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RBI का बड़ा कदम: 50,000 करोड़ रुपये की खरीद से बढ़ी बैंकों की लोन क्षमता

RBI के इस कदम से नकदी बढ़ेगी, लोन देने की क्षमता में सुधार होगा और आने वाले महीनों में लोन की ब्याज दरों में स्थिरता या कमी देखने को मिल सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी उपलब्ध कराने के लिए ओपन मार्केट से 50,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद की है. इस कदम के बाद बैंकों की लोन देने की क्षमता बढ़ेगी और आने वाले दिनों में क्रेडिट ग्रोथ को रफ्तार मिलने की उम्मीद है.

पहला चरण पूरा, 18 दिसंबर को होगी दूसरी खरीद

RBI ने दिसंबर महीने में कुल 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज खरीदने का प्लान तैयार किया है. इसी के तहत पहले चरण में 50,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियों की खरीद पूरी कर ली गई है. दूसरा चरण 18 दिसंबर को होगा, जिसमें इतनी ही राशि की और खरीद की जाएगी. ये प्रतिभूतियां 4 साल से लेकर 25 साल की अलग-अलग अवधि वाली हैं, जिससे बैंकिंग सिस्टम में लंबी अवधि के लिए तरलता बढ़ेगी.

कितनी अवधि की कौन सी सिक्योरिटीज खरीदी गईं?

RBI ने जिन सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद की है, उनमें 2029 में मैच्योर होने वाली 6,638 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियां 6.75% पर, 2031 की 15,316 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियां 7.02% पर और 2032 की 21,189 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियां 7.26% पर खरीदी गई हैं. इसके अलावा, 2034 में मैच्योर होने वाली 1,033 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियां 6.79% पर, 2036 की 3,942 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियां 7.54% पर, 2039 की 657 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियां 6.92% पर और 2050 में परिपक्व होने वाली 1,225 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियां 6.67% पर खरीदी गई हैं. इन खरीदों का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी बनाए रखना और ब्याज दरों को स्थिर रखने में मदद करना है.

क्यों बढ़ाई जा रही है बैंकिंग सिस्टम में तरलता?

RBI का मानना है कि बाजार में पर्याप्त नकदी होने से बैंकों की लोन देने की क्षमता बढ़ती है, आर्थिक गतिविधियों में तेजी आती है और ब्याज दरों को स्थिर रखने में मदद मिलती है. इसके अलावा, इससे क्रेडिट ग्रोथ को सपोर्ट भी मिलता है. मौजूदा समय में बड़ी बैंकों के पास तरलता की जरूरत बढ़ी थी, जिसे पूरा करने के लिए यह बूस्टर डोज दिया गया है.

रेपो रेट में भी की गई कमी

RBI इस साल पहले ही चार बार रेपो रेट में कटौती कर चुका है. हाल ही में 0.25% की कमी के बाद रेपो रेट घटकर 5.25% पर आ गया है. साल की शुरुआत से अब तक कुल 1.25% की कटौती की जा चुकी है. रेपो रेट कम होने का मतलब है कि बैंकों को सस्ता फंड मिलता है, होम लोन और ऑटो लोन की EMI घटती है और खपत व निवेश बढ़ता है. RBI ने यह कदम जीडीपी ग्रोथ में सुधार और महंगाई दर 4% के लक्ष्य से नीचे रहने के कारण उठाया है.

 


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