए रखने की कानूनी बाध्यता भी बताई गई.

ट्रिब्यूनल की अहम टिप्पणी

ट्रिब्यूनल ने माना कि जब मई 2018 में कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू हुई, उस समय अंबानी निदेशक थे, जो कानूनी रूप से महत्वपूर्ण तथ्य है.

पीठ ने कहा कि निलंबित निदेशक को कंपनी के रिकॉर्ड तक पहुंच से वंचित नहीं किया जा सकता, खासकर जब उसे अपने खिलाफ चल रही कार्यवाही में बचाव करना हो. बिना रिकॉर्ड के कोई भी निदेशक लेन-देन की व्याख्या या अपना पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रख सकता.

किन शर्तों पर मिली अनुमति

ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि दस्तावेजों तक पहुंच केवल CIRP शुरू होने से पहले की अवधि तक सीमित रहेगी. अंबानी को गोपनीयता संबंधी शपथ (undertaking) देनी होगी. आवश्यक लागत का भुगतान करना होगा.

किन दस्तावेजों से किया इनकार

ट्रिब्यूनल ने अन्य समूह कंपनियों से जुड़े दस्तावेज़ या ऐसे रिकॉर्ड देने से इनकार कर दिया, जो रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के पास मौजूद नहीं हैं.

अपने अंतिम आदेश में ट्रिब्यूनल ने कहा कि संबंधित पक्ष अंबानी को CIRP शुरू होने से पहले की अवधि के रिकॉर्ड उपलब्ध कराए और जरूरत पड़ने पर उनकी प्रतियां लेने की भी अनुमति दी जाए, बशर्ते सभी शर्तों का पालन किया जाए.


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